सलूम्बर जिले के सराड़ा थाना क्षेत्र में दोस्ती के जरिए भरोसा जीतकर बैंक खाते का कथित तौर पर साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने परिवादी के बैंक खाते में बार-बार रकम जमा करवाने और फिर अलग-अलग बैंक खातों तथा यूपीआई आईडी पर रुपये हस्तांतरित करवाने के आरोप में दो युवकों और एक युवती को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब ठगी की रकम के लेन-देन और इस मामले में शामिल अन्य व्यक्तियों के संबंध में जांच कर रही है।

जिला पुलिस अधीक्षक विष्णुराम विश्नोई के निर्देश पर सराड़ा थाना पुलिस ने यह कार्रवाई की। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रतन चावला के पर्यवेक्षण तथा सराड़ा वृत्ताधिकारी कृष्ण गोपाल के निर्देशन में थानाधिकारी महेंद्र सिंह की टीम ने मामले की जांच की और तकनीकी जानकारी एवं साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया।

पुलिस के अनुसार, परिवादी लक्ष्मणलाल मीणा ने सराड़ा थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई कि वह उदयपुर में किराए का कमरा लेकर पढ़ाई कर रहा था। इसी दौरान उसके आसपास रहने वाले विकास जोगी निवासी सवाई माधोपुर, दिलीप मीणा निवासी अलवर और एक युवती ने उससे दोस्ती कर ली। आरोप है कि तीनों ने अपने रिश्तेदारों और परिचितों से रुपये आने का बहाना बनाकर लक्ष्मणलाल के बैंक खाते में बार-बार रकम जमा करवाई। इसके बाद उसके माध्यम से अलग-अलग बैंक खातों और यूपीआई आईडी पर रुपये हस्तांतरित करवाए गए।

परिवादी के अनुसार, जब उसने अपने बैंक खाते में रुपये जमा करवाने से इनकार किया तो आरोपियों ने उसे डराया-धमकाया और मारपीट करने की धमकी भी दी। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

अनुसंधान के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों और तकनीकी जानकारी के आधार पर पुलिस ने मामले में संलिप्त आरोपियों की पहचान की। गिरफ्तार आरोपियों में दिलीप मीणा (23), निवासी झालाटाला, थाना लक्ष्मणगढ़, जिला अलवर और विकास जोगी (24), निवासी भाड़ौती, थाना मलारना डूंगर, जिला सवाई माधोपुर शामिल हैं। इनके साथ एक युवती को भी गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जांच में साइबर ठगी की रकम के लेन-देन और मामले में अन्य व्यक्तियों की संभावित संलिप्तता से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

जिला पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने बैंक खाते में रकम प्राप्त न करें। बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक, ओटीपी और बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा न करें। खाते में संदिग्ध रकम आने पर तत्काल बैंक और पुलिस को सूचित करें। साइबर ठगी का शिकार होने पर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करवाएं।

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