सिक्किम के पहाड़ी क्षेत्र और बस्तियां उस हिमालयी राज्य की भौगोलिक पहचान को दर्शाती हैं, जो 1975 में भारत का हिस्सा बना।

भारत को 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों की गुलामी से आजादी मिल गई थी, और देश का संविधान लागू होने के बाद तमाम रियासतें व प्रांत भारतीय संघ का हिस्सा बनते चले गए। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत का एक ऐसा भी राज्य है जो देश की आजादी के पूरे 28 साल बाद भारतीय गणराज्य का हिस्सा बना था? इस अनोखे राज्य का नाम सिक्किम है, जिसका इतिहास भारत के बाकी राज्यों से काफी अलग, दिलचस्प और अनूठा रहा है। संविधान के 36वें संशोधन के बाद सिक्किम भारत का 22वां राज्य बना था, जिसके कारण प्रतियोगी परीक्षाओं और सामान्य ज्ञान (GK) के लिहाज से भी इसका इतिहास बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

सिक्किम का राजनीतिक सफर राजशाही, लोकतांत्रिक आंदोलनों और एक स्वतंत्र हिमालयी राज्य से भारतीय संघ में विलय की कई रोमांचक घटनाओं से जुड़ा हुआ है। आधिकारिक आंकड़ों और इतिहास के अनुसार, साल 1947 में जब पूरा देश स्वतंत्रता का जश्न मना रहा था, तब सिक्किम भारत का हिस्सा नहीं बना था। आजादी के बाद के लगभग तीन दशकों तक यह क्षेत्र 'चोग्याल' राजशाही के शासन के अधीन एक अलग हिमालयी रियासत के रूप में अस्तित्व में रहा था। इसके बाद 16 मई 1975 को एक ऐतिहासिक जनमत संग्रह और भारतीय संविधान के 36वें संशोधन के पश्चात ही सिक्किम आधिकारिक रूप से भारत का 22वां राज्य घोषित किया गया।

अगर सिक्किम के शुरुआती इतिहास पर नजर डालें, तो इसका लिखित इतिहास सन 1642 से शुरू होता है। उस समय युक्सोम नामक स्थान पर फुंटसोग नामग्याल को सिक्किम का पहला चोग्याल यानी राजा बनाया गया था। इसी घटना के साथ नामग्याल राजवंश की नींव पड़ी, जिसने इस खूबसूरत हिमालयी क्षेत्र पर तीन सदियों से भी अधिक समय तक शासन किया। समय के बीतने के साथ-साथ इस राज्य में लेपचा, भूटिया और बाद में नेपाली समुदायों का प्रभाव बढ़ा, जिससे यहां एक बेहद समृद्ध और मिली-जुली सांस्कृतिक पहचान का निर्माण हुआ। आज भी सिक्किम की पारंपरिक जीवनशैली, प्राचीन मठ और भव्य त्योहार इसी अनोखे सांस्कृतिक मेल का अहसास कराते हैं।

इतिहास के अलग-अलग दौर में सिक्किम को पड़ोसी देशों जैसे नेपाल और भूटान के साथ संघर्षों का सामना भी करना पड़ा था। इसके अलावा, जैसे-जैसे हिमालयी क्षेत्र में ब्रिटिश साम्राज्य का प्रभाव फैलने लगा, सिक्किम के शासकों ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ कई महत्वपूर्ण समझौते किए। इन संधियों के परिणामस्वरूप यह क्षेत्र अंग्रेजों के संरक्षण वाला एक संरक्षित राज्य बन गया। इस व्यवस्था के तहत आंतरिक शासन तो स्थानीय राजाओं के हाथ में रहा, लेकिन राज्य के बाहरी और विदेशी मामलों पर पूरी तरह से ब्रिटेन का नियंत्रण स्थापित हो गया, और यह स्थिति भारत की आजादी तक लगातार बनी रही।

बाकी रियासतों से बिल्कुल उलट स्थिति होने के कारण 1947 में सिक्किम तुरंत भारत में शामिल नहीं हुआ था। वर्ष 1950 में भारत और सिक्किम के बीच एक विशेष संधि संपन्न हुई, जिसके तहत सिक्किम को भारत का 'प्रोटेक्टरेट' यानी संरक्षित राज्य का दर्जा दिया गया। इस समझौते की शर्तों के अनुसार भारत सरकार ने सिक्किम की रक्षा, विदेश मामलों और संचार व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली, जबकि राज्य के भीतर का प्रशासनिक अधिकार चोग्याल राजा के पास ही सुरक्षित रहा। यही मुख्य वजह थी कि सिक्किम कई दशकों तक राजनीतिक रूप से भारतीय संघ से अलग थलग बना रहा।

समय के पहिए के साथ 1970 के दशक की शुरुआत में सिक्किम के भीतर लोकतांत्रिक सुधारों की मांग जोर पकड़ने लगी। आम जनता शासन व्यवस्था में अपनी अधिक से अधिक भागीदारी चाहती थी, जिसके चलते चोग्याल राजशाही के खिलाफ विरोध के स्वर उठने लगे। आखिरकार वर्ष 1975 में सिक्किम में एक ऐतिहासिक जनमत संग्रह कराया गया। इस जनमत संग्रह में राज्य के अधिकांश मतदाताओं ने चोग्याल राजशाही को हमेशा के लिए समाप्त करने और भारतीय संघ में पूर्ण विलय के पक्ष में अपना भारी समर्थन दिया।

जनमत संग्रह के इस जन-फैसले के बाद भारतीय संसद ने त्वरित कदम उठाते हुए 36वां संविधान संशोधन अधिनियम-1975 पारित किया। इसके तहत 16 मई 1975 को सिक्किम औपचारिक रूप से भारत का 22वां राज्य बन गया। सिक्किम भारतीय संघ में शांतिपूर्ण विलय और जनमत संग्रह के माध्यम से शामिल होने वाला देश का अंतिम क्षेत्र है। क्षेत्रफल के दृष्टिकोण से यह भारत का दूसरा सबसे छोटा राज्य है, जबकि जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक यह देश का सबसे कम आबादी वाला राज्य भी है।

अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जैव-विविधता और शांत हिमालयी नजारों के लिए यह राज्य पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची चोटी कंचनजंगा (खांगचेंदजोंगा) इसी राज्य में स्थित है, जिसका स्थानीय लोगों के मन में गहरा धार्मिक और सांस्कृतिक स्थान है। इसके अलावा, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए सिक्किम ने साल 2016 में देश का पहला पूरी तरह से जैविक यानी ऑर्गेनिक राज्य बनने का गौरव भी हासिल किया है, जो इसकी दूरगामी सोच को दर्शाता है।