राजस्थान पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर स्लेवरी गिरोह का किया भंडाफोड़, 5 आरोपी गिरफ्तार

राजस्थान पुलिस की स्टेट साइबर क्राइम थाना पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर स्लेवरी और मानव तस्करी से जुड़े बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में विदेशों में संचालित साइबर स्कैम सेंटर, फर्जी निवेश, क्रिप्टो फ्रॉड और भारतीय युवाओं को जाल में फंसाने वाले नेटवर्क से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आए हैं।

Update: 2026-08-04 06:43 GMT

तस्वीर में राजस्थान पुलिस द्वारा अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी और मानव तस्करी मामले में गिरफ्तार किए गए पांच आरोपी नजर आ रहे हैं।

जयपुर, 03 अगस्त। राजस्थान पुलिस की स्टेट साइबर क्राइम थाना पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी और मानव तस्करी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह युवाओं को विदेश में 800 से 1000 अमेरिकी डॉलर प्रतिमाह वेतन का लालच देकर कंबोडिया, वियतनाम, म्यांमार और लाओस भेजता था, जहां उनके पासपोर्ट छीनकर उन्हें डिजिटल अरेस्ट, फर्जी इन्वेस्टमेंट और क्रिप्टो फ्रॉड जैसे साइबर अपराध करने के लिए मजबूर किया जाता था।

यह कार्रवाई महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर चलाए जा रहे साइबर अपराध विरोधी अभियान के तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) से प्राप्त सूचना और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर की गई।

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम श्री विजय कुमार सिंह ने बताया कि I4C के डाटा विश्लेषण में राजस्थान के 500 से अधिक लोगों की पहचान हुई है, जिन्हें कंबोडिया, वियतनाम, म्यांमार और लाओस के साइबर स्कैम सेंटरों में भेजा गया था। इनमें से कई अब तक भारत नहीं लौटे हैं। भारत लौटे पीड़ितों ने खुलासा किया कि वहां उनके साथ मारपीट, मानसिक प्रताड़ना की जाती थी और उन्हें जबरन साइबर ठगी करने के लिए मजबूर किया जाता था।

जांच के दौरान पुलिस ने ब्यावर निवासी राजकरण उर्फ रॉनी (ROXX) और सागर सिंह को गिरफ्तार किया। इनके मोबाइल फोन, पासपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों की जांच में विदेशी हैंडलर्स, वीपीएन, बायनेन्स (Binance), फर्जी जीपीएस तथा अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिले।

इन दोनों से पूछताछ के बाद पुलिस ने ब्यावर निवासी जीतूराज उर्फ जेम्स, रवि कुमार उर्फ माही और अनिल कुमार उर्फ डेविल को कोलकाता से गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार तीनों आरोपी टूरिस्ट वीजा पर म्यांमार जाने की तैयारी में थे।

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि साइबर स्कैम सेंटरों में पहले उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जाता था। इसके बाद फर्जी प्रोफाइल बनाकर भारतीय नागरिकों से सोशल मीडिया के माध्यम से दोस्ती की जाती थी, उनका विश्वास जीतने के बाद उन्हें क्रिप्टोकरेंसी और निवेश पर भारी मुनाफे का लालच देकर लाखों रुपये निवेश करवाए जाते थे। ठगी से प्राप्त रकम म्यूल खातों के जरिए निकालकर क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित कर चीन और कंबोडिया में बैठे हैंडलर्स तक पहुंचाई जाती थी।

जांच में यह भी सामने आया कि विदेश पहुंचते ही युवाओं के पासपोर्ट और पहचान पत्र जब्त कर लिए जाते थे। उनसे प्रतिदिन सुबह 9 बजे से रात 11:30 बजे तक काम कराया जाता था। यदि कोई काम छोड़ने का प्रयास करता था तो उसे हजारों डॉलर जुर्माने और मारपीट की धमकी दी जाती थी।

