आठ दिन बाद पहुंची घंटागाड़ी तो नागरिकों ने पहनाया पुष्पहार, लातूर में गांधीगिरी से जताया अनोखा विरोध
लातूर के महादेव नगर और गरुड चौक में आठ दिन बाद पहुंची घंटागाड़ी का नागरिकों ने पुष्पहार से स्वागत कर गांधीगिरी के जरिए नियमित कचरा संकलन की मांग उठाई।
तस्वीर में लातूर के महादेव नगर में घंटागाड़ी के पास खड़े नागरिक चालक का स्वागत करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
लातूर शहर के वार्ड क्रमांक 3 स्थित महादेव नगर और गरुड चौक क्षेत्र में शनिवार, 1 अगस्त 2026 को तब करीब आठ दिन बाद घंटागाड़ी पहुंची, तो नागरिकों ने उसका पुष्पहार पहनाकर और चालक को गुलाब का फूल देकर अनोखे अंदाज में स्वागत किया। यह स्वागत नहीं, बल्कि महानगरपालिका प्रशासन की ढीली कचरा संकलन व्यवस्था के खिलाफ किया गया उपरोधिक विरोध था। सामाजिक कार्यकर्ता दीपक गंगणे के नेतृत्व में हुए इस ‘गांधीगिरी’ आंदोलन ने पूरे क्षेत्र का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
महादेव नगर और गरुड चौक क्षेत्र में पिछले आठ दिनों से घंटागाड़ी नहीं पहुंचने के कारण लोगों के सामने घरों के कचरे के निस्तारण की गंभीर समस्या खड़ी हो गई थी। बरसात के मौसम में घरों में कचरा जमा होने से मजबूरी में कई लोगों को उसे सड़क किनारे या खाली स्थानों पर फेंकना पड़ रहा था। इससे क्षेत्र में दुर्गंध फैल गई और मच्छरों की बढ़ती संख्या के साथ संक्रामक बीमारियों एवं रोग फैलने की आशंका भी नागरिकों ने जताई।
आठ दिनों के इंतजार के बाद जब शनिवार को घंटागाड़ी क्षेत्र में पहुंची तो लोगों ने नाराजगी जताने के बजाय गांधीगिरी का रास्ता अपनाया। नागरिकों ने घंटागाड़ी को पुष्पहार पहनाया और चालक को गुलाब का फूल देकर उसका स्वागत किया। इस अनोखे विरोध के माध्यम से महानगरपालिका प्रशासन को उसकी जिम्मेदारी का अहसास कराने का प्रयास किया गया।
इस दौरान सामाजिक कार्यकर्ता दीपक गंगणे ने कहा, "पिछले आठ दिनों से घंटागाड़ी नहीं आने के कारण नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कचरे के कारण क्षेत्र में रोग फैलने का खतरा बढ़ गया है। महानगरपालिका प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए महादेव नगर और गरुड चौक क्षेत्र में प्रतिदिन नियमित समय पर घंटागाड़ी भेजकर कचरा संकलन की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।"
आंदोलन के दौरान नागरिकों ने भी महानगरपालिका प्रशासन से नियमित और जिम्मेदार कचरा संकलन सेवा शुरू करने की मांग की। पुष्पहार के माध्यम से दर्ज कराए गए इस अनोखे गांधीगिरी आंदोलन की पूरे प्रभाग में चर्चा हो रही है और अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस विरोध पर कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है।