महिला उद्यमी को राजीविका दिवाली मेला समापन समारोह में अधिकारी सम्मानित करते हुए।

जयपुर, 4 नवंबर। ग्रामीण महिला उद्यमियों के हुनर, पारंपरिक हस्तशिल्प और राजस्थानी संस्कृति की झलक पेश करने वाला आठ दिवसीय राजीविका दिवाली मेला-2026 यादगार पलों के साथ संपन्न हो गया। अंतिम दिन मेले में खरीदारों और फूड लवर्स की भारी भीड़ उमड़ी। लोगों ने महिला उद्यमियों के उत्पादों की जमकर खरीदारी की और राजस्थानी व्यंजनों का स्वाद लिया। राजस्थानी थाली और पारंपरिक जायकों ने आगंतुकों का दिल जीता, वहीं पपेट शो ने बच्चों से लेकर बड़ों तक का मनोरंजन किया और खूब तालियां बटोरीं।

राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद् (राजीविका) की ओर से इंदिरा गांधी पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास संस्थान (आईजीपीआरएस) परिसर में आयोजित इस मेले के आठों दिन ग्रामीण महिला उद्यमियों को आगंतुकों का भरपूर समर्थन मिला। मेले में 100 से अधिक स्वयं सहायता समूहों की महिला उद्यमियों ने अपने उत्पादों के जरिए ग्रामीण राजस्थान की कला, संस्कृति और पारंपरिक हुनर का प्रदर्शन किया। रात की रोशनी में जगमगाता मेला परिसर भी आगंतुकों के आकर्षण का केंद्र बना रहा।

मेले के समापन अवसर पर राजीविका की परियोजना निदेशक (प्रशासन) श्रीमती प्रीति सिंह ने प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने बिक्री और प्रदर्शन के आधार पर शीर्ष तीन दीदियों को अवार्ड प्रदान कर उनका उत्साह बढ़ाया।

मेले में हस्तनिर्मित अचार-पापड़, पारंपरिक खाद्य सामग्री, लेदर की जूतियां, सजावटी वस्तुएं और घरेलू उपयोग के उत्पादों की अच्छी मांग रही। फूड स्टॉल्स पर राजस्थानी थाली के साथ विभिन्न पारंपरिक व्यंजनों और स्थानीय जायकों का स्वाद लेने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। महिला उद्यमियों के उत्पादों को ग्राहकों की पसंद और समर्थन मिला।

राजस्थान की विश्वविख्यात कोटा डोरिया साड़ियों और परिधानों ने मेले में विशेष आकर्षण बटोरा। अजरख प्रिंट, मोडाल सिल्क और बगरू प्रिंट के कपड़ों को भी आगंतुकों ने खूब पसंद किया। पारंपरिक बंधेज की साड़ियों और सूट की भी अच्छी मांग रही। इन उत्पादों के माध्यम से महिला उद्यमियों ने राजस्थान की समृद्ध वस्त्र परंपरा और हस्तशिल्प कला को प्रदर्शित किया।

दीपावली की सजावटी सामग्री के साथ टेराकोटा, मीनाकारी और कशीदाकारी के हस्तनिर्मित उत्पाद भी खरीदारों की पसंद बने। जयपुर की प्रसिद्ध ब्लू पॉटरी और सवाई माधोपुर की विशिष्ट ब्लैक पॉटरी ने अपनी अनूठी कलाकारी और आकर्षक डिजाइन से लोगों का ध्यान खींचा। पारंपरिक हस्तशिल्प के अलावा घर की सजावट और दैनिक उपयोग से जुड़े उत्पादों की भी अच्छी बिक्री हुई।

आठ दिवसीय मेले के दौरान आयोजित पपेट शो ने बच्चों और बड़ों का मनोरंजन किया तथा दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। पारंपरिक कला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आयोजन को जीवंत बनाए रखा। इस आयोजन ने ग्रामीण महिला उद्यमियों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री के लिए मंच उपलब्ध कराने के साथ सीधे ग्राहकों से जुड़ने और अपने हुनर को व्यापक पहचान दिलाने का अवसर भी दिया।

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