कोटा: अनंत चतुर्दशी पर पद्मप्रभु जैन मंदिर से निकली श्रीजी की शोभायात्रा
दशलक्षण पर्व के समापन पर भगवान वासुपूज्य का मोक्ष कल्याणक मनाकर श्रद्धालुओं ने निर्वाण लड्डू चढ़ाए और धर्म सभा में ब्रह्मचर्य पर विचार सुने।
कोटा में शोभायात्रा के दौरान सिर पर कलश उठाकर चलतीं जैन समाज की महिलाएं।
कोटा। अनंत चतुर्दशी पर कुन्हाड़ी के बालिता रोड स्थित श्री पद्मप्रभु अग्रवाल दिगंबर जैन मंदिर में धर्म और आस्था का विशेष आयोजन हुआ। भगवान वासुपूज्य के मोक्ष कल्याणक पर श्रद्धालुओं ने निर्वाण लड्डू अर्पित किए। दशलक्षण पर्व के समापन अवसर पर उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना की गई। सुबह शांतिधारा और विशेष पूजन के बाद दोपहर में श्रीजी की शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें महिला, पुरुष और बच्चों सहित बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए।
बाल ब्रह्मचारिणी रेशु दीदी ने प्रवचन में कहा कि भौतिक सुख-सुविधाओं की दौड़ में मनुष्य आत्मशांति से दूर होता जा रहा है। काम, क्रोध, मोह, माया और लोभ जैसे विकार जीवन को अशांत करते हैं। उत्तम ब्रह्मचर्य केवल इंद्रियों के संयम का नाम नहीं, बल्कि विचार, आचरण और दृष्टिकोण की शुद्धता भी इसका हिस्सा है। ध्यान, स्वाध्याय और साधना के माध्यम से मन को नियंत्रित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, “जहां इंद्रियों पर नियंत्रण है, वहां आत्मबल है और आत्मबल से शांति प्राप्त होती है।”
दोपहर में मंदिर से श्रीजी की शोभायात्रा निकाली गई। जैन ध्वज के साथ गाजे-बाजे और भजनों की धुन पर महिला, पुरुष और बच्चे शोभायात्रा में शामिल हुए। शोभायात्रा के बाद श्रीजी का अभिषेक और माला बोली का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में मंदिर कमेटी अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन, बाबूलाल जैन, गणपत लाल जैन, सीए पारस जैन, शंभू जैन, अतुल जैन, राजेश जैन, विजय जैन और लोकेश जैन सहित पद्मप्रभु महिला मंडल की सदस्याएं एवं बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
मंदिर में दशलक्षण पर्व के दौरान प्रतिदिन महाआरती के बाद रेशु दीदी के प्रवचन हुए। इसके साथ प्रश्न मंच आयोजित कर श्रद्धालुओं की धार्मिक जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। भगवान वासुपूज्य के मोक्ष कल्याणक, निर्वाण लड्डू अर्पण और शोभायात्रा के आयोजन के साथ दशलक्षण पर्व का धार्मिक क्रम संपन्न हुआ।