गगनबावड़ा के डॉ. ग. गो. जाधव कॉलेज में कलाम जयंती पर प्रतिमा पूजन करते शिक्षक व छात्र।

महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के गगनबावड़ा स्थित पद्मश्री डॉ. ग. गो. जाधव महाविद्यालय में 15 अक्टूबर 2026 को डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम की जयंती और वाचन प्रेरणा दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। राष्ट्रीय सेवा योजना विभाग, ग्रंथालय विभाग और मराठी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में सामूहिक पुस्तक वाचन, पुस्तक प्रदर्शनी और ‘वंदे मातरम्’ के समूहगान के माध्यम से विद्यार्थियों को पठन संस्कृति के महत्व से परिचित कराया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम और डॉ. एस. आर. रंगनाथन की प्रतिमाओं के पूजन से हुई। वंदे मातरम् गीत के शतकोत्तर स्वर्ण महोत्सव के अवसर पर सा. विवेक प्रकाशन की पुस्तक ‘समग्र वंदे मातरम्, खंड एक : इतिहास’ के अंशों का वाचन किया गया। इस पुस्तक का लेखन और शोध मिलिंद सबनीस ने किया है। पुस्तक में शामिल ‘कहानी वंदे मातरम् ची’ लेख के अंशों का वाचन महाविद्यालय की ग्रंथपाल एवं राष्ट्रीय सेवा योजना की परियोजना अधिकारी वंदना पाटील ने किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. टी. एम. पाटील ने कहा कि पठन की प्रेरणा और संस्कृति का विकास निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। ज्ञानसंपन्न और सूचनासमृद्ध समाज के निर्माण के साथ व्यक्तित्व विकास, साहित्य के विकास और भाषा के विकास के लिए पठन संस्कृति का विस्तार और संरक्षण आवश्यक है।

इसके बाद उपस्थित लोगों ने ‘संपूर्ण वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया। वाचन प्रेरणा दिवस के अवसर पर ग्रंथालय विभाग की ओर से सामूहिक पुस्तक वाचन का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों में पढ़ने की रुचि विकसित करने और उन्हें विभिन्न विषयों की पुस्तकों से परिचित कराने के उद्देश्य से पुस्तक प्रदर्शनी भी लगाई गई।

कार्यक्रम का प्रास्ताविक और स्वागत ग्रंथपाल वंदना पाटील ने किया। संचालन प्रा. डी. बी. भोसले ने किया, जबकि आभार प्रा. ए. आर. गावकर ने व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रा. कुंभार, प्रा. हुसेन, प्रा. पडवळ, शिक्षकेतर कर्मचारी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के आयोजन के लिए संस्था के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. सतीश देसाई और संस्था सचिव डॉ. विद्या देसाई का मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिला। सामूहिक पुस्तक वाचन, पुस्तक प्रदर्शनी और ‘वंदे मातरम्’ के समूहगान के माध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों के बीच पठन संस्कृति के विस्तार और संवर्धन पर जोर दिया गया।

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