मुंबई में आफत की बारिश के बीच बीएमसी के 540 हाई-स्पीड पंपों ने बचाई मायानगरी, टला बड़ा संकट
मुंबई में तीन दिनों की रिकॉर्डतोड़ बारिश के बावजूद शहर की रफ्तार कैसे बरकरार रही? बीएमसी के 540 हाई-स्पीड पंपों और अत्याधुनिक जल भंडारण टैंकों ने किस तरह मायानगरी को जलजमाव के खतरे से बचाया और लोकल ट्रेनें कैसे दौड़ती रहीं, जानिए पूरी रिपोर्ट।
मायानगरी मुंबई में पिछले तीन दिनों से जारी रिकॉर्डतोड़ मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर शहर की रफ्तार को थामने की कोशिश की, लेकिन बृहन्मुंबई महानगरपालिका के पर्जन्य जलवाहिनी विभाग की मुस्तैदी के आगे कुदरत का यह सितम बेअसर साबित हुआ। महानगर के निचले इलाकों में जलभराव की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए बीएमसी ने मुंबई शहर और उपनगरों के विभिन्न संवेदनशील स्थानों पर कुल 547 जल निकासी पंप तैनात किए थे। मौसम विभाग द्वारा जारी रेड अलर्ट की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने पिछले तीन दिनों में इनमें से 540 उच्च क्षमता वाले पंपों को तत्काल युद्ध स्तर पर सक्रिय कर दिया। इन शक्तिशाली पंपों की मदद से सड़कों और निचले इलाकों में जमा हुए करोड़ों लीटर पानी को तेजी से बड़े नालों और जलवाहिनियों में डाइवर्ट किया गया, जिससे शहर में रिकॉर्ड बारिश के बावजूद जलजमाव नहीं हो सका और लाखों मुंबईकरों को बड़ी राहत मिली।
बीएमसी के ड्रेनेज विभाग द्वारा इस साल मानसून पूर्व चलाई गई विशेष स्वच्छता मुहिम, नई जलवाहिनियां बिछाने और पुरानी व जर्जर ड्रेनेज लाइनों के सुदृढ़ीकरण का सकारात्मक असर जमीनी स्तर पर दिखा है। जिन निचले इलाकों में पहले मामूली बारिश में भी बाढ़ जैसे हालात बन जाते थे, वहां इस बार जलभराव की घटनाओं में भारी गिरावट दर्ज की गई है। मुंबई के सबसे संवेदनशील फ्लडिंग स्पॉट्स माने जाने वाले परेल के हिंदमाता, गांधी मार्केट और सांताक्रूज़ के मिलन सबवे में इस वर्ष बनाए गए भूमिगत जल भंडारण टैंकों ने कमाल का काम किया। इन टैंकों में जमा बारिश के पानी को अत्याधुनिक पंपों के जरिए लगातार खींचकर बाहर निकाला गया, जिससे सभी प्रमुख और व्यस्त मार्गों पर यातायात बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से चलता रहा।
इस महा-ऑपरेशन के दौरान मुंबई के प्रमुख तटीय क्षेत्रों में स्थित इर्ला (जुहू), हाजी अली (महालक्ष्मी), लवग्रोव (वरली), क्लीवलैंड (वरली गांव), ब्रिटेनिका (रे रोड) और गजदरबंद (सांताक्रूज़) के मुख्य पर्जन्य जल उदंचन केंद्र चौबीसों घंटे पूरी क्षमता के साथ काम करते रहे। भारी बारिश के साथ समंदर में ऊंची लहरों वाली हाई टाइड आने पर गुरुत्वाकर्षण के सहारे नालों का पानी समंदर में जाना बंद हो जाता है और वह पीछे लौटने लगता है। ऐसी चुनौतीपूर्ण स्थिति से निपटने के लिए इन पंपिंग स्टेशनों के इंजनों ने पानी खींचकर सीधे समंदर में फेंका, जिससे रिहायशी इलाकों में पानी का स्तर नहीं बढ़ पाया।
मुंबई की जीवनवाहिनी लोकल ट्रेनों के पहिए इस आफत की बारिश में न थमें, इसके लिए बीएमसी और रेलवे प्रशासन ने बेहतरीन समन्वय बिठाया। एहतियात के तौर पर रेलवे पटरियों के पास के संवेदनशील हिस्सों में हाई-स्पीड पंप तैनात किए गए थे। इसके साथ ही रेल पटरियों के किनारे मौजूद नालों, बंद जलवाहिनियों, मोरी पेटियों और आउटलेट्स की गहन सफाई कर मलबा हटाया गया। बीएमसी की इस सटीक रणनीति और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली के चलते मध्य, पश्चिमी और हार्बर लाइनों पर पानी जमा नहीं हो सका और उपनगरीय लोकल ट्रेनें बिना किसी बड़े व्यवधान के निरंतर दौड़ती रहीं, जिससे लाखों दैनिक यात्रियों ने सुरक्षित सफर तय किया।