मुंबई। शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट की वरिष्ठ नेता और पूर्व महापौर विशाखा राउत को बड़ा झटका लगा है। पालघर जिला जाति सत्यापन समिति द्वारा उनके कुणबी जाति प्रमाण पत्र को अवैध घोषित किए जाने के बाद उनका नगरसेवक पद रद्द कर दिया गया है। बीएमसी की साधारण सभा में मुंबई की महापौर रितु तावड़े ने उनकी सदस्यता रद्द होने की आधिकारिक घोषणा की।

इस फैसले के साथ विशाखा राउत पर अगले 6 साल तक किसी भी प्रकार का चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी गई है। कार्रवाई के बाद बीएमसी में ठाकरे गुट के नगरसेवकों की संख्या घटकर 64 रह गई है।

विशाखा राउत ने दादर के वार्ड नंबर 191 से अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी महिला आरक्षित सीट से चुनाव जीता था। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को 197 वोटों से हराया था। हालांकि, चुनाव परिणाम के बाद उनके जाति प्रमाण पत्र पर सवाल उठाए गए थे।

जाति सत्यापन समिति के फैसले के खिलाफ विशाखा राउत अदालत भी गईं, लेकिन वहां से उन्हें कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद नगर विकास विभाग ने प्रक्रिया पूरी करते हुए उनका नगरसेवक पद रद्द करने की कार्रवाई की।

नगरसेवक पद रद्द होने के बाद बीएमसी सभागृह में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और भारी हंगामा देखने को मिला। इस फैसले पर विशाखा राउत ने भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इसे राजनीतिक षड्यंत्र और सत्ता का दुरुपयोग करार दिया।

विशाखा राउत ने कहा कि प्रशासन ने केवल ठाकरे गुट को निशाना बनाने के लिए इतनी जल्दबाजी दिखाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस फैसले के खिलाफ न्याय पाने के लिए वे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगी।

जाति प्रमाण पत्र को लेकर शुरू हुई कार्रवाई के बाद विशाखा राउत की नगरसेवक पद की सदस्यता रद्द होना और 6 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक बीएमसी की राजनीति में महत्वपूर्ण प्रशासनिक घटनाक्रम बन गया है।

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