रोहतांग दर्रे की कठिन वादियों में अनोखी सफलता: ऑफ-सीजन में भी 15 हजार की बिक्री, लेकिन क्या आप जानते हैं इसके पीछे का संघर्ष?
रोहतांग दर्रे पर एक विक्रेता ऑफ सीजन में भी रोजाना हजारों रुपये की कमाई करता है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।
रोहतांग दर्रे की बर्फीली वादियों में सड़क किनारे स्टॉल लगाकर मैगी और चाय बेचता हुआ वेंडर।
पहाड़ों की हसीन वादियों और बर्फीली यात्रा के दौरान गरमागरम चाय, कॉफी और मैगी का लुत्फ उठाना हर सैलानी को पसंद होता है। हिमाचल प्रदेश के लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शुमार रोहतांग दर्रे (Rohtang Pass) से जुड़ा एक दिलचस्प मामला इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। रोहतांग में सड़क किनारे छोटी सी दुकान या स्टॉल लगाने वाला एक वेंडर इन दिनों अपनी कमाई को लेकर सुर्खियों में है। एक कंटेंट क्रिएटर द्वारा साझा किए गए वीडियो के बाद सामने आए आंकड़ों ने हर किसी को हैरान कर दिया है।
ऑफ-सीजन में भी होती है हजारों की बिक्री
मतौर पर पहाड़ी इलाकों में ऑफ-सीजन के दौरान पर्यटकों की आवाजाही काफी कम हो जाती है, जिससे वहां के स्थानीय कारोबारियों की आमदनी पर भी असर पड़ता है। लेकिन रोहतांग दर्रे पर दुकान चलाने वाले इस विक्रेता की कहानी थोड़ी अलग है। जब एक कंटेंट क्रिएटर ने रोहतांग दर्रे की यात्रा के दौरान उस विक्रेता से बातचीत की और कम भीड़-भाड़ वाले इन महीनों के कारोबार के बारे में पूछा, तो उसने चौंकाने वाले खुलासे किए।
विक्रेता ने बातचीत में बताया कि ऑफ-सीजन होने के बावजूद वह रोजाना करीब 60 से 70 प्लेट मैगी बेच लेता है, जहां मैगी की एक प्लेट की कीमत 100 रुपये है। इसके अलावा, कड़ाके की ठंड के बीच वह 40 रुपये प्रति कप के हिसाब से रोजाना लगभग 200 कप चाय भी बेचता है। चाय और मैगी के अलावा उसने यह भी बताया कि वह ग्राहकों को अंडे भी बेचता है।
रोजाना 14 से 15 हजार रुपये तक का कारोबार
अगर इन आंकड़ों का गणित लगाया जाए, तो सिर्फ मैगी की बिक्री से ही उसकी रोज की कमाई 6,000 से 7,000 रुपये तक हो जाती है। वहीं, चाय की बिक्री से उसकी रोजाना की आमदनी में करीब 8,000 रुपये और जुड़ जाते हैं। इस तरह, तमाम कठिनाइयों के बावजूद वह ऑफ-सीजन में भी रोजाना लगभग 14,000 से 15,000 रुपये तक की कुल बिक्री (टर्नओवर) कर लेता है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस और लोगों की प्रतिक्रियाएं
हालांकि, यह आंकड़े इस विक्रेता की कुल बिक्री या टर्नओवर को दर्शाते हैं, न कि उसका शुद्ध मुनाफा (नेट प्रॉफिट)। इस कमाई में कच्चा माल, सामग्री, ऊपर तक सामान का परिवहन (ट्रांसपोर्टेशन) और अन्य परिचालन खर्च (ऑपरेटिंग कॉस्ट) शामिल नहीं हैं। जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, इस पर यूजर्स की तरफ से तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गईं।
कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इस कमाई के आंकड़ों को देखने के बाद पहाड़ों पर जीवन गुजारने वाले इन मेहनतकश लोगों के संघर्षों की ओर भी ध्यान खींचा। एक यूजर ने टिप्पणी करते हुए लिखा कि हमें सिर्फ कमाई नहीं बल्कि उन कठिनाइयों और त्याग को भी देखना चाहिए जिनका सामना ये लोग रोजाना करते हैं। वहीं अन्य यूजर्स ने बताया कि इतनी ऊंचाई पर व्यवसाय चलाना बिल्कुल आसान नहीं है, क्योंकि यहां सामान का परिवहन बेहद महंगा पड़ता है और मौसम की चरम स्थितियां इन मेहनतकशों के जीवन को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना देती हैं।