तस्वीर में मुरगूड के काच मंदिर में वासुपूज्य और आदिनाथ भगवान की सजाई गई मूर्तियां दिख रही हैं।

मुरगूड। बाजारपेठ स्थित श्री जैन श्वेतांबर मंदिर में जैन बांधवों का पवित्र पर्युषण पर्व भक्तिमय वातावरण में उत्साह के साथ संपन्न हुआ। श्री वासुपूज्य भगवान काच मंदिर के रूप में प्रसिद्ध यह मंदिर मुरगूड परिसर के सुंदर, कलात्मक और नाविन्यपूर्ण मंदिर के रूप में पहचाना जाता है। आठ दिवसीय पर्युषण पर्व के दौरान विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों, तपश्चर्या, संवत्सरी क्षमायाचना और वरघोड़ा मिरवणूक ने श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया।

जैन धर्म में पर्युषण पर्व को अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक पर्व माना जाता है। यह केवल उत्सव या मनोरंजन का समय नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, आत्मपरीक्षण, संयम, तपश्चर्या और क्षमाभाव को विकसित करने का अवसर माना जाता है।

आठ दिनों के पर्वकाल में मंदिर में प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्नात्र पूजा, विविध पूजा, वाचन तथा नयनरम्य अंगी के आयोजन हुए। शाम के समय आरती, भावना यानी भक्तिगीत, दांडिया रास, गर्भनृत्य सहित अन्य धार्मिक कार्यक्रम भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुए।

पर्युषण पर्व के अवसर पर जैन श्रावक-श्राविकाओं ने विभिन्न प्रकार की तपश्चर्या में सहभागिता की। सिद्धीतप, अठई, अट्ठम, समोसरण तप के साथ नवकार महामंत्र की आराधना और अन्य धार्मिक तपश्चर्याएं की गईं। इससे पूरे दिन मंदिर परिसर में धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।

पर्युषण पर्व के महत्वपूर्ण दिन संवत्सरी पर जैन बांधवों ने एक-दूसरे के साथ-साथ सभी जीव-प्राणियों से क्षमायाचना की और क्षमाभाव का संदेश दिया। पर्व के अवसर पर ‘वरघोड़ा’ अर्थात रथ की मिरवणूक भी उत्साहपूर्ण वातावरण में निकाली गई। मंदिर परिसर में की गई आकर्षक विद्युत रोषणाई से पूरा परिसर रोशन हो उठा।

इस धार्मिक आयोजन में मुरगूड शहर के जैन बांधवों के साथ सोनगे, बाणगे, बिद्री, राशिवडे सहित आसपास के क्षेत्रों से जैन समाज के बांधव बड़ी संख्या में शामिल हुए। विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के चलते पूरे पर्वकाल में मंदिर परिसर में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।

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