तस्वीर में रायपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के सभागार में बैठक के दौरान पुस्तिकाएं थामे अधिकारी, वैज्ञानिक और कृषक नजर आ रहे हैं।

रायपुर, 1 अक्टूबर। कृषि विज्ञान केंद्र, रायपुर में गुरुवार को 5वीं वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर के प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. सेवा राम कुमावत ने की। इसमें कृषि विज्ञान केंद्र की वार्षिक प्रगति, किसानों के हित में किए गए कार्यों और आगामी वर्ष की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक की शुरुआत कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. महेंद्र सिंह चांदावत की ओर से केंद्र की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के साथ हुई। उन्होंने किसानों के लिए आयोजित प्रशिक्षण, प्रदर्शन, जागरूकता कार्यक्रमों और कृषि प्रसार गतिविधियों की जानकारी दी।

इसके बाद केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. निधि, डॉ. कल्पना चौधरी और श्री नितेश शर्मा ने केंद्र की विभिन्न गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने वर्ष 2027 की प्रस्तावित कार्ययोजना भी रखी। इसमें क्षेत्र के किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रसार, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास, उन्नत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने और महिला कृषकों की सहभागिता बढ़ाने से संबंधित गतिविधियां शामिल की गई हैं।

बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की। इनमें सहायक निदेशक कृषि विभाग श्री मुकेश माली, कृषि अधिकारी (बागवानी) श्री शिवराज चौहान, जल ग्रहण विभाग के अधिशासी अभियंता श्री कपिल भार्गव, सहायक अभियंता श्री महेंद्र कुमार, जैतारण कृषक उत्पादक संगठन के श्री हेमेन्द्र सिंह तथा महिला एवं बाल कल्याण विभाग की श्रीमती आशा उपस्थित रहीं।

क्षेत्र के प्रगतिशील कृषकों और महिला कृषकों ने भी बैठक में भाग लिया। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र की गतिविधियों को लेकर अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। वैज्ञानिक सलाहकार समिति के सदस्यों और उपस्थित अतिथियों ने किसानों की स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आगामी कार्ययोजना में उपयोगी सुझावों को शामिल करने पर जोर दिया।

अध्यक्ष डॉ. सेवा राम कुमावत ने कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने वैज्ञानिकों से कृषि की नवीनतम तकनीकों को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने और क्षेत्र की कृषि संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने का आह्वान किया।

बैठक में वैज्ञानिकों, विभागीय अधिकारियों और कृषकों के बीच आपसी समन्वय मजबूत करने तथा किसानों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया गया। आगामी वर्ष की कार्ययोजना में किसानों की स्थानीय आवश्यकताओं और महिला कृषकों की सहभागिता को शामिल किए जाने को बैठक का प्रमुख केंद्र रखा गया।

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