बिहार में CM बदलने की अटकलों पर जीतन राम मांझी का बड़ा बयान, बोले- 'नीतीश कुमार को हटाने का सवाल ही नहीं'
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पीछे कई लोग पड़े हैं, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है हम उनके साथ हैं।
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और सम्राट चौधरी को गया में राजनीतिक बयानों के संदर्भ में दिखाया गया है।
बिहार के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों बयानबाजी और उठापटक का दौर लगातार जारी है। इस बीच, दलित आरक्षण के भीतर कोटे के वर्गीकरण को लेकर एनडीए के भीतर चल रही बयानबाजी के बीच केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के संरक्षक जीतन राम मांझी का एक बड़ा और अहम बयान सामने आया है। गयाजी में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने राज्य के राजनीतिक घटनाक्रम पर खुलकर अपनी राय रखी और स्पष्ट शब्दों में कहा कि कुछ राजनीतिक तत्व मौजूदा व्यवस्था को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं।
हाल ही में दलित आरक्षण में उप-वर्गीकरण लागू करने के मुद्दे को लेकर एनडीए के दो प्रमुख दलित नेताओं—बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार सुमन और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान—के बीच बयानों का सिलसिला देखा गया था। इसी संदर्भ में जब मीडिया ने केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी से यह सवाल पूछा कि क्या राज्य में मुख्यमंत्री या नेतृत्व स्तर पर बदलाव की कोई चर्चा चल रही है, तो मांझी ने इस तरह की अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने दो टूक अंदाज में सवाल किया कि ऐसी बेबुनियाद बातें आखिर कहां से और कौन गढ़ रहा है।
जीतन राम मांझी ने मुख्यमंत्री पद और नेतृत्व की स्थिरता का समर्थन करते हुए कहा कि नेतृत्व को हटाने का सवाल ही पैदा नहीं होता, क्योंकि वे पूरी विधिवत और सुचारू रूप से अपना काम कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री को लेकर किसी भी प्रकार की चिंता या आशंका की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि उन्हें राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों का मजबूत आशीर्वाद प्राप्त है। इसके साथ ही वे एनडीए के सर्वसम्मति से चुने गए नेता हैं और प्रशासनिक मोर्चे पर बेहद अच्छा कार्य कर रहे हैं।
गयाजी में पत्रकारों से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने गंभीर आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर मुख्यमंत्री के पीछे पड़े हुए हैं और उन्हें लगातार परेशान करने की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि ऐसे लोग राज्य के भीतर भ्रम और गलतफहमी फैलाना चाहते हैं ताकि बिहार की राजनीति में अनावश्यक अस्थिरता का माहौल पैदा किया जा सके। मांझी ने साफ किया कि जो लोग इस तरह की बातें फैला रहे हैं, वे वस्तुतः राज्य के विकास और शांति के विरोधी हैं। उन्होंने भरोसा दिलाते हुए कहा कि यदि विरोधियों के पास अपने समर्थक हैं, तो उनके समर्थन में भी मजबूत ताकत चट्टान की तरह खड़ी है और हम सब मिलकर उनका पूरा साथ देंगे।
इसके अलावा, आरक्षण के मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए जीतन राम मांझी ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में जो बहस छिड़ी हुई है, वह अचानक या स्वतः उत्पन्न नहीं हुई है। उन्होंने वर्ष 2024 के सर्वोच्च न्यायालय के उस ऐतिहासिक निर्णय और सुझाव का हवाला दिया, जिसके तहत राज्यों को यह अधिकार दिया गया है कि वे आवश्यकतानुसार अनुसूचित जाति (एससी) कोटे के भीतर उप-कोटा यानी वर्गीकरण कर सकते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि पंजाब, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में इस दिशा में पहल की जा चुकी है।
मांझी ने तर्क देते हुए कहा कि इस उप-वर्गीकरण के लागू होने से उन वंचित तबकों को वास्तविक लाभ मिल सकेगा जो पिछले 80 वर्षों से आरक्षण के मूल लाभ से दूर रहे हैं। उन्होंने चिंता जताई कि अभी तक आरक्षण का अधिकांश लाभ कुछ चुनिंदा वर्ग के लोगों को ही मिल रहा है और उच्च पदों पर लगभग 90 प्रतिशत हिस्सेदारी उन्हीं की है, जबकि आर्थिक और शैक्षणिक रूप से अत्यंत पिछड़े निचले पायदान के लोग आज भी मात्र 10 प्रतिशत दायरे में सिमटने को विवश हैं।