सलूंबर में बाल विवाह रोकथाम और महिला सशक्तीकरण पर कार्यशाला, उद्यम के लिए ₹1 करोड़ तक ऋण की जानकारी
सलूंबर में जिला प्रशासन और महिला अधिकारिता विभाग की कार्यशाला में बाल विवाह रोकथाम, बालिका शिक्षा और महिला सुरक्षा पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री नारी शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना के तहत ₹1 करोड़ तक ऋण और ₹12.50 लाख तक अनुदान के प्रावधानों की जानकारी दी गई।
सलूंबर में आयोजित बाल विवाह प्रतिषेध एवं नारी शक्ति उद्यम प्रोत्साहन कार्यशाला।
सलूंबर में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति की रोकथाम, बालिकाओं की शिक्षा एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। जिला प्रशासन एवं महिला अधिकारिता विभाग, सलूंबर के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को आयोजित इस कार्यशाला में बाल विवाह प्रतिषेध कानून के प्रावधानों के साथ मुख्यमंत्री नारी शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना के तहत मिलने वाली ऋण सुविधाओं और अनुदान की जानकारी दी गई।
कार्यशाला में विधिक सेवा प्राधिकरण से अपर जिला न्यायाधीश श्री विनीत कुमार ने बाल विवाह प्रतिषेध कानून के प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि बाल विवाह की रोकथाम समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बालिकाओं के अधिकारों की रक्षा, उनकी शिक्षा को प्रोत्साहित करने और बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं के विरुद्ध जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के उद्देश्यों को आगे बढ़ाते हुए आमजन से बालिकाओं को शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराने और कम उम्र में विवाह नहीं करने की अपील की गई। साथ ही बाल विवाह की सूचना मिलने पर संबंधित अधिकारियों को सूचित करने तथा इसकी रोकथाम के लिए सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया गया।
मुख्यमंत्री नारी शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना की जानकारी दी
महिला अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक श्री मोतीलाल मीना ने मुख्यमंत्री नारी शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना के उद्देश्य और प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को उद्यम स्थापित करने, स्वरोजगार अपनाने और अपने व्यवसाय का विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
कार्यशाला में योजना के तहत व्यक्तिगत महिला उद्यमियों, महिला स्वयं सहायता समूहों तथा उनके क्लस्टर एवं फेडरेशन को उपलब्ध ऋण सुविधाओं और अनुदान संबंधी प्रावधानों के बारे में बताया गया। पात्रता और परियोजना के नियमानुसार व्यक्तिगत महिला उद्यमियों को ₹50 लाख तक तथा महिला स्वयं सहायता समूहों एवं उनके क्लस्टर और फेडरेशन को ₹1 करोड़ तक ऋण सुविधा उपलब्ध होने की जानकारी साझा की गई।
योजना के अंतर्गत सामान्य श्रेणी की महिलाओं के लिए परियोजना लागत पर 25 प्रतिशत तथा विशेष श्रेणी की महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान बताया गया। विशेष श्रेणी में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, विधवा एवं दिव्यांग महिलाएं शामिल हैं। अनुदान की अधिकतम सीमा ₹12.50 लाख निर्धारित होने की जानकारी भी दी गई।
अधिकारियों ने इच्छुक पात्र महिलाओं को योजना की पात्रता, आवश्यक दस्तावेजों और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त कर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन करने के लिए प्रेरित किया। कार्यशाला के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने पर जोर दिया गया।
महिला सुरक्षा एवं सहायता केंद्रों के कार्मिक रहे उपस्थित
कार्यशाला में महिला अधिकारिता विभाग के समस्त पर्यवेक्षक, पन्नाधाय सुरक्षा एवं सम्मान केंद्र, सखी वन स्टॉप सेंटर तथा महिला सुरक्षा एवं सम्मान केंद्र के केंद्र प्रबंधक एवं कार्मिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में बाल विवाह की रोकथाम, महिला अधिकारों के संरक्षण, बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए विभागीय योजनाओं का लाभ पात्र महिलाओं तक पहुंचाने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि सामाजिक जागरूकता और सरकारी योजनाओं की जानकारी के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।