मुंबई लोकल में भक्ति का अनोखा रंग! 21वीं सालगिरह पर सजा 56 भोग, यात्रियों ने भी लिया आस्था का आनंद|
भायंदर से दादर जाने वाली लोकल ट्रेन में ओमकार भजन मंडली ने 21 साल पूरे होने पर देवी मां को 56 भोग अर्पित किया और जश्न मनाया।
मुंबई लोकल ट्रेन में भायंदर से दादर मार्ग पर ओमकार भजन मंडली चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा अपने 21 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देवी मां को 56 भोग अर्पित किया गया।
मुंबई की लाइफ लाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन में भागदौड़ और भीड़भाड़ के बीच भक्ति, श्रद्धा और इंसानियत की एक बेहद अनोखी और खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली है। भायंदर से दादर जाने वाली सुबह 10:20 बजे की लोकल ट्रेन में उस वक्त एक अलग ही माहौल नजर आया, जब 'ओमकार भजन मंडली चैरिटेबल ट्रस्ट' ने अपने 21 साल पूरे होने का जश्न बहुत ही अनूठे अंदाज में मनाया। सफर के दौरान रोजाना की तरह सजने वाली देवी मां की तस्वीर के सामने इस खास मौके पर भव्य 56 भोग लगाया गया, जिसने सफर कर रहे अन्य यात्रियों का भी ध्यान आकर्षित किया।
मुंबई की लोकल ट्रेनें आमतौर पर लोगों के लिए ऑफिस समय पर पहुंचने का साधन, थकान भरा सफर या फिर भारी भीड़ और धक्कामुक्की का दूसरा नाम होती हैं। लेकिन इसी व्यस्त जिंदगी के बीच कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपनी सकारात्मकता से इस माहौल को पूरी तरह बदल देते हैं। भायंदर से दादर की सुबह 10:20 की लोकल ट्रेन भी ऐसी ही एक प्रेरणादायक पहल की गवाह बनी। इस लोकल ट्रेन में नियमित रूप से सफर करने वाली ओमकार भजन मंडली के सदस्यों ने अपनी स्थापना के 21 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाने का फैसला किया, जिसके तहत चलती ट्रेन में ही देवी मां को 56 भोग अर्पित किया गया।
इस उत्सव को सफल बनाने के लिए मंडली के प्रत्येक सदस्य ने पूरी तल्लीनता दिखाई। सभी सदस्य अपने घरों से कुछ न कुछ पकवान या प्रसाद तैयार करके लेकर पहुंचे थे। चलती हुई लोकल ट्रेन के डिब्बे के भीतर ही पूरी श्रद्धा के साथ देवी मां को यह भोग लगाया गया। भोग अर्पण के बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना और आरती संपन्न हुई। इस दौरान आधुनिकता और परंपरा का अनूठा संगम भी देखने को मिला, जहां सदस्यों ने केक काटकर अपनी खुशियों को एक-दूसरे के साथ साझा किया। ट्रेन के भीतर मौजूद अन्य सहयात्रियों ने भी इस भक्तिमय और आनंदित माहौल को बेहद करीब से महसूस किया और इस उत्सव का हिस्सा बने।
मिली जानकारी के अनुसार, इस विशेष भजन मंडली की शुरुआत 6 अगस्त 2006 को हुई थी। तभी से इस मंडली से जुड़े कुछ सदस्य पश्चिमी रेलवे की भायंदर से सुबह 10:20 पर छूटने वाली लोकल ट्रेन में नियमित रूप से सफर करते आ रहे हैं। अपनी रोजाना की यात्रा के दौरान ये लोग ट्रेन के डिब्बे के अंदर ही भजन-कीर्तन और आरती करते हैं। कुछ ही पलों के लिए यह साधारण डिब्बा यात्रियों की भारी भीड़ के बीच एक शांत और पवित्र भक्ति स्थल में तब्दील हो जाता है।
इस भजन मंडली का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान करना तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा काफी व्यापक है। आरती और पूजा के दौरान स्वेच्छा से मिलने वाले पैसों का उपयोग जरूरतमंदों की सहायता और विभिन्न सामाजिक कार्यों को पूरा करने के लिए किया जाता है। इस प्रकार लोकल ट्रेन के भीतर शुरू हुई यह आध्यात्मिक पहल आगे चलकर समाज सेवा का एक मजबूत माध्यम बन जाती है।
मंडली के मुखिया कमलेश पटेल का कहना है कि पिछले 21 वर्षों के लंबे सफर में यह समूह अब केवल एक साधारण भजन मंडली तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक सुदृढ़ परिवार का रूप ले चुका है। अलग-अलग पृष्ठभूमि और स्थानों से आने वाले लोग रोज एक साथ ट्रेन में सफर करते हैं, मिलकर भजन-पूजन करते हैं और हर परिस्थिति में एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी बनकर खड़े रहते हैं।