सलूम्बर में चुनाव ड्यूटी आवंटन पर शिक्षकों में असंतोष, वरिष्ठता की अनदेखी का आरोप
वरिष्ठता और सेवा अनुभव की अनदेखी का आरोप लगाते हुए शिक्षक संघों ने जिला कलेक्टर से आवंटन प्रक्रिया की समीक्षा की मांग की है।
सलूम्बर। पंचायत राज आम चुनाव के तहत मतदान दलों में शिक्षकों की ड्यूटी के आवंटन को लेकर विवाद सामने आया है। शिक्षकों को पदानुरूप मतदान अधिकारी नियुक्त नहीं किए जाने और ड्यूटी निर्धारण में वरिष्ठता एवं सेवा अनुभव की अनदेखी के आरोप लगाते हुए शारीरिक शिक्षक संघ एवं एबीआरएसएम जिला सलूम्बर ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। संगठनों ने ड्यूटी आवंटन में विसंगतियां दूर कर न्यायसंगत व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
ज्ञापन में बताया गया कि जिले में कई शिक्षक एवं शारीरिक शिक्षक लंबे समय से सेवाएं दे रहे हैं। इनमें कुछ शिक्षक अधिवार्षिकी आयु यानी सेवानिवृत्ति के निकट हैं। इसके बावजूद उन्हें मतदान अधिकारी पीओ-3 और पीओ-4 के रूप में नियुक्त किया गया है, जबकि सेवा में उनसे कनिष्ठ कार्मिकों को मतदान अधिकारी पीओ-1 की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
संघ ने इस व्यवस्था पर असंतोष जताते हुए कहा कि ड्यूटी आवंटन में इस तरह के अंतर से समस्त शिक्षक संवर्ग में असमानता और असंतोष की स्थिति उत्पन्न हुई है। संगठनों के अनुसार, चुनाव संबंधी दायित्व सौंपते समय कार्मिकों की वरिष्ठता, सेवा अवधि, सेवानिवृत्ति की निकटता, निर्धारित पात्रता और लागू निर्वाचन संबंधी दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखना आवश्यक है। इसके लिए पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, ताकि ड्यूटी का निर्धारण न्यायसंगत तरीके से हो सके।
शारीरिक शिक्षक संघ ने ज्ञापन में स्पष्ट किया कि सभी शिक्षक निर्वाचन संबंधी दायित्वों के निर्वहन के प्रति प्रतिबद्ध हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए सदैव तत्पर हैं। हालांकि, संगठन ने जोर दिया कि चुनाव ड्यूटी आवंटित करते समय किसी भी संवर्ग के साथ अनुचित असमानता नहीं होनी चाहिए।
संघ ने जिला कलेक्टर से पूरे मामले की समीक्षा कर वरिष्ठता, अनुभव और पात्रता के अनुरूप चुनाव ड्यूटी के पदों का न्यायसंगत निर्धारण करने का आग्रह किया है। साथ ही, मौजूदा आवंटन में आवश्यक संशोधन के आदेश जारी करने की मांग भी की है।
ज्ञापन के अंत में संगठन ने जिला सलूम्बर प्रशासन से मामले में शीघ्र एवं सकारात्मक कार्रवाई की अपेक्षा जताई। संघ का कहना है कि ड्यूटी आवंटन में पारदर्शिता और न्यायसंगत व्यवस्था सुनिश्चित होने से कार्मिकों में व्याप्त असंतोष दूर करने में मदद मिलेगी और निर्वाचन कार्यों में निष्पक्षता एवं पारदर्शिता बनाए रखने का उद्देश्य पूरा हो सकेगा।