तस्वीर में उद्योग भवन, जयपुर स्थित राजीविका कार्यालय में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारी और प्रतिभागी नजर आ रहे हैं.   

जयपुर, 1 अक्टूबर। ग्रामीण महिलाओं को आजीविका के अवसरों से जोड़ने और स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए राजीविका की ओर से प्रदेशभर में संचालित पहलों की समीक्षा की गई। वित्तीय सहायता, कौशल विकास, बाजार संपर्क और डिजिटल माध्यमों से जुड़ाव के जरिए महिलाओं की आय एवं उद्यमिता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

इसी क्रम में गुरुवार को उद्योग भवन स्थित राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) में मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित हुई। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी 41 जिलों के जिला परियोजना प्रबंधकों के साथ स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी लगभग 2 हजार लखपति दीदियों ने बैठक में सहभागिता की।

मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के ‘विकसित राजस्थान-2047’ के विजन को साकार करने में प्रदेश की महिला शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं आर्थिक गतिविधियों से जुड़कर अपनी आय बढ़ा रही हैं और ‘लखपति दीदी’ बनकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि राजीविका की ओर से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ उनके उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके लिए मोटिवेशनल हब, मार्केटिंग हब एवं इनोवेशन हब जैसी पहलें विकसित की जा रही हैं। प्रत्येक जिले में यंग प्रोफेशनल्स के माध्यम से नवाचार एवं नए अवसरों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

मुख्य सचिव ने कहा कि डिजिटल दौर में स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने में सोशल मीडिया महत्वपूर्ण माध्यम है। राजीविका द्वारा फेसबुक, इंस्टाग्राम एवं यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से महिलाओं के उत्पादों और उनकी सफलता की कहानियों का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। उन्होंने इस कार्य को और प्रभावी बनाने तथा तकनीक के अधिकतम उपयोग के निर्देश दिए।

बैठक के दौरान विभिन्न जिलों से जुड़ी लखपति एवं मिलियनेयर दीदियों ने अपने अनुभव साझा किए। भीलवाड़ा से श्रीमती सुमन व्यास, श्रीगंगानगर से सिमरन एवं गगनदीप कौर, झालावाड़ से सोनी मीना तथा चूरू से सुमन देवी ने स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद आय में हुई वृद्धि, स्वरोजगार तथा आत्मनिर्भरता की अपनी सफलता की कहानियां साझा कीं।

मुख्य सचिव ने कहा कि इन महिलाओं की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि ग्रामीण राजस्थान में बदलते आर्थिक परिदृश्य और महिला नेतृत्व का उदाहरण है। उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसी प्रेरक सफलता की कहानियों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाए, ताकि अन्य महिलाएं भी स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनने के लिए प्रेरित हों।

राज्य सरकार की महिला सशक्तिकरण नीति के अनुरूप मुख्य सचिव ने सिटिजन-सेंट्रिक अप्रोच के तहत कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की आवश्यकताओं, उनके अनुभवों और जमीनी स्तर पर आने वाली समस्याओं को ध्यान में रखते हुए योजनाओं एवं सेवाओं को अधिक सरल और प्रभावी बनाने पर जोर दिया।

उन्होंने राजस्थान महिला निधि से संबंधित बैंकिंग प्रक्रियाओं, ऋण की अवधि तथा पुनर्भुगतान प्रणाली की भी समीक्षा की। महिलाओं को ऋण प्राप्त करने में सुगमता तथा समयबद्ध बैंकिंग सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी प्रदान किए गए।

बैठक में शासन सचिव, ग्रामीण विकास विभाग श्री कृष्ण कुणाल, राजीविका की राज्य मिशन निदेशक श्रीमती प्रियंका गोस्वामी, परियोजना निदेशक (प्रशासन) श्रीमती प्रीति सिंह सहित राजीविका के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। भारतीय स्टेट बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एसएलबीसी एवं RSETI के प्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की। राजीविका की पहल में नवाचार, तकनीक, बाजार संपर्क और बैंकिंग सुविधाओं के समन्वय को ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण प्रक्रिया से जोड़ा गया।

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