तस्वीर में भारतीय राष्ट्रीय किसान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज दुबे नजर आ रहे हैं।

चीनी के बढ़ते दामों के बीच भारतीय राष्ट्रीय किसान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज दुबे ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए गन्ना किसानों को उनकी फसल का उचित लाभकारी मूल्य देने और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर गन्ना और चीनी उत्पादन बढ़ाने, गन्ने का रकबा एवं उत्पादन लगातार घटने पर चिंता जताने तथा महंगी चीनी से होने वाले लाभ का कुछ हिस्सा किसानों को बोनस के रूप में देने की मांग की है।

मनोज दुबे ने कहा कि चीनी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन इसका लाभ गन्ना किसानों को नहीं मिल रहा है। बाजार में खुदरा चीनी की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है, जबकि किसानों को गन्ने का वही पुराना तय सरकारी रेट मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जिस हिसाब से चीनी के दाम बढ़ रहे हैं, उसी अनुपात में गन्ने का भाव भी बढ़ना चाहिए। इससे गन्ना उत्पादक किसानों को लाभ मिलेगा और देश में लगातार घट रही गन्ने की खेती में फिर वृद्धि हो सकती है। उनका कहना है कि गन्ने के भाव में बढ़ोतरी होने पर किसान दोबारा गन्ने की बुआई में भारी बढ़ोतरी करेंगे।

किसान नेता ने कहा, “गन्ना सस्ता, चीनी महंगी तो मुनाफा किसका?” उन्होंने कहा कि चीनी महंगी हो रही है, लेकिन गन्ना किसान की फसल का दाम उसकी लागत और मेहनत के हिसाब से न बढ़ रहा है और न ही बकाया भुगतान हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इथेनॉल नीति का लाभ भी किसानों की जेब तक पहुंचने के बजाय पूंजीपतियों और सरकार के मुनाफे के खेल में फंसा हुआ दिखाई दे रहा है।

मनोज दुबे ने कहा कि किसान का गन्ना सस्ता और चीनी महंगी होने की स्थिति में सवाल उठता है कि इस गणित में मलाई किसकी और मार किस पर पड़ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार इथेनॉल से ऊर्जा आत्मनिर्भरता का जश्न मना रही है, उद्योगपति मुनाफे का हिसाब लगा रहे हैं और किसान अपनी ही फसल के भाव के लिए तरस रहा है। उन्होंने सवाल किया कि जिस किसान के गन्ने से चीनी और इथेनॉल दोनों बन रहे हैं, उसके हिस्से में आखिर घाटा क्यों आ रहा है।

उन्होंने कहा कि चीनी की कीमतों में भारी वृद्धि हो रही है और केवल 2 महीने में ही इसके दाम करीब 40 प्रतिशत बढ़ गए हैं। देश में चीनी के स्टॉक की कमी के कारण अब 10 लाख टन कच्ची चीनी ‘जीरो ड्यूटी’ पर बाहर से आयात करनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि किसान जो गन्ना बेचते हैं, उसका भुगतान उन्हें एक साल तक नहीं किया जाता, तो वे गन्ने की खेती क्यों करेंगे?

मनोज दुबे ने कहा कि गन्ना 400 रुपये क्विंटल बिक रहा है, जबकि चीनी 6500 रुपये क्विंटल के भाव पर है। उन्होंने सवाल किया कि क्या इसी तरह किसानों की आय दोगुनी से आठ गुनी तक होगी। चीनी के दामों में भारी वृद्धि के बाद भी गन्ने के दामों में बढ़ोतरी नहीं होना किसानों के साथ घोर छलावा और भारी कुठाराघात है।

उन्होंने कहा कि भारत पहले चीनी का निर्यात करता था, लेकिन पहली बार चीनी का आयात किया जा रहा है। उनके अनुसार चीनी की मौजूदा कीमतों के पीछे गन्ने की खेती का घटता रकबा, कम उत्पादन, छोटा होता पेराई सत्र और चीनी की जमाखोरी जैसे कई प्रमुख कारण हैं। इसका भारी नुकसान किसान और आमजन दोनों को उठाना पड़ रहा है। चीनी के दामों में भारी बढ़ोतरी से किसानों को कोई लाभ नहीं हुआ, लेकिन कीमतों में वृद्धि के कारण देश की जनता महंगाई की मार झेलने को मजबूर है।

Tags: