लातूर में मराठा आरक्षण के लिए व्यक्ति ने की आत्महत्या, शव रख हाइवे जाम
मृतक के परिजनों ने सरकारी नौकरी और कुणबी प्रमाणपत्र पर लिखित आश्वासन की मांग को लेकर उदगीर-लातूर मार्ग पर चक्काजाम किया।
तस्वीर में रात के समय सड़क पर बैठे और खड़े लोग प्रदर्शन करते दिख रहे हैं।
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर लातूर जिले में उस समय तनाव बढ़ गया, जब शिरूर अनंतपाळ तालुका के सुमठाणा निवासी सुनील विनायक बिरादार (42) ने ‘मैं मराठा समाज के आरक्षण के लिए अपना जीवन समाप्त कर रहा हूं’ लिखकर कुएं में छलांग लगा दी। मंगलवार को हुई इस घटना से इलाके में शोक और मराठा समाज में आक्रोश का माहौल है।
जानकारी के अनुसार, मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे सुनील बिरादार के गांव के एक कुएं में छलांग लगाने की बात सामने आई। सूचना मिलते ही ग्रामीण और परिजन मौके पर पहुंचे। तलाश अभियान के बाद उनका शव कुएं से बाहर निकाला गया। इस दौरान उनके पास एक सुसाइड नोट मिला। इसमें मराठा आरक्षण की मांग के लिए जीवन समाप्त करने की बात लिखे होने की जानकारी सामने आई है।
घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों ने आक्रामक रुख अपनाते हुए मोड में उदगीर-लातूर मुख्य राजमार्ग पर शव रखकर चक्काजाम आंदोलन शुरू कर दिया। आंदोलन के कारण राजमार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया और दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
आंदोलनकारियों ने मांग की कि मृतक सुनील बिरादार के परिवार के एक सदस्य को तत्काल सरकारी नौकरी में शामिल करने का लिखित आश्वासन दिया जाए। इसके साथ ही मराठा समाज को कुणबी प्रमाणपत्र देने के संबंध में प्रशासन अपनी ठोस लिखित भूमिका स्पष्ट करे। परिजनों और आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कहा कि लिखित आश्वासन मिलने तक शव नहीं लिया जाएगा और अंतिम संस्कार भी नहीं किया जाएगा। इससे प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
जालना जिले के अंतरवली सराटी में मनोज जरांगे पाटील के नेतृत्व में मराठा आरक्षण के लिए चल रहे आंदोलन की पृष्ठभूमि में लातूर जिले की इस घटना ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। आरक्षण की मांग को लेकर एक मराठा व्यक्ति द्वारा आत्महत्या जैसा कदम उठाए जाने के बाद समाज में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे हैं। अधिकारियों की ओर से आंदोलनकारियों को समझाने और स्थिति को नियंत्रण में लाने के प्रयास जारी हैं। हालांकि, लिखित आश्वासन मिलने तक आंदोलन वापस नहीं लेने की आंदोलनकारियों की भूमिका के चलते इलाके में तनाव बना हुआ है।
इस घटना से एक परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वहीं, मराठा आरक्षण के मुद्दे पर जारी आंदोलन एक बार फिर गंभीर और भावनात्मक मोड़ पर पहुंच गया है। अब शासन और प्रशासन इन मांगों पर क्या निर्णय लेते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।