कांग्रेस ने वोट बचाओ देश बचाओ अभियान के लिए 208 पर्यवेक्षक नियुक्त किए
पार्टी ने राष्ट्रव्यापी अभियान को गति देने और जमीनी स्तर पर गतिविधियों की निगरानी के लिए विभिन्न राज्यों व जिलों में कुल 208 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है।
तस्वीर में दिख रहे कांग्रेस पार्टी के झंडे, नई दिल्ली में राष्ट्रव्यापी अभियान के संचालन हेतु संगठन को मजबूत करने के लिए प्रदर्शित किए गए हैं।
कांग्रेस ने अपने राष्ट्रव्यापी ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान को गति देने के लिए संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने अभियान के सुचारू संचालन और विभिन्न राज्यों व जिलों में जमीनी स्तर पर गतिविधियों की निगरानी के लिए कुल 208 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। इस अभियान के तहत छत्तीसगढ़ के 8 प्रमुख और वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कांग्रेस आलाकमान का लक्ष्य इस अभियान के जरिए संगठन को मजबूत करना और आगामी रणनीतियों को धार देना है। इसके लिए केंद्रीय नेतृत्व ने अनुभवी नेताओं को अलग-अलग क्षेत्रों में अभियान के संचालन की जिम्मेदारी दी है। अभियान देश के विभिन्न राज्यों और जिलों में चलाया जाएगा, जहां नियुक्त पर्यवेक्षक स्थानीय स्तर पर इसकी गतिविधियों को आगे बढ़ाएंगे।
केंद्रीय नेतृत्व की ओर से जारी सूची में छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्रियों और वरिष्ठ संगठनात्मक पदाधिकारियों को शामिल किया गया है। जिम्मेदारी पाने वाले नेताओं में डॉ. शिव डहरिया, जयसिंह अग्रवाल, विकास उपाध्याय, मोहन मरकाम, डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, अमरजीत भगत और फूलोदेवी नेताम के नाम शामिल हैं। पार्टी को उम्मीद है कि इन नेताओं का संगठनात्मक अनुभव अभियान को गति देने और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
अभियान के तहत नियुक्त सभी 208 पर्यवेक्षक संबंधित जिलों में इसकी गतिविधियों के संचालन और उनकी करीबी निगरानी की व्यवस्था संभालेंगे। ये पर्यवेक्षक अपने-अपने निर्धारित क्षेत्रों में पहुंचकर कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय स्थापित करेंगे, बैठकें आयोजित करेंगे और अभियान के उद्देश्यों को जनता तक पहुंचाने का काम करेंगे।
कांग्रेस का मानना है कि पर्यवेक्षकों की नियुक्ति से अभियान को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से संचालित करने में मदद मिलेगी। विभिन्न जिलों में संगठनात्मक गतिविधियों की निगरानी, कार्यकर्ताओं के साथ सीधा संपर्क और अभियान के उद्देश्यों के प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी के बीच छत्तीसगढ़ के नेताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।