तस्वीर में फूलों की माला पहने नरेश कुमार जैन का सलूम्बर में स्वागत किया जा रहा है।

सलूम्बर। नगर परिषद आम चुनाव 2026 के सभापति चुनाव में सोमवार को बहुमत का गणित मतदान के बाद पूरी तरह बदल गया। भाजपा 12 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी और रविवार देर शाम वार्ड 13 के निर्दलीय पार्षद महेश गर्ग के भाजपा खेमे में आने के बाद उसके पास 13 पार्षद होने का दावा किया गया था। बहुमत का आंकड़ा भी 13 था, लेकिन मतदान में कांग्रेस प्रत्याशी नरेश कुमार जैन को 13 वोट मिले और भाजपा के कैलाश गांधी को 12 मत प्राप्त हुए। एक वोट के अंतर से कांग्रेस ने नगर परिषद की सभापति की कुर्सी अपने नाम कर ली।

नगर परिषद में कुल 25 पार्षद हैं। चुनाव परिणाम के बाद भाजपा के 12, कांग्रेस के 11, बीएपी का 1 और एक निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुआ था। ऐसे में सभापति चुनाव में 13 का आंकड़ा निर्णायक माना जा रहा था। रविवार देर शाम निर्दलीय पार्षद महेश गर्ग के भाजपा खेमे में आने के बाद भाजपा के पास 13 पार्षद होने का दावा किया गया, जिससे बहुमत का आंकड़ा उसके पक्ष में दिखाई दे रहा था।

सोमवार को मतदान के बाद परिणाम सामने आया तो नरेश कुमार जैन को 13 वोट मिले, जबकि कैलाश गांधी 12 मत ही हासिल कर सके। भाजपा के पास जिस 13 के आंकड़े को बहुमत की गारंटी माना जा रहा था, वही आंकड़ा कांग्रेस प्रत्याशी के खाते में पहुंच गया। महज एक वोट के अंतर ने नगर परिषद की सत्ता का पूरा समीकरण बदल दिया।

सलूम्बर की राजनीति में यह पहला मौका नहीं है, जब बहुमत का आंकड़ा होने के बावजूद सत्ता हाथ से निकल गई हो। दिसंबर 2020 में पंचायत समिति प्रधान के चुनाव में भी ऐसा ही राजनीतिक उलटफेर हुआ था। उस समय भाजपा के पास 11 सदस्य थे, जबकि कांग्रेस के पास 10 सदस्य थे। बहुमत भाजपा के पास होने के बावजूद प्रधान के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को 11 मत मिले और कांग्रेस ने भाजपा को पीछे छोड़ते हुए प्रधान की कुर्सी हासिल कर ली थी।

नगर परिषद सभापति चुनाव में एक बार फिर लगभग वही राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। फर्क इतना रहा कि दिसंबर 2020 में 11 का आंकड़ा कांग्रेस के काम आया था और इस बार 13 का आंकड़ा कांग्रेस के खाते में गया। भाजपा के लिए यह परिणाम दिसंबर 2020 के सियासी घटनाक्रम की याद दिलाने वाला रहा, जबकि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसे अपनी राजनीतिक रणनीति की सफलता के रूप में देखा।

सलूम्बर के जिला मुख्यालय बनने के बाद यह पहला नगर परिषद आम चुनाव था। वर्ष 2021 में 30 साल बाद तत्कालीन नगर पालिका में कांग्रेस ने 25 में से 15 पार्षद जिताकर बोर्ड बनाया था और प्रद्युम्न कोड़िया को चेयरमैन बनाया था। इस बार कांग्रेस बहुमत से दूर रही, लेकिन सभापति की कुर्सी फिर कांग्रेस के पास पहुंच गई।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष बनने के बाद परमानन्द मेहता के लिए भी यह पहला नगर परिषद आम चुनाव रहा। बहुमत नहीं होने के बावजूद कांग्रेस का बोर्ड बनना उनके लिए राजनीतिक रूप से अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। सलूम्बर नगर परिषद सभापति चुनाव का परिणाम एक बार फिर बताता है कि पार्षदों की संख्या का गणित मतदान के अंतिम नतीजे तक सत्ता का अंतिम समीकरण तय नहीं करता।

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