ब्यावर के बैडकलॉ में महिला दुग्ध समिति पुन: शुरू, 80 महिलाएं जुड़ीं
ममता की पहल और पाली सरस डेयरी के सहयोग से 20 साल बाद बंद पड़ी समिति खुली, रोजाना 400 लीटर दूध संकलन से महिलाओं को मिल रही नियमित आय।
तस्वीर में बैडकलॉ के सरस दुग्ध केंद्र पर महिलाएं बैठक करती नजर आ रही हैं।
ब्यावर जिले के बैडकलॉ गांव में करीब 20 वर्षों से बंद पड़ी सरस दुग्ध समिति के दोबारा संचालन ने ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण का रास्ता खोल दिया है। 19 अक्टूबर 2024 को पुनः शुरू हुई बैडकलॉ महिला दुग्ध समिति से करीब 80 महिला सदस्य जुड़ी हैं और प्रतिदिन लगभग 400 लीटर दूध का संकलन हो रहा है।
इस बदलाव की शुरुआत ममता की पहल से हुई। साधारण गृहिणी के रूप में परिवार का भरण-पोषण करना उनके लिए आसान नहीं था। इसी दौरान पाली सरस डेयरी की अधिकारी विजयलक्ष्मी गांव पहुंचीं। उन्होंने ममता से संपर्क कर लंबे समय से बंद पड़ी समिति को फिर से शुरू करने के लिए प्रेरित किया।
ममता ने गांव की महिलाओं को एकत्र किया और विजयलक्ष्मी के सहयोग से बैठक आयोजित की। महिलाओं ने समिति शुरू करने पर सहमति जताई और ममता को सचिव की जिम्मेदारी सौंपी। इसके बाद अस्थाई महिला प्रबंधकारिणी का गठन कर समिति का संचालन शुरू किया गया।
समिति के संचालन के साथ दुग्ध संकलन व्यवस्था को तकनीक से जोड़ा गया। समिति पर ऑटोमेटिक मिल्क कलेक्शन यूनिट (AMCU) स्थापित की गई। इसके माध्यम से दूध की फैट और एसएनएफ की जांच तत्काल होती है। कंप्यूटर से मिलने वाली पर्ची में फैट, एसएनएफ और देय राशि का विवरण दर्ज रहता है। इससे दुग्ध उत्पादकों को दूध की गुणवत्ता और भुगतान की स्पष्ट जानकारी मिलती है।
समिति की गतिविधियां बढ़ने के बाद बल्क मिल्क कूलर (BMC) भी लगाया गया। इसमें दूध को ठंडा रखकर उसकी गुणवत्ता सुरक्षित रखी जाती है। इसके बाद दूध टैंकर के माध्यम से पाली डेयरी भेजा जाता है।
दुग्ध उत्पादकों को प्रत्येक दस दिन में भुगतान किया जाता है। मुख्यमंत्री दुग्ध सम्बल योजना के तहत पात्र महिला दुग्ध उत्पादकों के बैंक खातों में राज्य सरकार की ओर से 5 रुपये प्रति लीटर की सहायता राशि जमा की जाती है। नियमित भुगतान और योजना से मिलने वाली सहायता ने महिलाओं की आय को आर्थिक सम्बल दिया है।
समिति की ओर से पशुपालकों को सरस पशुआहार उपलब्ध कराया जाता है। पशुओं का समय-समय पर टीकाकरण भी किया जाता है। गांव में सरस दुग्ध बूथ संचालित होने से ग्रामीणों को जरूरत के समय दूध उपलब्ध हो रहा है। दैनिक उपयोग और सामाजिक आयोजनों के लिए सरस घी भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
ममता के लिए समिति का पुनः संचालन आर्थिक बदलाव का माध्यम बना है। समिति शुरू होने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और परिवार का भरण-पोषण बेहतर ढंग से होने लगा। साथ ही गांव की अन्य महिलाओं को भी नियमित आय से जुड़ने का अवसर मिला।
आज बैडकलॉ महिला दुग्ध समिति में 80 महिलाओं की भागीदारी, करीब 400 लीटर प्रतिदिन दूध का संकलन और आधुनिक दुग्ध जांच एवं शीतलकरण की सुविधा इसके बदलते स्वरूप को दर्शाती है। भविष्य में समिति और पाली संघ के सहयोग से समिति भवन का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है।
बैडकलॉ की यह पहल वर्षों से बंद पड़ी समिति को फिर से सक्रिय करने के साथ ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक सम्बल, नियमित आय और आत्मनिर्भरता से जोड़ रही है। ममता की पहल से शुरू हुआ यह प्रयास अब सामूहिक भागीदारी का रूप ले चुका है। दूध की हर बूंद के साथ बैडकलॉ की महिलाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है।