मालाड खाड़ी में उतरा ‘द ओशन-क्लीनअप’ इंटरसेप्टर, प्लास्टिक कचरे पर मुंबई का बड़ा कदम

मालाड खाड़ी में ‘द ओशन क्लीनअप’ इंटरसेप्टर प्रोजेक्ट शुरू, मुंबई के समुद्र से प्लास्टिक कचरा हटाने की नई तकनीक पर काम

Update: 2026-07-25 14:17 GMT

तस्वीर में भाजपा पार्षद तेजिंदर सिंह तिवाना मालाड खाड़ी में स्थापित 'द ओशन क्लीनअप' इंटरसेप्टर प्रणाली का निरीक्षण करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

मुंबई के समुद्र और तटीय इलाकों को प्लास्टिक कचरे से मुक्त करने की दिशा में मालाड खाड़ी में अंतरराष्ट्रीय स्तर के ‘द ओशन क्लीनअप’ इंटरसेप्टर पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई है। इस आधुनिक प्रणाली के जरिए समुद्र में पहुंचने वाले प्लास्टिक और अन्य तैरते कचरे को रास्ते में ही रोकने का प्रयास किया जा रहा है।

भाजपा पार्षद एवं बीएमसी की स्थायी समिति के सदस्य तेजिंदर सिंह तिवाना ने स्वयं पानी में उतरकर इस इंटरसेप्टर प्रणाली की कार्यप्रणाली, कचरा रोकने की क्षमता और चल रहे सफाई कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से बातचीत कर प्रोजेक्ट के तकनीकी पहलुओं और प्रभावशीलता की जानकारी ली।

यह प्रोजेक्ट ‘द ओशन क्लीनअप’ नामक वैश्विक एनजीओ द्वारा महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बृहन्मुंबई महानगरपालिका, ‘प्लास्टिक फिशर’ और ‘यूनाइटेड वे मुंबई’ के संयुक्त तत्वावधान में संचालित किया जा रहा है। मालाड और ट्रॉम्बे खाड़ी में स्थापित यह इंटरसेप्टर तकनीक नदियों और नालों से बहकर समुद्र में जाने वाले प्लास्टिक तथा अन्य तैरते कचरे को समुद्र तक पहुंचने से पहले रोकती है।

आंकड़ों के अनुसार, मुंबई से हर साल करीब 50 लाख किलोग्राम प्लास्टिक कचरा अरब सागर में बह जाता है। इस प्रोजेक्ट की खास बात यह है कि इसके प्रायोगिक चरण में बीएमसी को कोई शुल्क नहीं देना पड़ रहा है, जिससे करदाताओं के पैसों की सीधी बचत हो रही है।

हाल ही में भारी बारिश और तेज ज्वार के दौरान जुहू बीच पर बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा जमा हो गया था। नालों के जरिए समुद्र में पहुंचने वाला यह कचरा समुद्री जीवों के लिए खतरा बनता है और इसकी सफाई में बीएमसी का काफी बजट खर्च होता है। ऐसे में खाड़ी के मुहाने पर ही कचरा रोकने वाली यह तकनीक मुंबई के लिए उपयोगी साबित हो रही है।

निरीक्षण के दौरान तेजिंदर सिंह तिवाना ने कहा कि केवल निर्देश देना या उद्घाटन करना जनप्रतिनिधि का काम नहीं है, बल्कि धरातल पर उतरकर काम की गुणवत्ता जांचना ही सच्ची जनसेवा है। उन्होंने मुंबईकरों से अपील की कि लोग नदियों और समुद्र में कचरा न फेंकें तथा गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग करके बीएमसी का सहयोग करें।

उन्होंने कहा कि नागरिकों के सक्रिय सहयोग और आधुनिक तकनीक के बल पर ही मुंबई को स्वच्छ, सुंदर और प्रदूषण मुक्त बनाया जा सकता है। मालाड खाड़ी में शुरू किया गया यह पायलट प्रोजेक्ट समुद्री कचरा प्रबंधन और तटीय पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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