शहीद सुल्तान काठात की शहादत को नमन, पुत्र आमिर ने भी चुनी देशसेवा की राह
शहीद सुल्तान काठात के शहादत दिवस पर सेंदड़ा में श्रद्धांजलि, परिवार का सम्मान और देशसेवा में जुटे पुत्र आमिर की गाथा सामने आई।
तस्वीर में सीआरपीएफ वर्दीधारी जवान, ग्रामीण और विद्यालय के विद्यार्थी कार्यक्रम स्थल पर दिखाई दे रहे हैं, जहां सम्मान और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया।
ग्राम पंचायत सेंदड़ा के झाडली मानपुरा स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय परिसर में शनिवार को अमर शहीद सिपाही सुल्तान काठात का शहादत दिवस श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में क्षेत्रवासियों, विद्यालय परिवार और शहीद के परिजनों ने शहीद की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
इस अवसर पर सीआरपीएफ अजमेर कैंप के सब इंस्पेक्टर भैरू सिंह सोलंकी ने शहीद की वीरांगना रुकमणी देवी को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। शहीद परिवारजनों का भी सम्मान किया गया। शहीद माता दाखू देवी, शहीद वीरांगना रुकमणी देवी तथा शहीद पुत्र आमिर काठात को सीआरपीएफ अजमेर एवं ग्राम पंचायत सेंदड़ा के प्रशासक रतन सिंह भाटी की ओर से स्मृति चिन्ह, माला, साफा एवं शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
ग्राम पंचायत सेंदड़ा के प्रशासक रतन सिंह भाटी ने कहा कि शहीदों को भगवान की तरह पूजना चाहिए। उनके त्याग और बलिदान का जितना मान-सम्मान किया जाए, उतना कम है। आज हम सभी देश में सुरक्षित और सुकून से जीवन जी रहे हैं तो इसमें हमारे वीर सैनिकों का सबसे बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि मगरे की धरती हमेशा से वीर शूरवीरों की धरती रही है। शहीदों की स्मृति को जीवंत रखने के लिए उनके शहादत दिवस पर मेले एवं विभिन्न आयोजन करवाए जाने चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके बलिदान से प्रेरणा ले सकें।
सीआरपीएफ अजमेर कैंप के सब इंस्पेक्टर भैरू सिंह सोलंकी ने शहीद सुल्तान काठात के साहस, वीरता और बलिदान की गाथा सुनाई। उन्होंने बताया कि शहीद सुल्तान काठात ने आतंकवादियों से मुकाबला करते हुए मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उनकी वीरगाथा सुनकर उपस्थित लोगों में देशभक्ति का जज्बा दिखाई दिया। अन्य वक्ताओं ने भी शहीद सुल्तान काठात के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनकी वीरता, साहस और राष्ट्र के प्रति समर्पण देश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।
कार्यक्रम में शहीद परिवारजनों और विद्यालय के समस्त छात्र-छात्राओं को पाठ्य सामग्री का वितरण किया गया। छात्रा माही ने ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ तथा देशभक्ति गीत प्रस्तुत किया। इस मौके पर प्रधानाध्यापक बाबू लाल प्रजापत, विद्यालय विकास समिति अध्यक्ष अनवर काठात, दिलीप सिंह रामगढ़, देवी काठात, सुरेश सिंह, राजू सिंह कुरातिया, रविदत्त गौड, सिकंदर काठात, देवेंद्र सिंह, दिलीप सिंह, मदन सिंह चौहान, देवी सिंह सहित ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में रतन सिंह भाटी ने बताया कि 8 अगस्त 1991 को आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद सुल्तान काठात वीरगति को प्राप्त हुए। इसके अगले ही दिन 9 अगस्त 1991 को उनके इकलौते पुत्र आमिर काठात का जन्म हुआ। शहीद की वीरांगना माता रुकमणी देवी ने अपने पुत्र को भी देश सेवा के लिए सेना में भेजा।
आमिर काठात ने सीआरपीएफ में रहते हुए कोबरा कमांडो का प्रशिक्षण प्राप्त किया तथा उग्रवाद एवं नक्सलवाद के खिलाफ विभिन्न अभियानों में भाग लिया। वर्तमान में वे एएसआई के पद पर सीआरपीएफ में तैनात हैं। रतन सिंह भाटी ने कहा कि शहीद के पुत्र का भी देश सेवा के लिए समर्पित होना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है।
शहीद सिपाही सुल्तान काठात की शहादत 08 अगस्त 1991 को हुई थी। उनका जन्म 23 सितंबर 1968 को हुआ था। वे केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 75वीं बटालियन में तैनात थे। उनका बल संख्या 880890467 था।
1990 के दशक के प्रारंभिक वर्षों में पंजाब में आतंकवाद चरम पर था। इसी दौरान केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 75वीं बटालियन आतंकवाद विरोधी अभियान में तैनात थी। बटालियन की एक कंपनी राधा स्वामी डेरा, तरनतारन में कानून-व्यवस्था ड्यूटी पर तैनात थी।
8 अगस्त 1991 को लगभग 12:30 बजे रात यूनिट की दो गाड़ियां जंडियाला रोड पर माता गंगा कॉलेज के पास पेट्रोलिंग ड्यूटी पर थीं। निर्माण कार्य के कारण सड़क संकरी एवं ऊबड़-खाबड़ थी। पहली जीप सुरक्षित रूप से वहां से निकल गई। दूसरी जीप को भी चालक ने सुरक्षित समझकर उसी रास्ते से निकालने का प्रयास किया, लेकिन आतंकवादियों ने वहां एंटी-टैंक प्रेशर माइन लगा रखी थी।
माइन के विस्फोट में सीआरपीएफ के छह बहादुर जवानों ने राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया। अमर शहीद सुल्तान काठात की शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम में उनके बलिदान को याद किया गया और उनकी वीरगाथा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया गया। शहीद सुल्तान काठात का बलिदान राष्ट्र और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।