पुणे बालेवाड़ी की 43 प्राइवेट ड्राइव प्रोजेक्ट में म्हाडा लाभार्थियों का रास्ता बंद
भोगवटा प्रमाणपत्र मिलने के बावजूद मुख्य प्रवेश मार्ग अवरुद्ध होने से आवंटियों को नहीं मिल पा रहा कब्जा; AAP ने दर्ज कराई शिकायत।
म्हाडा पुणे लॉटरी के तहत बालेवाड़ी में सदनिका पाने वाले आवंटी रास्ता बंद होने से परेशान हैं।
पुणे। पुणे के बालेवाड़ी स्थित चर्चित और पॉश आवासीय परियोजना ‘43 प्राइवेट ड्राइव’ में म्हाडा की लॉटरी के जरिए फ्लैट हासिल करने वाले नागरिक अपने ही घरों तक पहुंचने के लिए परेशान हैं। सितंबर 2025 में म्हाडा की आवासीय लॉटरी में सदनिका आवंटित होने के बावजूद विकासक और संबंधित सोसायटी के बीच जिम्मेदारी टालने के कारण लाभार्थियों को अपने हक के घरों में प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। हैरानी की बात यह है कि पूरे मामले की जानकारी होने और पुणे महानगरपालिका के अधिकारियों की ओर से स्थल निरीक्षण कर निर्देश दिए जाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ है। नागरिकों ने महानगरपालिका और म्हाडा प्रशासन पर केवल कागजी कार्रवाई करने का आरोप लगाया है।
बालेवाड़ी स्थित ‘43 प्राइवेट ड्राइव’ परियोजना में सितंबर 2025 की पुणे म्हाडा लॉटरी के माध्यम से सदनिका प्राप्त करने वाले आम नागरिकों के लिए उनके घरों तक पहुंचने का मुख्य प्रवेश मार्ग अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया है। इस गंभीर समस्या को लेकर पुणे महानगरपालिका के अधिकारियों ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया था और रास्ता खुला करने के निर्देश भी दिए थे, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
इस मामले में आम आदमी पार्टी युवा आघाड़ी के प्रदेश अध्यक्ष रविराज बबन काले ने संबंधित बिल्डर सचिन भंडारी और आर्किटेक्ट के खिलाफ तत्काल आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन की जानकारी में मामला होने के बावजूद म्हाडा और महानगरपालिका के अधिकारी प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय केवल औपचारिकताएं पूरी कर रहे हैं।
म्हाडा की सरकारी मान्यता प्राप्त लॉटरी के माध्यम से घर पाने वाले फ्लैटधारकों ने सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की हैं और विकासक को देय पूरी राशि भी निर्धारित समय पर जमा कराई है। इसके बावजूद सदनिकाओं तक पहुंचने के लिए कानूनी प्रवेश मार्ग उपलब्ध नहीं होने के कारण कई नागरिक आवंटित घरों का वास्तविक कब्जा नहीं ले पा रहे हैं। घर मिलने के बावजूद उसका उपयोग नहीं कर पाने से फ्लैटधारकों को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, इस परियोजना की इमारत को पुणे महानगरपालिका से भोगवटा प्रमाणपत्र (ओसी) भी प्राप्त हो चुका है। इसके बावजूद सदनिकाओं का वास्तविक उपयोग और कब्जा लेने की प्रक्रिया में मुख्य प्रवेश मार्ग का अवरोध सामने आना गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
फ्लैटधारकों ने इस समस्या के समाधान के लिए म्हाडा और महानगरपालिका प्रशासन से कई बार संपर्क किया। इसके बाद महानगरपालिका के संबंधित अधिकारियों ने घटनास्थल का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया और रास्ता खुला करने के निर्देश दिए जाने की जानकारी प्रशासन की ओर से दी गई। विकासक सचिन भंडारी की ओर से एक गेट हटाकर अपनी तरफ से रास्ता खुला करने का दावा किया गया है, लेकिन संबंधित सोसायटी की ओर से अब भी रास्ते का इस्तेमाल करने और आवागमन के लिए मार्ग देने पर रोक लगाई जा रही है। इसके चलते मूल समस्या जस की तस बनी हुई है और सदनिकाओं तक पहुंचने का रास्ता पूरी तरह बंद है।
रविराज बबन काले ने प्रशासन के समक्ष कई मांगें रखी हैं। इनमें विकासक और आर्किटेक्ट की ओर से महानगरपालिका से परियोजना की मंजूरी लेते समय प्रस्तुत आधिकारिक नक्शे में दर्शाए गए स्वीकृत रास्ते को तत्काल बिना किसी शर्त के नागरिकों के लिए खोलना शामिल है। इसके साथ ही स्वीकृत योजना और नियमों के अनुसार ग्राहकों को रास्ता उपलब्ध नहीं कराने के लिए जिम्मेदार आर्किटेक्ट का लाइसेंस तत्काल रद्द करने की मांग की गई है।
उन्होंने ग्राहकों को सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद परेशान करने और उनके साथ धोखाधड़ी करने के आरोपों के आधार पर विकासक सचिन भंडारी के खिलाफ तत्काल आपराधिक मामले दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की भी मांग की है। इसके अलावा पूरे प्रकरण में महानगरपालिका प्रशासन की ओर से अब तक की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट जल्द से जल्द लिखित रूप में संबंधित नागरिकों और प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत करने की मांग उठाई गई है।
काले ने चेतावनी दी है कि केवल रास्ता उपलब्ध नहीं होने के कारण आम नागरिकों को आर्थिक नुकसान और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। ऐसे में प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप कर प्रभावित सदनिकाधारकों को न्याय दिलाए। यदि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आम आदमी पार्टी की ओर से तीव्र आंदोलन छेड़ा जाएगा। अब इस पूरे मामले में म्हाडा और महानगरपालिका प्रशासन की अगली कार्रवाई पर प्रभावित नागरिकों की निगाहें टिकी हैं।