उपभोक्ता अधिकारों के योद्धा दिजो कप्पन का निधन ; सड़क दुर्घटना के बाद हार गए जिंदगी की जंग
केरल के पाला में 68 वर्षीय उपभोक्ता और नागरिक अधिकार कार्यकर्ता दिजो कप्पन का निधन हो गया। सड़क दुर्घटना के बाद लंबे समय से उपचाराधीन कप्पन ने उपभोक्ता अधिकारों, बिजली दर, रोड टैक्स, कचरा प्रबंधन और बीमा दावों जैसे मुद्दों पर कई महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाइयाँ लड़ीं।
सेंटर फॉर कंज्यूमर एजुकेशन के संस्थापक दिजो कप्पन
केरल के सार्वजनिक जीवन में उपभोक्ता अधिकारों और नागरिक हितों की बुलंद आवाज रहे दिजो कप्पन का 68 वर्ष की आयु में पाला में निधन हो गया। उनके निधन से न केवल केरल बल्कि देशभर के उपभोक्ता अधिकार आंदोलन को गहरा आघात पहुँचा है। लंबे समय से एक सड़क दुर्घटना के बाद उपचाराधीन रहे कप्पन अंततः जीवन की इस लड़ाई को हार गए, लेकिन अपने पीछे जनहित की एक मजबूत विरासत छोड़ गए।
दिजो कप्पन ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित किया। वे उपभोक्ता अधिकारों, सड़क सुरक्षा, बिजली दरों, परिवहन और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर लगातार कानूनी लड़ाइयाँ लड़ते रहे। वर्ष 1988 में उन्होंने “सेंटर फॉर कंज्यूमर एजुकेशन” की स्थापना की, जो उपभोक्ताओं और किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित एक महत्वपूर्ण संगठन बन गया। इस मंच के माध्यम से उन्होंने कई जनहित याचिकाएँ दायर कीं और नीतिगत बदलावों के लिए दबाव बनाया।
कप्पन का संबंध पाला के एडामट्टम कप्पिल परिवार से था और अपने शुरुआती वर्षों में वे छात्र राजनीति में सक्रिय रहे। वे केरल स्टूडेंट कांग्रेस के नेता रहे, जो केरल कांग्रेस की छात्र इकाई है। छात्र जीवन से ही सामाजिक मुद्दों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता स्पष्ट थी, जो आगे चलकर व्यापक नागरिक अधिकार आंदोलनों में उनकी सक्रिय भूमिका के रूप में सामने आई।
अपने संगठन के ट्रस्टी के रूप में उन्होंने कई महत्वपूर्ण कानूनी हस्तक्षेप किए। इनमें बिजली दरों में वृद्धि, रोड टैक्स संशोधन, कोच्चि में कचरा प्रबंधन संकट और सार्वजनिक सड़कों पर लगाए जाने वाले विज्ञापन बोर्डों से होने वाली असुविधाओं के खिलाफ लड़ाई प्रमुख रही। इसके अलावा, उन्होंने सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए बीमा दावों की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए भी लंबा संघर्ष किया। उनकी यह पहल आम नागरिकों के लिए न्याय की राह आसान बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जाती है।
दिजो कप्पन केवल अदालतों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि वे समाचार चैनलों और सार्वजनिक मंचों पर भी नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रूप से अपनी बात रखते थे। वे सिविल राइट्स आंदोलनों में एक सशक्त आवाज के रूप में उभरे और समाज में पारदर्शिता व जवाबदेही की मांग को निरंतर मजबूत करते रहे। साथ ही, वे सबरी रेलवे सेंट्रल एक्शन काउंसिल के अध्यक्ष भी रहे, जहाँ उन्होंने क्षेत्रीय विकास और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों को उठाया।
उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि एक व्यक्ति की प्रतिबद्धता और निरंतर संघर्ष कैसे समाज में व्यापक बदलाव ला सकता है। दिजो कप्पन का निधन एक युग का अंत है, लेकिन उनके द्वारा शुरू की गई लड़ाइयाँ और उनके विचार आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे।