सेंचुरी मिल की जमीन निजी डेवलपर को देने पर विवाद, अशरफ आजमी ने बीएमसी को घेरा
सेंचुरी मिल की 6.17 एकड़ जमीन निजी डेवलपर को 30 साल की लीज पर देने के प्रस्ताव पर अशरफ आजमी ने बीएमसी से सवाल किए।
मुंबई के लोअर परेल इलाके में स्थित ऐतिहासिक सेंचुरी मिल की जमीन को 30 साल की लीज पर निजी डेवलपर को देने के बीएमसी के प्रस्ताव का विरोध तेज हो गया है। कांग्रेस नेता अशरफ आजमी ने बीएमसी के प्रस्ताव पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे मुंबई की जनता और गिरणी कामगारों के हितों के खिलाफ बताया है।
अशरफ आजमी ने आरोप लगाया कि करीब 13,000 करोड़ रुपये की विकास संभावना वाली इस बेहद कीमती जमीन को बीएमसी केवल 1,300 करोड़ रुपये में निजी डेवलपर के हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। करीब 6.17 एकड़ में फैली सेंचुरी मिल की जमीन के मालिकाना हक के लिए बीएमसी ने कई दशकों तक कानूनी लड़ाई लड़ी है। जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट का फैसला बीएमसी के पक्ष में आया था।
आजमी के अनुसार, दशकों के संघर्ष के बाद वापस मिली इस जमीन का मूल उद्देश्य गरीब वर्ग और गिरणी कामगारों के लिए आवास उपलब्ध कराना था। उनका कहना है कि अब बीएमसी इस जमीन को निजी व्यावसायिक विकास के लिए देने की तैयारी कर रही है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जमीन पर वर्षों से रह रहे सैकड़ों कामगार परिवारों के स्थायी पुनर्वसन की क्या योजना है और निर्माण कार्य के दौरान इन परिवारों के रहने की व्यवस्था कहां होगी।
अशरफ आजमी ने मांग की है कि बीएमसी लीज प्रस्ताव को तत्काल रोके और जमीन के मूल्यांकन से जुड़े सभी आंकड़े सार्वजनिक करे। उन्होंने कहा कि बीएमसी को स्वयं इस जमीन का विकास करना चाहिए, ताकि इसका इस्तेमाल कामगारों के घरों, पार्कों और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए किया जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई को बनाने वाले गिरणी कामगारों को शहर से बाहर नहीं धकेला जाना चाहिए और सार्वजनिक संपत्ति का इस्तेमाल निजी फायदे के बजाय जनता के हित में होना चाहिए।