उर्वरक के साथ अन्य सामान थमाने पर होगी कार्रवाई, राजस्थान में 250 विक्रेताओं पर एक्शन
किसानों को खाद के साथ अन्य कृषि उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर करने वाले विक्रेताओं पर सख्त कार्रवाई के निर्देश, मोबाइल ऐप के जरिए 9 हजार निरीक्षण।
जयपुर, 26 अक्टूबर। राजस्थान में किसानों को उर्वरकों के साथ जिंक, सल्फर, कीटनाशक और अन्य कृषि उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर करने वाले विक्रेताओं पर अब सख्त कार्रवाई होगी। राज्य सरकार ने उर्वरकों की कालाबाजारी, निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली, जबरन टैगिंग और वितरण में अनियमितताओं के विरुद्ध निगरानी अभियान तेज कर दिया है। कृषि विभाग की ओर से विकसित विशेष मोबाइल ऐप के माध्यम से अब तक प्रदेश में 9 हजार से अधिक कृषि आदान विक्रेताओं का निरीक्षण किया जा चुका है, जबकि विभिन्न अनियमितताओं के मामलों में 250 से अधिक विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
राज्य सरकार कृषि आदानों की गुणवत्ता, उचित मूल्य और पारदर्शी वितरण व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए गंभीरता से काम कर रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसानों का आर्थिक शोषण करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी और उर्वरक वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
कृषि विभाग ने निरीक्षण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जवाबदेह बनाने के लिए विशेष मोबाइल ऐप विकसित किया है। इसके माध्यम से कृषि आदान विक्रेताओं के निरीक्षण को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा गया है। इससे निरीक्षण संबंधी सूचनाओं के संकलन, निगरानी और समीक्षा में सुविधा मिलेगी। इस पहल का उद्देश्य अनियमितताओं की समय पर पहचान कर उनके विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है। विभाग प्रदेशभर में निरीक्षण अभियान लगातार जारी रखेगा।
कृषि आयुक्तालय ने 23 अक्टूबर 2026 को जारी निर्देशों में स्पष्ट किया है कि किसानों को यूरिया, डीएपी अथवा अन्य अनुदानित उर्वरकों के साथ जिंक, सल्फर, कीटनाशक, जैव उर्वरक या अन्य कृषि उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। जबरन टैगिंग के मामलों में केवल खुदरा विक्रेताओं की ही नहीं, बल्कि संबंधित थोक विक्रेताओं तथा उर्वरक निर्माता और आपूर्तिकर्ता कंपनियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।
कृषि विभाग ने निर्देश दिए हैं कि अनियमितताओं की पुष्टि होने पर संबंधित विक्रेताओं और कंपनियों के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के लागू प्रावधानों के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए। प्रकरण की गंभीरता और विधिक प्रावधानों के अनुरूप विक्रय प्राधिकार-पत्र का निलंबन या निरस्तीकरण किया जा सकेगा। आवश्यकतानुसार एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई भी की जाएगी।
उर्वरक वितरण व्यवस्था पर प्रभावी निगरानी के लिए प्रदेश के सभी जिलों में विशेष निरीक्षण दल गठित कर उर्वरक कंपनियों, गोदामों तथा थोक और खुदरा विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों का नियमित एवं औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। निरीक्षण के दौरान उर्वरकों की उपलब्धता, स्टॉक, बिक्री अभिलेखों, बिलों और अन्य कृषि उत्पादों की खरीद-बिक्री से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाएगी।
किसानों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए प्रत्येक जिले में उर्वरक शिकायत प्रकोष्ठ अथवा हेल्पलाइन स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। जबरन टैगिंग और अन्य अनियमितताओं से संबंधित शिकायतों पर 24 घंटे के भीतर प्रारंभिक कार्रवाई शुरू करने तथा उनका समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा गया है।
कृषि विभाग ने निरीक्षण, शिकायतों के निस्तारण और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई में किसी भी तरह की शिथिलता स्वीकार नहीं करने की बात कही है। निर्देशों की अनुपालना में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्धारित कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
राज्य सरकार का उद्देश्य किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उचित मूल्य पर उपलब्ध कराना और उन्हें किसी भी प्रकार के आर्थिक शोषण से बचाना है। मोबाइल ऐप आधारित निरीक्षण व्यवस्था, 9 हजार से अधिक निरीक्षण, 250 से अधिक विक्रेताओं के विरुद्ध कार्रवाई, विशेष निरीक्षण दलों का गठन और जबरन टैगिंग पर प्रतिबंध इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि उर्वरकों की कालाबाजारी, निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली, जबरन टैगिंग अथवा अन्य अनियमितताओं की शिकायत संबंधित जिला कृषि कार्यालय में दर्ज कराएं। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और कृषि आदान वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई का अभियान निरंतर जारी रहेगा।