तस्वीर में पंत कृषि भवन, जयपुर में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारी नजर आ रहे हैं।

जयपुर, 24 अगस्त। किसानों को उनकी वास्तविक आवश्यकता के अनुसार समय पर और सुगमता से उर्वरक उपलब्ध कराने के साथ कालाबाजारी, जमाखोरी और अनियमित वितरण पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए राजस्थान सरकार की ओर से शुरू की गई फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल व्यवस्था का चरणबद्ध विस्तार किया जा रहा है। डिजिटल तकनीक आधारित इस व्यवस्था में उर्वरक की मांग, उपलब्धता और वितरण की पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जा रहा है।

फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल की प्रगति और आगामी चरण में अन्य जिलों में इसके क्रियान्वयन की तैयारियों की समीक्षा के लिए सोमवार को पंत कृषि भवन में कृषि आयुक्त श्री नरेश कुमार गोयल की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के अधिकारियों के साथ बैठक हुई। बैठक में जिलावार तैयारियों, उर्वरक की मांग-आपूर्ति, उपलब्ध स्टॉक और डिजिटल व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा की गई।

आयुक्त कृषि श्री नरेश कुमार गोयल ने बताया कि सिरोही और राजसमंद जिलों में फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है। इन दोनों जिलों में अब तक लगभग 78 हजार से अधिक किसानों को 12 हजार मैट्रिक टन से अधिक उर्वरक वितरित किया जा चुका है। पायलट प्रोजेक्ट के दौरान मिले सकारात्मक परिणामों से डिजिटल और किसान-केंद्रित वितरण व्यवस्था की उपयोगिता सामने आई है।

उन्होंने बताया कि सिरोही और राजसमंद में 25 जून से लागू पायलट प्रोजेक्ट के माध्यम से उर्वरक की मांग से लेकर उपलब्धता और वितरण तक की प्रक्रिया की प्रभावी निगरानी संभव हुई। इससे वास्तविक किसानों तक उर्वरक पहुंचाने में मदद मिली और कालाबाजारी, अनावश्यक जमाखोरी, कृत्रिम कमी तथा अनियमित वितरण जैसी गतिविधियों पर नियंत्रण मजबूत हुआ।

पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद मंगलवार से बूंदी, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा, धौलपुर और चूरू जिलों में फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल लागू किया जा रहा है। इसके साथ ही 12 अन्य जिलों में भी जल्द इस व्यवस्था का विस्तार किया जाएगा। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से प्रदेश के सभी जिलों को इस डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।

नई व्यवस्था में किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार घर बैठे उर्वरक की बुकिंग कर सकेंगे। बुकिंग के बाद किसान को 48 घंटे की वैधता वाला टोकन जारी किया जाएगा। इस टोकन के आधार पर किसान अपने नजदीकी अधिकृत उर्वरक विक्रेता से उर्वरक प्राप्त कर सकेगा। निर्धारित 48 घंटे की अवधि में उर्वरक प्राप्त नहीं करने पर किसान को दोबारा बुकिंग करनी होगी। इससे वास्तविक आवश्यकता वाले किसानों को प्राथमिकता मिलने के साथ उर्वरक वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।

फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल के तहत किसान को बुकिंग के बाद उसकी आवश्यकता के अनुरूप नजदीकी अधिकृत विक्रेता से उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा। इससे किसानों को उर्वरक के लिए एक केंद्र से दूसरे केंद्र तक जाने और लंबी कतारों में खड़े रहने की परेशानी से राहत मिलेगी। तकनीक आधारित व्यवस्था में किसान को यह भी पता रहेगा कि उसे उर्वरक कहां और किस प्रक्रिया के तहत प्राप्त करना है। इससे समय और श्रम दोनों की बचत होगी।

डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से उर्वरक की वास्तविक मांग और उपलब्ध स्टॉक के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है। डिजिटल निगरानी से मांग, आपूर्ति और वितरण की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सकेगी। इससे बिचौलियों की भूमिका सीमित होगी, अनावश्यक खरीद पर अंकुश लगेगा और जरूरतमंद किसानों को प्राथमिकता के आधार पर उर्वरक उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। उर्वरक की उपलब्धता और वितरण से संबंधित सूचनाओं के आधार पर प्रशासन को समय पर आवश्यक निर्णय लेने में भी सुविधा होगी।

श्री गोयल ने बताया कि सिरोही और राजसमंद में व्यवस्था लागू करने पर 175 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि प्राप्त हुई है, जबकि पूरे प्रदेश में इसे लागू करने पर 675 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि प्राप्त होगी।

उन्होंने बताया कि कृषि विभाग किसानों को Fertilisers की एलपीजी गैस की तरह होम डिलीवरी देने पर भी गंभीरता से कार्य कर रहा है। इस संबंध में सहकारिता विभाग के साथ प्रारम्भिक चरण की बैठकें हो चुकी हैं।

फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल के व्यापक विस्तार से वास्तविक मांग के अनुरूप उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ कालाबाजारी और जमाखोरी पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

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