सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि का छलका दर्द, बोलीं- 'बीजेपी और कांग्रेस में सिर्फ झंडे का फर्क'|

सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर दोनों प्रमुख दलों पर निशाना साधा और राजनीतिक संस्कृति बदलने की मांग की।

Update: 2026-07-28 04:00 GMT

सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी और अस्पताल में सोनम वांगचुक राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के संदर्भ में।

दिल्ली में नीट-यूजी परीक्षा के पेपर लीक के विरोध में 26 दिनों तक ऐतिहासिक भूख हड़ताल करने वाले पर्यावरणविद् और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक के लद्दाख लौटने के बाद उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो का दर्द खुलकर सामने आया है। मेदांता अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद और राजघाट पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को नमन करने के बीच, गीतांजलि आंग्मो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक विस्तृत पोस्ट साझा किया है। इस पोस्ट के जरिए उन्होंने देश की मुख्यधारा की दोनों प्रमुख राजनीतिक पार्टियों, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है और राजनीतिक संस्कृति को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

गीतांजलि ने अपने पोस्ट में लिखा है कि जब उनके पति सोनम वांगचुक को हिरासत में लिया गया था, तब भाजपा के आईटी सेल और समर्थकों ने उन्हें देश-विरोधी, चीनी एजेंट और विदेशी फंडिंग पाने वाला व्यक्ति करार दिया था। इसके विपरीत, जब उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को दिखावटी करार दिया, तो कांग्रेस समर्थकों ने उन्हें संघी और आरएसएस-भाजपा का पिट्ठू बताना शुरू कर दिया। गीतांजलि ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दोनों पार्टियों में वैचारिक रूप से कोई बुनियादी अंतर नहीं है, केवल उनके झंडे अलग-अलग हैं, लेकिन राजनीति करने और विरोधियों को घेरने के तौर-तरीके पूरी तरह से समान हैं।

उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए लिखा कि यह संकीर्ण मानसिकता हमारी पूरी राजनीतिक संस्कृति में गहरी जड़ें जमा चुकी है। देश को केवल सरकार बदलने की नहीं, बल्कि अपनी पूरी राजनीतिक कार्यशैली को बदलने की आवश्यकता है। एक ऐसी राजनीतिक संस्कृति की जरूरत है जहां विचारों की असहमति पर सम्मानजनक बातचीत हो, न कि व्यक्तिगत लांछन या बुरा-भला कहा जाए। देशभक्ति का पैमाना किसी पार्टी विशेष से जुड़ाव या निष्ठा न होकर पूरी तरह से ईमानदारी होना चाहिए, और गुटों या दलों के प्रति वफादारी से ऊपर हमेशा सच को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

गौरतलब है कि सोनम वांगचुक ने हाल ही में शिक्षा सुधारों और युवाओं के आंदोलन के समर्थन में दिल्ली में 28 जून 2026 से 24 जुलाई 2026 तक लगातार 26 दिनों तक ऐतिहासिक भूख हड़ताल की थी। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के आश्वासन और सरकार से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने के बाद उन्होंने 24 जुलाई की मध्य रात्रि के बाद अपना यह अनशन समाप्त किया था। इसके बाद स्वास्थ्य कारणों से उन्हें मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां से सोमवार सुबह उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। मार्च 2024 में भी उन्होंने लद्दाख के लिए छठी अनुसूची की मांग को लेकर लेह में 21 दिनों का उपवास रखा था। बहरहाल, पत्नी गीतांजलि आंग्मो के इस ताजा बयान ने देश के राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है, जो असहमति और राजनीतिक सहनशीलता के बड़े मुद्दों को उजागर करती है।

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