मध्य प्रदेश में पार्टी के कार्यक्रमों और गतिविधियों में शामिल होने वाले यूथ कांग्रेस के नेता नजर आ रहे हैं।

मध्य प्रदेश यूथ कांग्रेस में अनुशासनहीनता के नाम पर की गई बड़ी कार्रवाई के बाद पार्टी के भीतर बगावती सुर और नेताओं का दर्द खुलकर सामने आने लगा है। दरअसल, नई दिल्ली में 1 नवंबर को 'वोट चोरी' के खिलाफ आयोजित की गई राहुल गांधी की रैली में शामिल न होने के चलते पार्टी ने मध्य प्रदेश यूथ कांग्रेस के 60 पदाधिकारियों को सस्पेंड कर दिया था। 3 नवंबर को जारी हुए इस निलंबन आदेश के बाद अब सस्पेंड किए गए नेताओं की मजबूरियां और नाराजगी सामने आ रही है। नेताओं का कहना है कि पार्टी ने सीधे निलंबन का फरमान जारी कर दिया और कार्रवाई से पहले उनसे न तो बातचीत की गई और न ही कोई कारण बताओ नोटिस दिया गया।

60 पदाधिकारियों पर गिरी गाज, नेताओं ने उठाये सवाल

यूथ कांग्रेस द्वारा की गई इस सामूहिक कार्रवाई की चपेट में मध्य प्रदेश के 9 जिलों के जिलाध्यक्ष, 5 प्रदेश उपाध्यक्ष, 14 महासचिव और 32 सचिव आए हैं। पार्टी ने इस निलंबन के पीछे अनुशासनहीनता को मुख्य वजह बताया है।

हालांकि, इस अचानक हुई कार्रवाई के बाद नेताओं का कहना है कि संगठन के शीर्ष नेतृत्व को पहले स्पष्टीकरण मांगते हुए 'कारण बताओ नोटिस' जारी करना चाहिए था। यदि किसी का कारण ठोस न होता, तब उस पर कार्रवाई की जाती। लेकिन जिन नेताओं के घरों में वाकई में गंभीर परिस्थितियां या पारिवारिक आयोजन थे, उन्हें बिना सुने सस्पेंड कर देना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है।

पारिवारिक मजबूरियां: किसी के घर शादी, तो किसी के चाचा की थी तेरहवीं

निलंबित नेताओं ने मीडिया के सामने आकर अपनी-अपनी पारिवारिक मजबूरियां साझा की हैं:

• मैहर जिलाध्यक्ष सौरभ शर्मा: उन्होंने बताया कि उनके बड़े भाई को 12 सालों के लंबे इंतजार के बाद बेटा हुआ था और घर में मांगलिक कार्यक्रम चल रहा था। उन्होंने इसकी सूचना पहले ही प्रदेश अध्यक्ष को दे दी थी। सालों से संगठन में सक्रिय रहने के बावजूद बिना पक्ष सुने की गई इस कार्रवाई पर वे अपनी बात सीनियर नेताओं के सामने रखेंगे।

• प्रदेश उपाध्यक्ष शिवराज सिंह यादव: उन्होंने बताया कि उनकी छोटी बहन की शादी थी और वे परिवार में इकलौते भाई हैं। शादी की तमाम जिम्मेदारियों के कारण वे दिल्ली नहीं जा सके। उन्होंने भी अपने वरिष्ठों को इसकी वजह बता दी थी।

• पूर्व महासचिव रोहित राजौरिया: उन्होंने बताया कि 1 नवंबर को ही उनके सगे चाचा की तेरहवीं का कार्यक्रम था। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष को तेरहवीं का कार्ड भी दिया था, लेकिन इसके बावजूद उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई कर दी गई।

बीमारी और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से भी नहीं पहुंच सके कई नेता

कुछ पदाधिकारी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण दिल्ली की रैली में हिस्सा नहीं ले पाए थे:

• अनूपपुर जिलाध्यक्ष मानवेंद्र मिश्रा: तबीयत खराब होने की वजह से वे दिल्ली जाने में असमर्थ रहे। हालांकि उन्होंने संगठन को पूर्व सूचना नहीं दी थी, लेकिन उनकी जिला टीम के बाकी सदस्य रैली में शामिल हुए थे।

• प्रदेश उपाध्यक्ष राजवीर सिंह कुड़िया एवं महासचिव सुमन मौर्य: इन दोनों पदाधिकारियों का कहना है कि अचानक स्वास्थ्य खराब हो जाने की वजह से वे इस महत्वपूर्ण रैली का हिस्सा नहीं बन सके थे।

संगठन का पक्ष: ट्रैक रिकॉर्ड देखकर की गई कार्रवाई

दूसरी तरफ, इस पूरे विवाद और नेताओं की नाराजगी पर मध्य प्रदेश यूथ कांग्रेस के प्रभारी शिवी सिंह चौहान ने संगठन का पक्ष रखा है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह कार्रवाई यूथ कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से विस्तृत बातचीत करने के बाद ही की गई है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्रवाई करते समय पदाधिकारियों के पुराने 'ट्रैक रिकॉर्ड' को भी ध्यान में रखा गया है। इसके साथ ही शिवी सिंह चौहान ने यह दावा भी किया कि जिन नेताओं ने अपनी अनुपस्थिति के बारे में संगठन को समय रहते सूचित कर दिया था, उनके खिलाफ किसी भी तरह का दंडात्मक कदम नहीं उठाया गया है।