करौली में मातृ-शिशु स्वास्थ्य दिवस पर गर्भवतियों की जांच और टीकाकरण पर जोर
करौली में 15 अक्टूबर को मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस के तहत गर्भवती महिलाओं और बच्चों को जांच, टीकाकरण व पोषण सेवाएं दी गईं। अधिकारियों ने एमसीएचएन सत्रों का निरीक्षण कर उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान और सुरक्षित मातृत्व से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा की।
करौली जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस के तहत स्वास्थ्य केंद्र में गर्भवती महिला की जांच करते स्वास्थ्यकर्मी।
करौली में गुरुवार, 15 अक्टूबर को मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस के तहत गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, शिशुओं और बच्चों को स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। इस दौरान गर्भावस्था की जांच, टीकाकरण, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान और सुरक्षित मातृत्व से जुड़ी सेवाओं का जिला एवं ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों ने निरीक्षण किया।
सीएमएचओ डॉ. सतीश चंद मीणा ने बताया कि गढ़ी का गांव, भूरे का पुरा, सीएचसी मासलपुर और खेड़िया में आयोजित मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य एवं पोषण (एमसीएचएन) सत्रों के निरीक्षण के दौरान लाभार्थियों को मिल रही सेवाओं की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने आवश्यक दवाओं एवं जांचों की उपलब्धता, टीकाकरण, अभिलेख संधारण और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता का आकलन किया। इस दौरान लाभार्थियों से संवाद कर उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी भी ली गई।
सत्रों में गर्भवती महिलाओं के प्रसवपूर्व देखभाल (एएनसी) के तहत गर्भावस्था का पंजीकरण, रक्तचाप और वजन की जांच, हीमोग्लोबिन, रक्त शर्करा तथा मूत्र की आवश्यक जांच कराई गई। इसके साथ ही रक्त समूह और अन्य निर्धारित प्रयोगशाला जांच की व्यवस्था की गई। उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की समय पर पहचान कर आवश्यकतानुसार उच्च स्वास्थ्य संस्थान में रेफर करने पर भी जोर दिया गया।
गर्भवती महिलाओं को टिटनेस-डिप्थीरिया (टीडी) का टीका लगाने के साथ आयरन-फोलिक एसिड और कैल्शियम की दवाएं वितरित की गईं। महिलाओं को इन दवाओं के नियमित सेवन के संबंध में परामर्श भी दिया गया, ताकि गर्भावस्था के दौरान आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें।
जिला कार्यक्रम अधिकारी आशुतोष पांडे ने गर्भवती महिलाओं को संतुलित एवं पौष्टिक आहार, व्यक्तिगत स्वच्छता और गर्भावस्था के दौरान दिखाई देने वाले खतरे के लक्षणों की पहचान के बारे में जानकारी दी। उन्होंने समय पर संस्थागत प्रसव कराने, जन्म की तैयारी करने और नवजात शिशु की उचित देखभाल के महत्व पर भी परामर्श दिया।
इसके अलावा, जन्म के एक घंटे के भीतर नवजात को स्तनपान शुरू कराने, छह माह तक केवल मां का दूध पिलाने, प्रसव के बाद देखभाल और परिवार नियोजन से संबंधित जानकारी दी गई। इन गतिविधियों का उद्देश्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता को बेहतर बनाना रहा।
निरीक्षण के दौरान पीएचसी भांकरी और खेड़िया के भवन निर्माण कार्यों का भी अवलोकन किया गया। जिले में आयोजित इस अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, टीकाकरण, जोखिमपूर्ण गर्भावस्था की पहचान और सुरक्षित मातृत्व से जुड़ी सेवाओं की समीक्षा की गई।