ज्ञान के सदुपयोग से दान-धर्म की प्रभावना करें, बोले गणधर मुनि विवर्धनसागर
कोटा के रिद्धि-सिद्धि नगर स्थित चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर में गणधर मुनि विवर्धनसागर जी महाराज के सान्निध्य में चातुर्मासिक आयोजन जारी है। धर्मसभा में ज्ञान के क्षयोपशम और दान-धर्म के महत्व पर संदेश दिया गया।
तस्वीर में कोटा के कुन्हाड़ी स्थित जैन मंदिर में गणधर मुनि श्री 108 विवर्धनसागर जी महाराज के सान्निध्य में श्रद्धालु धार्मिक अनुष्ठान करते हुए नजर आ रहे हैं।
कोटा। रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी स्थित अतिशयकारी श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर में ‘विराग वर्धन वर्षायोग-2026’ के अंतर्गत गणधर मुनि श्री 108 विवर्धनसागर जी महाराज ससंघ (6 पिच्छी) का भव्य चातुर्मासिक मंगल प्रवेश श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के वातावरण में जारी है। समाधिस्थ गणाचार्य श्री 108 विरागसागर जी महाराज के सुशिष्य एवं पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती गणधर मुनि श्री 108 विवर्धनसागर जी महाराज के सान्निध्य में बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्मलाभ ले रहे हैं। आयोजन अतिशयकारी श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर समिति एवं सकल दिगम्बर जैन समाज समिति, रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी के संयुक्त तत्वावधान में हो रहा है।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए गणधर मुनि श्री 108 विवर्धनसागर जी महाराज ने ज्ञान के महत्व और उसके सदुपयोग पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जैन दर्शन में ज्ञान के आठ भेद बताए गए हैं। क्षयोपशमिक ज्ञान और क्षायिक ज्ञान के स्वरूप को समझाते हुए उन्होंने बताया कि मतिज्ञान और श्रुतज्ञान सभी जीवों में पाए जाते हैं, लेकिन प्रत्येक जीव में ज्ञान की क्षमता और उसकी अभिव्यक्ति अलग-अलग होती है।
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को कोई बात एक बार पढ़ने या सुनने से याद हो जाती है, जबकि किसी अन्य को उसी बात को कई बार दोहराने के बाद भी स्मरण करने में कठिनाई होती है। ज्ञान की क्षमता में यह अंतर कर्मों के क्षयोपशम के कारण होता है।
गणधर मुनि ने कहा कि मनुष्य जीवन के साथ प्राप्त ज्ञान का वास्तविक सदुपयोग तभी है, जब उसका उपयोग दान, धर्म और जिनवाणी की प्रभावना में किया जाए। दान करते समय संकोच नहीं करना चाहिए तथा खुले मन से धर्म और सेवा के कार्यों में सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दान की भावना जितनी निर्मल और उदार होगी, उसका आध्यात्मिक फल भी उतना ही व्यापक होगा।
कार्यक्रम में सकल दिगम्बर जैन समाज के संरक्षक राजमल पाटौदी, विमल जैन नांता, अध्यक्ष प्रकाश बज, कार्यध्यक्ष जे.के. जैन, महामंत्री पदम बड़ला, मंदिर अध्यक्ष राजेन्द्र गोधा, मंत्री पंकज खटोड़, ताराचंद बड़ला, टीकम पाटनी, महेंद्र सामरिया, सुरेश देईवाले, पारस कासलीवाल, पारस लुहाड़िया, नरेंद्र सेठिया सहित गुरु सेवा संघ परिवार व चंद्रप्रभु दिगम्बर नवयुवक मंडल के सदस्य उपस्थित रहे।