कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत सचिवालय सभागार में अधिकारियों के साथ पशुधन योजनाओं की समीक्षा बैठक करते दिख रहे हैं।

राजस्थान में पशुपालन और पशुधन के स्वास्थ्य संरक्षण को लेकर संचालित योजनाओं की प्रगति के बीच अब तक 44 लाख से अधिक पशुओं का पंजीकरण हो चुका है। पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने बुधवार, 04 नवंबर को शासन सचिवालय में विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक लेकर विभिन्न योजनाओं की स्थिति की जानकारी ली और अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए।

मोबाइल वेटनरी योजना की समीक्षा के दौरान मंत्री जोराराम कुमावत ने बताया कि योजना के तहत अब तक 19 लाख 49 हजार पशुपालकों के 68 लाख 33 हजार पशुधनों का निःशुल्क उपचार किया जा चुका है। इनमें से 16 लाख 80 हजार पशुधन को '1962' टोल-फ्री नंबर पर प्राप्त कॉल के आधार पर मोबाइल वेटनरी यूनिट के माध्यम से घर बैठे उपचार की सुविधा मिली है। योजना के लाभार्थियों से मिले फीडबैक में 98 प्रतिशत लोगों ने सेवाओं को अच्छा बताया है।

मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना की प्रगति की जानकारी देते हुए मंत्री ने बताया कि 02 नवंबर 2026 तक प्रदेश में कुल 44 लाख 08 हजार 174 पशुओं का पंजीकरण किया जा चुका है। इनमें से 30 लाख 29 हजार 639 पशुओं के स्वास्थ्य प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं, जबकि 27 लाख 56 हजार 103 पशुओं की बीमा पॉलिसी जारी हो चुकी है। उन्होंने वर्ष 2026-27 के निर्धारित लक्ष्यों को जल्द पूरा करने, लंबित बीमा दावों का तत्काल भुगतान करने और लापरवाही बरतने वाले संयुक्त निदेशकों को चार्जशीट देने के निर्देश दिए।

सेक्स सोर्टेड सीमन योजना के तहत कृत्रिम गर्भाधान (AI) की समीक्षा करते हुए जोराराम कुमावत ने कहा कि प्रदेश को दुग्ध उत्पादन में अव्वल बनाने के उद्देश्य से गायों और भैंसों में कृत्रिम गर्भाधान की प्रक्रिया तेजी से बढ़ाई जा रही है। विगत दो वर्षों में 10 लाख 57 हजार पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान किया जा चुका है। आगामी वर्ष के लिए 9 लाख डोजेज खरीदने के निर्देश भी दिए गए हैं।

बैठक में अकालग्रस्त क्षेत्रों में पशुपालकों को राहत उपलब्ध कराने के उपायों पर भी चर्चा हुई। मंत्री ने बताया कि कम बारिश के कारण जोधपुर और उदयपुर संभाग के अकालग्रस्त घोषित जिलों में चारा डिपो खोलकर पशुपालकों को चारा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही नाबार्ड या अन्य योजनाओं के बजट से पशु चिकित्सा उप केंद्रों के नए भवनों का निर्माण कराने के संबंध में भी विस्तृत चर्चा की गई।

समीक्षा बैठक में पशुपालन विभाग के डायरेक्टर डॉ. सुरेशचंद मीणा, आरएलडीबी के मैनेजर डॉ. प्रीतपाल कालरा, अतिरिक्त निदेशक श्री हेमंत पंत, नोडल एमवीयू डॉ. प्रदीप शर्मा और नोडल हेल्थ डॉ. आलोक श्रीवास्तव सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में पशुधन उपचार, बीमा कवरेज, कृत्रिम गर्भाधान और अकाल प्रभावित क्षेत्रों में चारे की उपलब्धता से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा के साथ उनके प्रभावी क्रियान्वयन और निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने पर जोर दिया गया।

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