सहाय्यक प्राध्यापक भर्ती पर बड़ा सवाल, ‘पवित्र पोर्टल’ की तर्ज पर केंद्रीकृत प्रक्रिया की मांग
सहाय्यक प्राध्यापक भर्ती में पारदर्शिता की मांग तेज, भारतीय पदवीधर प्रतिष्ठान ने ‘पवित्र पोर्टल’ की तर्ज पर केंद्रीकृत ऑनलाइन प्रक्रिया मांगी।
राज्य के महाविद्यालयों में सहाय्यक प्राध्यापकों की सैकड़ों रिक्त पदों पर पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण भर्ती के लिए राज्यस्तरीय स्वतंत्र परीक्षा आयोजित कर ‘पवित्र पोर्टल’ की तर्ज पर केंद्रीकृत ऑनलाइन भर्ती प्रक्रिया लागू करने की मांग भारतीय पदवीधर प्रतिष्ठान (उत्तर महाराष्ट्र) ने राज्य के मुख्यमंत्री से निवेदन के माध्यम से की है।
वर्तमान में राज्य के महाविद्यालयों में सहाय्यक प्राध्यापकों के पद बड़ी संख्या में रिक्त हैं। हजारों NET, SET और Ph.D. धारक उम्मीदवार भर्ती का इंतजार कर रहे हैं। हाल ही में समाचार पत्रों में प्रकाशित “सहाय्यक प्राध्यापकांसाठी सव्वा कोटीचा दर?” खबर का हवाला देते हुए भारतीय पदवीधर प्रतिष्ठान के उत्तर महाराष्ट्र अध्यक्ष तुषार विजय शेटे ने भर्ती प्रक्रिया में आर्थिक अनियमितता और सिफारिश के आरोपों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों से पात्र उम्मीदवारों के बीच अविश्वास का माहौल बन रहा है।
निवेदन में कहा गया है कि जिस तरह स्कूलों में शिक्षक भर्ती के लिए ‘TAIT’ परीक्षा और ‘पवित्र पोर्टल’ का इस्तेमाल किया जाता है, उसी तर्ज पर सहाय्यक प्राध्यापक पदों के लिए भी स्वतंत्र राज्यस्तरीय वस्तुनिष्ठ परीक्षा आयोजित की जानी चाहिए। परीक्षा के अंकों के साथ शैक्षणिक एवं शोध पात्रता (Academic & Research Credentials) तथा आरक्षण नियमों को ध्यान में रखते हुए संस्था और पद के अनुसार ऑनलाइन मेरिट के आधार पर चयन प्रक्रिया संचालित करने की मांग की गई है।
प्रतिष्ठान के अनुसार पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी होने से सिफारिश, आर्थिक लूट और अनियमितताओं पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सकेगा तथा पात्र और गुणवंत उम्मीदवारों को अवसर मिलेगा।
भारतीय पदवीधर प्रतिष्ठान के उत्तर महाराष्ट्र अध्यक्ष तुषार विजय शेटे ने कहा, “पात्रता को न्याय, गुणवत्ता को अवसर और भर्ती प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता” यही हमारा सूत्र है। उच्च शिक्षा व्यवस्था का स्तर बनाए रखने और पात्र उम्मीदवारों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए शासन को इस पर तत्काल सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।
इस मांग का निवेदन उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव तथा उच्च शिक्षा संचालक को भी भेजा गया है। अब इस मांग पर शासन क्या निर्णय लेता है, इस पर राज्य के उच्चशिक्षित बेरोजगार उम्मीदवारों की नजर बनी हुई है।