अक्टूबर के KPI मूल्यांकन में सहकारिता विभाग की समीक्षा, अधिकारियों को समयबद्ध लक्ष्य पूरे करने के निर्देश
सहकारिता विभाग के कार्यों में पारदर्शिता और समयबद्धता बढ़ाने के लिए डॉ. समित शर्मा ने अक्टूबर-2026 के KPI मूल्यांकन की समीक्षा की।
जयपुर में सहकारिता विभाग बोर्ड के नीचे बैठकर अधिकारियों संग KPI बैठक की अध्यक्षता करते डॉ. समित शर्मा।
जयपुर में शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार, सहकारिता डॉ. समित शर्मा ने अक्टूबर-2026 के KPI मूल्यांकन के तहत जिला इकाई रजिस्ट्रार कार्यालयों और ब्लॉक सहकारिता निरीक्षकों के कार्यों की समीक्षा की। बैठक में विभागीय योजनाओं की प्रगति से लेकर सहकारी समितियों के गठन, लंबित प्रकरणों के निस्तारण और प्रशासनिक कार्यप्रणाली तक का मूल्यांकन किया गया। उन्होंने अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्यों की समयबद्ध प्राप्ति और लंबित कार्यों के प्राथमिकता से निस्तारण के निर्देश दिए।
04 नवम्बर को आयोजित बैठक में विभिन्न विभागीय कार्यों की प्रगति का Key Performance Indicators (KPI) के आधार पर आकलन किया गया। डॉ. समित शर्मा ने कहा कि मासिक KPI मूल्यांकन का उद्देश्य विभागीय कार्यों में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व, समयबद्धता और गुणवत्तापूर्ण कार्य संस्कृति को बढ़ावा देना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप काम करने तथा लंबित प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में विश्व की सबसे बड़ी अन्न भण्डारण योजना के अंतर्गत क्रय-विक्रय सहकारी समितियों में गोदाम निर्माण और उनके उपयोग की स्थिति की समीक्षा की गई। इसके साथ ही कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) की स्थापना और उनका न्यूनतम 300 घंटे वार्षिक उपयोग सुनिश्चित करने, पैक्स विहीन ग्राम पंचायतों में पैक्स समितियों के गठन तथा E-PACS प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रगति पर भी चर्चा हुई।
अधिकारियों के साथ निष्क्रिय पैक्स एवं डेयरी सहकारी समितियों के पुनर्जीवन, नवीन डेयरी सहकारी समितियों के गठन और NAFED, NCCF एवं NCDC जैसी बहुराज्यीय सहकारी संस्थाओं की सदस्यता एवं व्यावसायिक गतिविधियों की स्थिति का भी आकलन किया गया। इसके अलावा रहन ऋण योजना और एक जिला एक उत्पाद (ODOP) के क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा की गई।
बैठक में सहकारी समितियों एवं क्रीड़ा संघों के पंजीकरण और नवीनीकरण से जुड़े लंबित प्रकरणों पर भी ध्यान दिया गया। सहकारी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत प्रकरणों के निस्तारण, आमसभाओं के आयोजन तथा नवगठित पैक्स की आस्तियों एवं दायित्वों के विभाजन की स्थिति की समीक्षा की गई। वहीं, राजकाज ई-फाइल के माध्यम से पत्रावलियों और डाक के निस्तारण की प्रगति को भी KPI मूल्यांकन का हिस्सा बनाया गया।
डॉ. समित शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभागीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हुए सभी लंबित कार्य निर्धारित समयावधि में पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि नियमित KPI मूल्यांकन से कार्य निष्पादन में सुधार होगा, अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ेगी और सहकारी संस्थाओं को अधिक सुदृढ़ बनाने में मदद मिलेगी।