AI के दौर में गांवों की बढ़ेगी अहमियत, अन्न सुरक्षा के लिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने पर जोर

AI के बढ़ते प्रभाव के बीच भुषण माधव बागुल ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था, अन्न सुरक्षा और आत्मनिर्भर गांवों की जरूरत पर जोर दिया।

Update: 2026-07-07 12:12 GMT

तस्वीर में ग्राम निष्ठा संघर्ष समिति के सामाजिक कार्यकर्ता भूषण माधव बागुल दिखाई दे रहे हैं।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और ऑटोमेशन के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच रोजगार व्यवस्था में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है। इसी संदर्भ में सामाजिक कार्यकर्ता भुषण माधव बागुल (ग्राम निष्ठा संघर्ष समिति) ने कहा है कि आने वाले समय में शेती, अन्न उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्व और अधिक बढ़ेगा।

शिरपूर प्रतिनिधि के अनुसार, भुषण माधव बागुल ने कहा कि AI के कारण कोडिंग, लेखांकन, डिजाइन और रिपोर्ट लेखन जैसे कई कार्य किए जा सकते हैं, लेकिन AI खेती कर अन्नधान्य का उत्पादन नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि भविष्य में अन्न, पानी और ऊर्जा ही वास्तविक संपत्ती ठरणार आहेत। इसलिए ग्रामीण भाग को उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित करना आवश्यक है।

बागुल ने कहा कि अक्सर यह सवाल उठाया जाता है कि "शेतकऱ्यांनाच कर्जमाफी का आणि मध्यमवर्गीयांना का नाही?" मध्यमवर्गीय नागरिक भी घर के कर्ज, बच्चों की शिक्षा, महंगाई और नौकरी की असुरक्षा जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। हालांकि, किसान केवल अपने लिए नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए अन्न उत्पादन करता है। इसलिए खेती केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अन्न सुरक्षा का आधार है।

उन्होंने कहा कि आज डिजिटल अर्थव्यवस्था को भविष्य माना जा रहा है, लेकिन किसी भी देश की वास्तविक ताकत मिट्टी, पानी, अन्न और ऊर्जा पर निर्भर होती है। उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने को देश के सतत विकास के लिए जरूरी बताया।

भुषण माधव बागुल के अनुसार, भविष्य में यदि शहरों में रोजगार के अवसर कम होते हैं तो कई युवा फिर से गांवों की ओर लौट सकते हैं। इसके लिए अभी से ग्रामीण क्षेत्रों में अन्न प्रक्रिया उद्योग, दुग्ध व्यवसाय, तेलबिया उत्पादन, जल व्यवस्थापन, ऊर्जा निर्मिती, कौशल आधारित लघु उद्योग और स्थानीय रोजगार के अवसर तैयार करने की आवश्यकता है।

उन्होंने देश के खाद्य तेल आयात पर निर्भरता कम करने के लिए शेंगदाणा, तिल, करडई, सूर्यफूल, मोहरी और नारियल जैसे तेलबिया फसलों के उत्पादन तथा स्थानीय प्रक्रिया उद्योगों को बढ़ावा देने की जरूरत बताई।

बागुल ने कहा कि भविष्य में मजबूत राष्ट्र वही होगा जो अपने अन्न, बीज, पानी और ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सक्षम बनाए बिना देश का शाश्वत विकास संभव नहीं है।

उन्होंने कहा, "मोठा पगार, मोठे EMI आणि उत्पन्नाचा एकच स्रोत हा आजच्या काळातील सर्वात मोठा धोका आहे. त्याउलट शेती, विविध उत्पन्नाचे स्रोत, पाणी, जमीन आणि सामाजिक सहकार्य हेच भविष्यातील खरे संरक्षण ठरणार आहे."

अंत में भुषण माधव बागुल ग्राम निष्ठा संघर्ष समिति ने सरकार, ग्राम पंचायतों, सहकारी संस्थाओं, किसानों, युवाओं और स्थानीय उद्यमियों से मिलकर नई ग्रामीण अर्थव्यवस्था खड़ी करने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि "भविष्यातील भारत हा केवळ शहरांवर नव्हे, तर सक्षम आणि स्वयंपूर्ण गावांवर उभा राहील।"

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