गोकुळ चुनाव: महायुति में 1400 दूध संस्थाओं पर विवाद, युवराज पाटील का बयान
कोल्हापुर में गोकुळ दूध संघ के चुनाव से पहले संस्थाओं की पात्रता पर महायुति में खींचतान जारी है। संचालक युवराज पाटील ने पैनल चयन का अधिकार शीर्ष नेताओं पर छोड़ा।
कोल्हापुर में गोकुळ दूध संघ के आगामी चुनाव से पहले 1,400 से अधिक दूध संस्थाओं की पात्रता का मुद्दा महायुति के भीतर राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है। चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसनसाहेब मुश्रीफ के पत्रक पर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की प्रतिक्रियाओं के बीच गोकुळ दूध संघ के संचालक युवराज पाटील-बापू ने प्रसिद्धि पत्रक जारी कर अपनी भूमिका स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्रजी फडणवीस ही महायुति के नेता हैं और गोकुळ चुनाव में महायुति का पैनल तैयार करने का अधिकार मुख्यमंत्री फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथजी शिंदे और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रावहिनी पवार के पास ही है।
युवराज पाटील ने कहा कि मंत्री हसनसाहेब मुश्रीफ ने दो दिन पहले जारी पत्रक में न्यायालयीन लड़ाई में पात्र ठहराई गई 1,400 दूध संस्थाओं के संबंध में विस्तृत स्पष्टीकरण दिया था। उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं की पात्रता का श्रेय कांग्रेस की ओर से लेने का प्रयास किए जाने के कारण वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए यह पत्रक जारी किया गया था। हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि इस आंकड़े से भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को इतनी परेशानी क्यों हुई, यह सवाल अब भी अनुत्तरित है।
पाटील ने स्पष्ट किया कि गोकुळ दूध संघ के चुनाव में महायुति का पैनल तैयार करने का अधिकार मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को ही है। उन्होंने कहा कि तीनों दलों की भावना और मांग है कि यह पैनल पार्टीवार संख्या बल को ध्यान में रखकर तैयार किया जाए। मुश्रीफ द्वारा जारी आंकड़े यदि वास्तविकता के अनुरूप नहीं हैं तो उस पर चर्चा करने में कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, उनके पत्रक में भाजपा के कितने ठराव हैं, इसका कहीं उल्लेख नहीं किया गया था।
युवराज पाटील ने दावा किया कि 1,400 से अधिक दूध संस्थाओं में 80 प्रतिशत से अधिक संस्थाएं राष्ट्रवादी कांग्रेस, शिवसेना-शिंदे गुट और जनसुराज्य पार्टी से संबंधित हैं। ये तीनों दल महायुति के घटक हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि फिर मित्र दलों की ही संस्थाओं को मतदाता सूची से बाहर रखने के पीछे क्या उद्देश्य है, यह अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि न्यायालयीन लड़ाई में इन सभी संस्थाओं को बचाने के लिए सामूहिक प्रयास किए गए। इससे संगठन और मजबूत हुआ तथा अन्याय के खिलाफ सभी की वज्रमूठ तैयार हुई। पाटील के अनुसार, इस संघर्ष के दौरान संबंधित संस्थाओं को एकजुट करने का काम हुआ। शपथ और आणाभाका भी हुईं तथा संस्थाओं को बचाने के प्रयास सफल रहे।
‘अदृश्य शक्ति’ को लेकर भी युवराज पाटील ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बचाव किया। उन्होंने कहा कि ‘अदृश्य शक्ति’ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस नहीं हैं और इस पूरे विषय से मुख्यमंत्री का काडीमात्र संबंध नहीं है। उन्होंने केवल स्वार्थ के लिए मुख्यमंत्री को इस मामले में घसीटकर राजनीति नहीं करने की अपील की।
युवराज पाटील ने अपने प्रसिद्धि पत्रक के अंत में कहा कि इस न्यायालयीन लड़ाई के कारण संबंधित संस्थाओं को एक साथ लाने का काम हुआ और संस्थाओं को बचाने के प्रयासों को सफलता मिली। उनके अनुसार, इस लड़ाई में जीत सत्य की ही हुई है।