मुंबई मेयर रितु तावड़े ने की पर्यावरण सुधार की अपील; जानें क्या है युवाओं को दी बड़ी जिम्मेदारी ?

कंक्रीट के जंगल में बदलते महानगर के सिकुड़ते हरित आवरण और मैंग्रोव संरक्षण के लिए बीएमसी ने मेट्रो लाइनों के पास वृक्षारोपण योजना की शुरुआत की है।

Update: 2026-05-25 13:45 GMT

महानगर के खुले स्थानों और मेट्रो ढांचों के नीचे हरियाली बढ़ाने के जन-अभियान के संदर्भ में मुंबई की नवनिर्वाचित बीएमसी मेयर रितु तावड़े की एक फाइल तस्वीर।

BMC Mayor Ritu Tawde green city initiative : कंक्रीट के जंगल में तब्दील होती देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के सिकुड़ते हरित आवरण को बचाने के लिए बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने एक अभूतपूर्व और बड़े जन-अभियान का बिगुल फूंक दिया है। महानगर में तेजी से खत्म हो रही हरियाली और पर्यावरण असंतुलन की गंभीर चुनौतियों के बीच मुंबई की नवनिर्वाचित मेयर रितु तावड़े ने शहर के भविष्य यानी युवा पीढ़ी से मुंबई की सूरत बदलने की भावुक और रणनीतिक अपील की है। मेयर ने मुंबई के युवाओं का आह्वान किया है कि वे आगे आएं और शहर के उन खुले स्थानों व बंजर जमीनों की पहचान करें जिन्हें एक नए हरित क्षेत्र में बदला जा सकता है। इस मुहिम को मुंबई के पर्यावरण इतिहास में नागरिक भागीदारी का एक नया और ऐतिहासिक अध्याय माना जा रहा है।

इस बड़े नीतिगत घटनाक्रम की अगुवाई कर रहीं बीएमसी मेयर रितु तावड़े का कार्यकाल अपने आप में बेहद ऐतिहासिक है। फरवरी 2026 में मेयर पद की कमान संभालने वाली रितु तावड़े पिछले 44 वर्षों के इतिहास में इस शीर्ष पद पर पहुंचने वाली अपनी राजनीतिक पार्टी की पहली नेता हैं। अपनी इस नई और दूरगामी पहल के तहत मेयर ने युवाओं को विशेष रूप से मेट्रो लाइनों, नवनिर्वाचित फ्लाईओवरों और बड़े पुलों के आसपास के खाली पड़े स्थानों को चिह्नित करने का न्योता दिया है। बीएमसी ने आधिकारिक तौर पर वादा किया है कि युवाओं द्वारा चुने गए इन स्थानों पर नगर निगम अपनी ओर से उच्च गुणवत्ता वाले पौधे, उपजाऊ मिट्टी और उनके दीर्घकालिक रखरखाव के लिए पूरी तकनीकी व प्रशासनिक सहायता प्रदान करेगा।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब मुंबई का पर्यावरण एक बेहद संवेदनशील और खतरनाक मोड़ पर खड़ा है। आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि मुंबई का ग्रीन कवर बेहद भयावह गति से घटा है। बीएमसी के अपने रिकॉर्ड के अनुसार, जहां वर्ष 2021-22 में शहर के भीतर लगभग 2,65,000 पेड़ लगाए गए थे, वहीं अगले ही साल यह आंकड़ा तेजी से गिरकर मात्र 76,000 पौधों पर सिमट गया। इसके अतिरिक्त, मुंबई को आधुनिक बनाने के लिए चल रहे कोस्टल रोड और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के कारण हजारों की संख्या में तटीय मैंग्रोव (सदाबहार वनों) की बलि चढ़ाई गई है, जिससे मुंबई पर समुद्री चक्रवातों और पर्यावरण क्षरण का खतरा कई गुना बढ़ गया है।

हालांकि, मेयर की इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर शहर के भीतर एक तीव्र वैचारिक और प्रशासनिक विभाजन भी देखने को मिल रहा है। पर्यावरणविदों और विपक्षी आलोचकों का एक बड़ा धड़ा इस योजना को बीएमसी द्वारा अपनी प्राथमिक जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ने की कोशिश के रूप में देख रहा है। आलोचकों का तर्क है कि हजारों करोड़ रुपये के बजट वाले नगर निगम को अपनी विफलता छुपाने के लिए जनता के भरोसे नहीं बैठना चाहिए, विशेषकर तब जब बुनियादी विकास और पर्यावरण के बीच भारी खींचतान चल रही हो। इसके विपरीत, शहर के जागरूक उद्यमियों, उद्योगपतियों और रियल एस्टेट क्षेत्र के दिग्गजों ने इस पहल का पुरजोर समर्थन किया है। समर्थकों ने स्कूलों में वृक्षारोपण अभियान चलाने और स्थानीय पारिस्थितिकी को बचाने के लिए केवल स्वदेशी (नेटिव) प्रजातियों के पौधे लगाने जैसे कई महत्वपूर्ण सुझाव मेयर के सामने रखे हैं।

इस पूरी मुहिम का प्रभाव आने वाले समय में मुंबई की न केवल आबोहवा बल्कि इसके सामाजिक ताने-बाने पर भी दिखना तय है। प्रति व्यक्ति बेहद कम हरित क्षेत्र वाले इस वैश्विक महानगर के लिए यह योजना सिर्फ एक प्रशासनिक प्रयोग नहीं, बल्कि मुंबई को भविष्य के पर्यावरणीय संकटों से बचाने की एक अंतिम ढाल साबित हो सकती है। अब पूरी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या मुंबई के आधुनिक युवा अपने गैजेट्स और व्यस्त जीवनशैली से बाहर निकलकर मेयर की इस पर्यावरण पुकार का जवाब देने के लिए सड़कों पर उतरते हैं या विकास की अंधी दौड़ में मुंबई की हरियाली हमेशा के लिए कंक्रीट के नीचे दफन होकर रह जाएगी।

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