पुलिस जांच के अनुसार राजकरण उर्फ रॉनी (ROXX) कंबोडिया के पोइपेट स्थित स्कैम कंपाउंड में मुख्य रूप से एचआर की भूमिका निभाता था, जहां बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों से प्रतिदिन सुबह 9:00 बजे से रात 11:30 बजे तक जबरन साइबर ठगी करवाई जाती थी। चार महीने बाद भारत लौटने पर उसने ब्यावर के कई युवाओं को 800 डॉलर प्रतिमाह वेतन का लालच देकर कंबोडिया भेजा, जिसके बदले उसे भारी कमीशन मिलता था।

सागर सिंह पोइपेट (कंबोडिया) में भारतीय नागरिकों की फेसबुक पर फर्जी महिला प्रोफाइल बनाकर उनसे दोस्ती करता था। वह 5 से 7 दिनों तक सामान्य बातचीत के जरिए पीड़ितों के परिवार, बैंक खाते की जानकारी, बिजनेस प्रोफाइल और वित्तीय स्थिति से जुड़ी गोपनीय जानकारी जुटाता था। इसके बाद वह संभावित शिकार को अपने टीम लीडर के हवाले कर देता था, जो क्रिप्टो निवेश की फर्जी योजनाओं के नाम पर म्यूल खातों में धन ट्रांसफर करवाते थे।

जीतूराज फुलवारी उर्फ जेम्स के नाम से क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज बायनेन्स पर खाता संचालित था, जिसके माध्यम से वह यूएसडीटी क्रिप्टो के जरिए कंबोडिया में सक्रिय नेटवर्क सदस्यों को धन भेजता था। वह भारत से फर्जी म्यूल खाते और भारतीय मोबाइल नंबरों के सिम कार्ड साइबर सेंटरों तक पहुंचाने में भी संलिप्त था। जांच में यह भी सामने आया कि उसने लगभग 10 भारतीय युवाओं के पासपोर्ट और व्यक्तिगत दस्तावेज चीनी हैंडलर्स को उपलब्ध कराए, ताकि उन्हें कंबोडिया के स्कैम सेंटरों में शामिल कराया जा सके।

रवि कुमार उर्फ माही वर्ष 2023 से कंबोडिया स्थित स्कैम कंपाउंड्स में सक्रिय था। वहां वह पीड़ितों को फर्जी फेसबुक प्रोफाइल के जरिए भारतीय नागरिकों को फंसाने का प्रशिक्षण देता था। लंबे समय तक कंबोडिया में साइबर ठगी से जुड़े रहने के बाद वह चीनी हैंडलर्स के संपर्क में आया और कोलकाता के रास्ते म्यांमार के नए साइबर स्कैम सेंटर में शिफ्ट होने जा रहा था।

अनिल कुमार उर्फ डेविल, जो जीतूराज उर्फ जेम्स का भाई है, वर्ष 2024 में कंबोडिया गया था और करीब एक वर्ष तक स्कैम सेंटर में सक्रिय रूप से साइबर अपराधों का संचालन करता रहा। उसे चीनी कंस्ट्रक्शन कंपनी में 'कंस्ट्रक्शन सुपरवाइजर' के छद्म रोल पर म्यांमार के यानचिया (Yanchia Township) स्थित स्कैम सेंटर भेजा जा रहा था, लेकिन पुलिस ने उसे म्यांमार की उड़ान भरने से ठीक पहले कोलकाता से गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से पासपोर्ट, विदेशी वीजा दस्तावेज, मोबाइल फोन, डिजिटल साक्ष्य और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड जब्त किए हैं। पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की कड़ियों की जांच की जा रही है और अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

इस कार्रवाई में एसपी साइबर क्राइम सुमित मेहरड़ा के सुपरविजन तथा डीएसपी/थानाधिकारी गजेंद्र शर्मा के नेतृत्व में गठित टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीम में इंस्पेक्टर नीरज कुमार, एएसआई राकेश कुमार सामोता, हेड कांस्टेबल अशोक कुमार, दौलतराम, कांस्टेबल सुभाष कुमार तथा कांस्टेबल चालक सूबे सिंह शामिल थे।

राजस्थान पुलिस ने आमजन से अपील की है कि विदेश में नौकरी के नाम पर मिलने वाले आकर्षक प्रस्तावों पर बिना सत्यापन विश्वास न करें। किसी भी साइबर धोखाधड़ी या संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर दें तथा निकटतम पुलिस थाने से संपर्क करें।

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