तस्वीर में बाएं से दाएं, मंच पर खड़े कुछ लोग और महाकवयित्री डॉ. मधु चतुर्वेदी हाथ में पुस्तक लिए नजर आ रहे हैं।

हिंदी साहित्य में प्रथम महिला शास्त्रीय महाकाव्य ‘देवयानी’ की रचयिता महाकवयित्री डॉ. मधु चतुर्वेदी के जीवन के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में श्री वेंकटेश्वरा विश्वविद्यालय में गरिमामय राष्ट्रीय साहित्यिक समारोह के रूप में अमृत महोत्सव का आयोजन किया गया। समारोह का मुख्य उद्देश्य महाकवयित्री के कृतित्व, व्यक्तित्व और हिंदी साहित्य में उनके ऐतिहासिक योगदान को नई पीढ़ी के समक्ष प्रस्तुत करना रहा।

कार्यक्रम के प्रथम सत्र में डॉ. मधु चतुर्वेदी के कृतित्व और व्यक्तित्व पर उद्बोधन हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्मश्री अलंकृत विश्वविख्यात कवि सुरेन्द्र शर्मा रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में आश्रम परम्परा के सिद्ध विचारक पुष्कर मिश्रा एवं विख्यात विचारक उमापति दीक्षित उपस्थित रहे। कार्यक्रम को सांस्कृतिक विचारक अरविन्द नारायण मिश्रा का सान्निध्य भी मिला। प्रथम सत्र का संचालन सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं मधुरम् के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो. डॉ. राहुल अवस्थी ने किया।

इस सत्र में परिवार, युवा, वरिष्ठ महिला, वरिष्ठ पुरुष एवं विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों के रूप में क्रमशः वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. (डॉ.) मधुमुकुल चतुर्वेदी, अभिनव अतिथि सदस्य राजभाषा हिंदी सलाहकार समिति, शिक्षा मंत्रालय, प्रख्यात कवयित्री एवं प्रखर वक्ता डॉ. रमा सिंह, प्रख्यात कवि एवं चिंतक अशोक मैत्रेय तथा प्रति-कुलाधिपति, श्री व्यंकटेश्वर विश्वविद्यालय डॉ. राजीव त्यागी ने महाकवयित्री के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अपने विचार व्यक्त किए।

भोजनावकाश के बाद समारोह का द्वितीय सत्र रचना वाचन एवं सांगीतिक प्रस्तुति का रहा। इस सत्र में प्रख्यात ध्रुपद गायक पं. शिव दर्शन द्विवेदी ने महाकवयित्री की रचनाओं की सांगीतिक प्रस्तुति दी। द्वितीय सत्र का संचालन सुप्रसिद्ध कवि एवं मधुरम् के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. चेतन आनन्द ने किया।

समारोह में पधारे सभी साहित्यकारों का महाकवयित्री डॉ. मधु चतुर्वेदी, श्री व्यंकटेश्वर विश्वविद्यालय के प्रति-कुलाधिपति डॉ. राजीव त्यागी एवं प्रो. मधुमुकुल चतुर्वेदी द्वारा सम्मान किया गया। अखिल भारतीय साहित्य परिषद, मेरठ प्रान्त के प्रान्तीय महासचिव यतीन्द्र कटारिया विद्यालंकार ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

उन्होंने सभी साहित्य प्रेमियों से आग्रह किया कि, “आइए, महाकवयित्री की अमर वाणी से प्रेरणा लेकर साहित्य, संस्कृति और संवेदना का यह उत्सव सतत मनाते रहें।” इस प्रकार डॉ. मधु चतुर्वेदी के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित अमृत महोत्सव में उनके साहित्यिक कृतित्व, व्यक्तित्व और हिंदी साहित्य में योगदान को केंद्र में रखते हुए विभिन्न साहित्यिक एवं सांगीतिक प्रस्तुतियां हुईं।

Tags: