तस्वीर में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे मंच से संबोधित करते हुए नजर आ रहे हैं।

राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने जल संचयन की विकसित हुई अतीत की परम्पराओं से सीख लेते हुए जल बचाने के लिए प्रभावी प्रयास किए जाने का आह्वान किया। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन के संरक्षण का कार्य धरती पर किसी ने किया है तो वह आदिवासी समुदाय है। उन्होंने जल संरक्षण को भारत की ज्ञान परम्परा से जुड़ा विषय बताते हुए वर्षाजल संग्रहण की प्राचीन वैज्ञानिक विधाओं का उल्लेख किया।

राज्यपाल रविवार को आदिवासी दिवस पर ग्रामीण विकास एवं शोध परिषद द्वारा आयोजित "जल संचयन" संकल्प कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कार्यक्रम में जल संचयन की शपथ भी दिलाई। इस अवसर पर उन्होंने पूर्व मंत्री प्रो. सांवर लाल जाट के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। धरती आबा बिरसा मुंडा को स्मरण करते हुए राज्यपाल ने जल संचयन के लिए वातावरण निर्माण पर विशेष रूप से जोर दिया।

श्री बागडे ने कहा कि प्राचीन काल से ही जल संरक्षण हमारे यहां की ज्ञान परम्परा का हिस्सा रहा है। उन्होंने चौथी शताब्दी की पुस्तक "कृषि पाराशर" और महाराणा प्रताप के दरवारी लेखक पंडित चक्रधर मिश्र की "विश्वल्लभ" का उल्लेख करते हुए कहा कि इनमें वर्षाजल संग्रहण के लिए खेतों में छोटे बाँध बनाने के साथ-साथ कुएं, बावड़ियां और तालाब बनाने की वैज्ञानिक विद्या दी गई है।

राज्यपाल ने कहा कि राजस्थान में "जहाँ जल है, वहीं ईश्वर का वास है" की सोच के साथ जल बचाने की परम्पराएं विकसित हुईं। उन्होंने पश्चिमी राजस्थान में जल की एक-एक बूंद के महत्व को दर्शाने वाली कहावत, ‘घी ढुल्याँ म्हारो की नीं जासी। पानी ढुल्याँ म्हारो जी बले।।’ की चर्चा करते हुए कहा कि राजस्थान में पानी को घी से अधिक महत्व दिया गया है।

उन्होंने राजस्थान सरकार द्वारा जल संकट से निपटने और राज्य को जल आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रारम्भ किए गए बड़े अभियान और नीतियों को भविष्य के लिए बहुत कारगर बताया। उन्होंने कहा कि जल स्रोतों को अतिक्रमण मुक्त बनाने, तालाबों, नदियों और बावड़ियों की सफाई तथा पुनर्जीवन के लिए "वंदे गंगा जल संरक्षण-जन अभियान" और "हर घर जल" योजनाओं का उद्देश्य पीने का पानी सब तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि यदि जल की बचत नहीं होगी तो भविष्य के लिए पानी सुरक्षित नहीं रखा जा सकेगा।

राज्यपाल श्री बागडे ने भारत में गहराते जल संकट को लेकर चेताया कि देश की लगभग 60 करोड़ आबादी गंभीर जल संकट का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया की 17 प्रतिशत आबादी का भरण-पोषण करने वाले भारत के पास वैश्विक ताजे पानी का केवल 4 प्रतिशत हिस्सा ही उपलब्ध है, जिससे जल संकट की विकट स्थिति पैदा हो सकती है।

उन्होंने वैश्विक स्तर पर निकाले जाने वाले कुल भूजल का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा अकेले भारत का होने पर भी चिंता जताई। राज्यपाल ने बारिश के दौड़ते पानी को रोकने के लिए अधिक से अधिक प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पानी की बचत ही उसका उत्पादन है। जल संचयन और संरक्षण के लिए प्रभावी प्रयासों के साथ अतीत की परम्पराओं से सीख लेना भविष्य के जल संकट से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।

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