तस्वीर में गारगोटी कॉलेज कक्ष में एक व्यक्ति पोडियम से व्याख्यान दे रहा है।

श्री मौनी विद्यापीठ संचालित कर्मवीर हिरे कला, विज्ञान, वाणिज्य एवं शिक्षाशास्त्र महाविद्यालय, गारगोटी के बी.ए. बी.एड. विभाग के शिक्षाशास्त्र विभाग की ओर से शिक्षक दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर ‘भारतीय संविधान एवं शिक्षा’ विषय पर डॉ. शहाजीराव वारके ने मार्गदर्शन किया।

कार्यक्रम की शुरुआत भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन तथा शिक्षाविद् डॉ. जे. पी. नाईक के चित्रों का पूजन कर की गई। शिक्षक दिवस के अवसर पर तैयार की गई भित्तिपत्रिका का अनावरण भी अतिथियों के हाथों किया गया।

मार्गदर्शन करते हुए डॉ. शहाजीराव वारके ने भारतीय संविधान में शिक्षा से संबंधित विभिन्न अनुच्छेदों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा, “शिक्षा मनुष्य का मौलिक अधिकार है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा के माध्यम से संविधानिक मूल्यों की रक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना की जिम्मेदारी शिक्षकों की है।

शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित निबंध लेखन प्रतियोगिता के विजेता विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र एवं उपहार देकर सम्मानित किया गया। साथ ही विद्यार्थियों और प्राध्यापकों ने शिक्षक दिवस के अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए।

बी.ए. बी.एड. विभाग की समन्वयक प्रा. शारदा पाटील ने कहा कि भावी शिक्षकों के लिए अपनी सेवा में संविधानिक मूल्यों, सिद्धांतों और कर्तव्यों को अपनाना आवश्यक है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रा. (डॉ.) यू. आर. शिंदे ने की। अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को भारतीय संविधान के प्रति जागरूक होने के साथ ही संविधानिक मूल्यों की समझ होना आवश्यक है।

कार्यक्रम का स्वागत एवं प्रास्ताविक डॉ. प्रदीप पाटील ने किया। प्रमुख अतिथि का परिचय डॉ. आर. आर. शेळके ने कराया। आभार प्रा. शुभांगी पाटील ने व्यक्त किया। संचालन प्रशिक्षणार्थी विद्यार्थी कु. निकिता देसाई ने किया।

इस अवसर पर श्री मौनी विद्यापीठ के कर्मचारी प्रतिनिधि डॉ. अरविंद चौगुले, उपप्राचार्य डॉ. एस. बी. देसाई, प्रा. व्ही. एम. बर्डे सहित महाविद्यालय के प्राध्यापक, शिक्षकेतर कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।


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