मुंबई में दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर मराठी भाषा में नामपट्ट लगाने के नियम का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ बीएमसी अब दूसरे और तीसरे चरण में सख्त कार्रवाई करेगी। बीएमसी की विधि समिति की अध्यक्ष दीक्षा हर्षद कार्कर की अध्यक्षता में 13 अगस्त 2026 को आयोजित उच्चस्तरीय संयुक्त बैठक में इस संबंध में कार्रवाई की रणनीति तय की गई।

बैठक में बीएमसी के उप-आयुक्त विनायक विसुपुते सहित दुकानों और प्रतिष्ठान विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य मराठी साइनबोर्ड लगाने में लापरवाही बरतने वाले दुकानदारों और व्यवसायियों के खिलाफ दूसरे और तीसरे चरण में सख्त कार्रवाई की रणनीति तैयार करना था। इस दौरान पिछले अभियानों के आंकड़ों की भी समीक्षा की गई।

बीएमसी के अनुसार, 14 मई 2026 से 4 जून 2026 के बीच मुंबई के 26 प्रशासनिक वार्डों में कुल 36,773 दुकानों और प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया था। नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आने के बाद 1,124 प्रतिष्ठानों की निरीक्षण रिपोर्ट तैयार की गई। इनमें से 638 दुकानों के खिलाफ अदालती मामले दर्ज किए गए।

इसके अलावा 343 दुकानदारों ने आपसी सहमति से मामला निपटाने के लिए आवेदन किया। इन मामलों में 12,23,500 रुपये का जुर्माना वसूला गया। वहीं, 143 प्रतिष्ठानों पर कानूनी कार्रवाई अंतिम चरण में है।

विधि समिति अध्यक्ष दीक्षा कार्कर और उप-आयुक्त विनायक विसुपुते ने अधिकारियों को एस.वी. रोड, एल.बी.एस. मार्ग, लिंक रोड और प्रमुख राजमार्गों जैसे व्यस्त इलाकों में स्थित दुकानों की दोबारा जांच करने के सख्त निर्देश दिए हैं।

अब तीसरे चरण के तहत मुंबई के प्रमुख शॉपिंग मॉल, प्रसिद्ध व्यावसायिक केंद्रों और बड़े प्रतिष्ठानों की गहन जांच शुरू की जाएगी। जो दुकानें अभी भी मराठी में बड़े और स्पष्ट अक्षरों में नामपट्ट नहीं लगा रही हैं, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और ऐसी दुकानों की सूची सार्वजनिक की जाएगी।

बीएमसी प्रशासन ने सभी व्यापारियों से मराठी भाषा में निर्धारित नियमों के अनुसार नामपट्ट लगाने और नियमों का तुरंत पालन करने की अपील की है। पिछले अभियान में हुई कार्रवाई और अब प्रस्तावित दूसरे तथा तीसरे चरण की जांच से मराठी साइनबोर्ड नियम के अनुपालन को लेकर बीएमसी की कार्रवाई और सख्त होने के संकेत मिले हैं।

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