तस्वीर में माहेश्वरी भवन, कोटा में आयोजित श्रद्धांजलि सभा के दौरान वक्ता माइक पर अपने विचार रखते हुए और मंच पर बैठे गणमान्य नागरिक दिखाई दे रहे हैं।

कोटा में राजस्थानी भाषा के सुप्रसिद्ध गीतकार और श्रृंगार रस के सिरमौर कवि ‘गीतऋषि’ दुर्गादान सिंह गौड़ के आकस्मिक निधन पर भारतेंदु हरिश्चंद्र साहित्य समिति, कोटा की ओर से 21 अगस्त को माहेश्वरी भवन में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। साहित्यकारों, कवियों, साहित्यप्रेमियों, गणमान्य नागरिकों तथा विभिन्न सामाजिक और साहित्यिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके साहित्यिक अवदान और रचनाधर्मिता को याद किया।

श्रद्धांजलि सभा में माहेश्वरी समाज के अध्यक्ष राजेश कृष्ण बिरला, भारतेंदु समिति के अध्यक्ष हरिकृष्ण बिरला, पंकज मेहता, राष्ट्रीय कवि जगदीश सोलंकी, महेंद्र नेह, जितेंद्र निर्मोही, रामेश्वर शर्मा, शिवराज सिंह गौड़, कवि के पुत्र निशामुनि गौड़, सिद्धार्थ सिंह, रविंद्र सिंह, इंदु सिंह, भारतेंदु समिति के महामंत्री सुनील जायसवाल, महेश अजमेरा, सुरेश काबरा, प्रभात सिंघल, अरुण भार्गव, मुकुट मणिराज, भगवती प्रसाद गौतम, चैनसिंह राठौड़, अशोक माहेश्वरी, रविन्द्र त्यागी सहित अनेक साहित्यकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे और अपने उद्गार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन नहुष व्यास ने किया। कार्यक्रम की सह संयोजक संस्था रंगीतिका रही।

माहेश्वरी समाज के अध्यक्ष राजेश कृष्ण बिरला ने कहा कि दुर्गादान सिंह गौड़ का निधन राजस्थान के गीत-साहित्य के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि कॉलेज जीवन से ही उनका कवि गौड़ से आत्मीय संपर्क रहा। उनकी रचनाओं में राजस्थान की माटी, संवेदना और जीवन के विविध रंगों की गहरी अभिव्यक्ति दिखाई देती थी।

सभा में वक्ताओं ने कहा कि दुर्गादान सिंह गौड़ की कविताओं और गीतों में श्रृंगार की आदर्श स्थिति के साथ दर्द, दर्शन और मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता था। भाव और शिल्प-सौंदर्य के साथ भावानुकूल लय एवं धुनों ने उन्हें राजस्थान के गीतकारों में विशिष्ट और सर्वोच्च स्थान दिलाया।

राष्ट्रीय कवि जगदीश सोलंकी ने दुर्गादान सिंह गौड़ के व्यक्तित्व, साहित्यिक यात्रा और रचनात्मक विशेषताओं को याद करते हुए उनकी कविताओं से जुड़े अनेक प्रसंग साझा किए। उन्होंने कहा कि गौड़ की रचनाओं की सहजता, भावप्रवणता और गीतात्मकता उन्हें विशिष्ट बनाती थी।

श्रद्धांजलि सभा में कोटा दशहरा मेले के दौरान कवि दुर्गादान सिंह गौड़ की स्मृति में स्थायी साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने का विचार भी सामने आया। उनके पुत्र निशामुनि गौड़ ने कहा कि वे अपने पिता की अधूरी साहित्यिक कृतियों को पूरा करने का प्रयास करेंगे।

अंत में भारतेंदु समिति के महामंत्री सुनील जायसवाल ने सभी उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया। सभा में उपस्थित साहित्यकारों और गणमान्य नागरिकों ने दुर्गादान सिंह गौड़ की साहित्यिक साधना, रचनात्मक योगदान और राजस्थानी गीत-साहित्य में उनके स्थान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

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