तस्वीर में दिख रहे हैं कृषि विभाग के अधिकारी और कर्मचारी वर्धा में लैपटॉप जमा करते हुए।

कृषि विभाग के प्रस्तावित अतांत्रिक आकृतिबंध को रद्द करने की मांग को लेकर राज्य के कृषि अधिकारी और कर्मचारियों ने आंदोलन तेज कर दिया है। सरकार की ओर से अब तक ठोस निर्णय नहीं लिए जाने के विरोध में 11 सितंबर को राज्यभर के कृषि अधिकारी-कर्मचारियों ने सरकारी लैपटॉप कार्यालयों में जमा कर दिए। इस आंदोलन में वर्धा जिले के कृषि विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल हुए हैं। कर्मचारियों ने ऑनलाइन और डिजिटल कामकाज का बहिष्कार किया है।

राज्य में करीब 13 हजार से अधिक सरकारी लैपटॉप जमा किए जाने से कृषि विभाग के ऑनलाइन कामकाज पर बड़ा असर पड़ा है। किसानों को विभिन्न योजनाओं की जानकारी, ऑनलाइन रिकॉर्ड, रिपोर्ट, फसल संबंधी कार्य और डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने में कृषि विभाग की व्यवस्था महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद कर्मचारियों ने सरकार की भूमिका के विरोध में यह आक्रामक रुख अपनाया है।

10 सितंबर को गुणनियंत्रण संचालक सुनील बोरकर और फलोत्पादन संचालक जीवनराव बुंदे की मौजूदगी में करीब तीन घंटे बैठक हुई। हालांकि, पुराने स्वीकृत पदों की संख्या के ढांचे में ही फेरबदल करने की भूमिका कायम रहने के कारण बैठक में कोई ठोस समाधान नहीं निकलने की बात कृषि महासंघ ने कही है।

क्षेत्रीय स्तर पर पहले से ही कर्मचारियों की कमी है और काम का दबाव बढ़ गया है। ऐसे में प्रस्तावित आकृतिबंध के कारण किसानों को मिलने वाली कृषि सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका होने का दावा महासंघ ने किया है। इसलिए प्रस्तावित अतांत्रिक आकृतिबंध को तत्काल रद्द कर किसान-केंद्रित और तकनीकी रूप से सक्षम नया आकृतिबंध लागू करने की मांग की गई है।

इस बीच, राज्य में प्राकृतिक आपदा, अतिवृष्टि, फसलों के नुकसान और विभिन्न कृषि संकटों के कारण किसान मुश्किलों में हैं। ऐसे समय में कृषि विभाग की क्षेत्रीय व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है। उपलब्ध पदों की संख्या में ही फेरबदल करने का प्रयास अन्यायपूर्ण होने की बात महासंघ ने कही है।

महाराष्ट्र राज्य कृषिसेवा महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि 21 सितंबर तक सरकार ने आकृतिबंध रद्द करने के संबंध में सकारात्मक और ठोस निर्णय नहीं लिया, तो अनिश्चितकालीन कामबंद आंदोलन किया जाएगा। महासंघ ने यह भी स्पष्ट किया है कि सरकार की ओर से आधिकारिक आदेश जारी होते ही आंदोलन वापस लेकर अधिकारी-कर्मचारी तत्काल काम पर लौट आएंगे।

वर्धा जिले में कृषि विभाग के कामकाज पर भी इस आंदोलन का असर पड़ने की संभावना है। अब सरकार इस मुद्दे पर क्या निर्णय लेती है, इस पर कृषि अधिकारी-कर्मचारियों के साथ ही किसान वर्ग की भी नजर बनी हुई है।

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