सलूंबर नगर परिषद के नए बोर्ड की पहली साधारण सभा की बैठक में उपस्थित पार्षद और अधिकारी।   

सलूम्बर नगर परिषद के नए बोर्ड की पहली साधारण सभा में शहर के विकास से जुड़े मुद्दों के बजाय रावण दहन का स्थान प्रमुख विवाद बन गया। रावण मगरी पर वर्षों से चली आ रही परंपरा को जारी रखने और राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान में आयोजन कराने के सुझाव के बीच पार्षदों में तीखी बहस हुई। मामला मतदान तक पहुंचा, जिसमें विधायक सहित भाजपा के पक्ष में 13 मत और कांग्रेस के पक्ष में 12 मत पड़े। इसके बावजूद रावण दहन का स्थान तय नहीं हो सका। अब भाजपा समर्थक पार्षदों के शनिवार को दिए जाने वाले जवाब पर सबकी नजरें टिकी हैं।

नगर परिषद सभागार में शुक्रवार शाम आयोजित पहली बैठक में क्षेत्रीय विधायक शांता अमृतलाल मीणा, सभापति नरेश जैन, उपसभापति डॉ. लव व्यास, कार्यवाहक आयुक्त और एसडीएम जगदीश चंद्र बामनिया मंचासीन रहे। बैठक से पहले नगर परिषद की ओर से सभी पार्षदों का स्वागत किया गया। इसके बाद रावण दहन के स्थान पर चर्चा शुरू हुई। इस दौरान परंपरा को बनाए रखने, सुरक्षा और आयोजन की व्यवस्थाओं से जुड़े मुद्दे उठे।

सभापति नरेश जैन ने सदन को रावण मगरी की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि वहां गड्ढे खुदे हुए हैं और जलदाय विभाग की ओर से पानी की टंकी का निर्माण किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान में रावण दहन कराना उचित रहेगा। सभापति ने लगातार पार्षदों से एकजुट होकर स्कूल मैदान में आयोजन कराने का आग्रह किया।

वहीं, वार्ड-1 के पार्षद अखिलेश बाहेती ने पूर्ववर्ती कांग्रेस बोर्ड के कार्यकाल पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में रावण मगरी को मोती मगरी जैसा स्वरूप देने का प्रस्ताव लिया गया था, लेकिन अब तक वहां एक ईंट तक नहीं लगी। इस पर सभापति नरेश जैन ने भरोसा दिलाया कि अगली बैठक में सभी पार्षदों की राय लेकर रावण मगरी के विकास का प्रस्ताव लिया जाएगा।

वार्ड-12 की पार्षद प्रियंका तैली ने रावण दहन के स्थान से जुड़ा पुराना इतिहास सामने रखा। उन्होंने बताया कि वर्ष 1962 में सैरींग तालाब के निकट नर्सरी में रावण दहन किया जाता था। आबादी बढ़ने के बाद वर्ष 1995 के बाद रावण मगरी पर आयोजन शुरू हुआ। अब वहां जगह कम पड़ने और आबादी बढ़ने के कारण पिछले बोर्ड ने स्कूल मैदान में रावण दहन कराने का प्रस्ताव लिया था।

इस पर पार्षद अंसार अहमद ने कहा कि जब सहमति बनी थी, तब भी कांग्रेस के कुछ पार्षदों ने रावण मगरी पर ही रावण दहन कराया। उन्होंने कहा कि परंपरा को तोड़ा नहीं जा सकता। इस तरह सदन में विवाद केवल आयोजन के स्थान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वर्षों से चली आ रही परंपरा और मौजूदा व्यवस्थाओं के बीच संतुलन बनाने का मुद्दा भी चर्चा के केंद्र में आ गया।

निमंत्रण कार्ड और टेंडर को लेकर भी उठे सवाल

बैठक में वार्ड-8 के पार्षद कैलाश गांधी ने शपथ ग्रहण समारोह में भाजपा पार्षदों को निमंत्रण कार्ड नहीं देने और रावण दहन का टेंडर बिना जानकारी दिए करने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब शुरुआत में ही उनकी बातों को महत्व नहीं मिला, तो आगे विश्वास कैसे किया जाए? इस पर सभापति नरेश जैन ने जवाब दिया कि शपथ ग्रहण समारोह नगर परिषद का कार्यक्रम था, उनका निजी कार्यक्रम नहीं।

रावण दहन के स्थान को लेकर सहमति बनाने के लिए मतदान कराया गया। इसमें भाजपा के पक्ष में विधायक सहित 13 मत पड़े, जबकि कांग्रेस के पक्ष में 12 मत मिले। कांग्रेस के पार्षद भीमराज अस्वस्थ होने के कारण बैठक में उपस्थित नहीं हो पाए। इसके बावजूद मतदान के बाद भी आयोजन स्थल को लेकर अंतिम सहमति नहीं बन सकी। पार्षद कैलाश गांधी ने कहा कि वह अन्य पार्षदों से चर्चा करने के बाद शनिवार को जवाब देंगे।

राजनीति से ऊपर उठकर विकास करने की अपील

बैठक के समापन पर उपसभापति डॉ. लव व्यास ने आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जनता ने पार्षदों को नगर के विकास के लिए चुना है और सभी को राजनीति से ऊपर उठकर काम करना चाहिए। शपथ ग्रहण समारोह में हुई चूक के संबंध में उन्होंने कहा कि उस समय सभापति ने जिम्मेदारी नहीं संभाली थी, इसलिए संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी होगी।

नगर परिषद के नए बोर्ड की पहली बैठक में रावण दहन का स्थान तय नहीं हो पाने के बाद अब शनिवार को भाजपा समर्थक पार्षदों के जवाब का इंतजार है। इसके बाद ही स्पष्ट होगा कि रावण मगरी पर वर्षों से चली आ रही परंपरा जारी रहेगी या राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान में आयोजन होगा। फिलहाल, 13-12 के मतदान के बावजूद यह मुद्दा अनसुलझा है और सलूम्बर नगर परिषद में रावण दहन को लेकर सियासी खींचतान जारी है।

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