राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में कला-उत्सव 2026 का आगाज, 12 विश्वविद्यालयों के 350 विद्यार्थी दिखाएंगे प्रतिभा
बांदरसिंदरी स्थित विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय अंतर-विश्वविद्यालयीय सांस्कृतिक महोत्सव में देशभर के 12 विश्वविद्यालयों के लगभग 350 विद्यार्थी ले रहे हैं भाग।
राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के सभागार में कला-उत्सव 2026 के उद्घाटन समारोह के दौरान मंचासीन अतिथियों संग प्रतिभागी खड़े हैं।
राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में दो दिवसीय अंतर-विश्वविद्यालयीय सांस्कृतिक महोत्सव ‘कला-उत्सव 2026’ का सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को शुभारंभ हुआ। बांदरसिंदरी स्थित विश्वविद्यालय में आयोजित इस महोत्सव में देशभर के 12 विश्वविद्यालयों के लगभग 350 विद्यार्थी भाग ले रहे हैं। नृत्य, संगीत, रंगमंच और साहित्यिक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। कुलपति प्रो. आनंद भालेराव के नेतृत्व में आयोजित महोत्सव के उद्घाटन समारोह में नीति आयोग के सदस्य प्रो. गोबर्धन दास मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कला-उत्सव 2026 में केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू, मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNIT), जयपुर, दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर, राजस्थान विश्वविद्यालय और महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर सहित देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी प्रतिभागिता कर रहे हैं। महोत्सव के दौरान चार श्रेणियों में कुल 11 प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। इनमें भारतीय शास्त्रीय नृत्य, लोक नृत्य, पाश्चात्य नृत्य, भारतीय शास्त्रीय संगीत, सुगम गायन, वाद्य संगीत, लोक गायन, लघु नाटिका, मूकाभिनय, प्रश्नोत्तरी और वाद-विवाद प्रतियोगिताएं शामिल हैं।
26 अक्टूबर को आयोजित उद्घाटन समारोह के दौरान प्रतिभागियों ने सांस्कृतिक रैली निकाली। रैली में देश के विभिन्न क्षेत्रों की कला और संस्कृति की झांकियां प्रस्तुत की गईं। इस दौरान अलग-अलग राज्यों के लोक नृत्यों का प्रदर्शन भी हुआ। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय की ओर से विभिन्न लोक कलाओं और नृत्य विधाओं पर आधारित प्रदर्शनी आयोजित की गई।
उद्घाटन समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद भालेराव ने कहा कि विश्वविद्यालय में आयोजित कला-उत्सव केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवा प्रतिभाओं का संगम है। इसके माध्यम से युवाओं की कल्पनाओं को अभिव्यक्ति मिल रही है और चित्रकला, साहित्य तथा अन्य कलात्मक अभिव्यक्तियों के जरिए उनकी रचनात्मकता सामने आएगी।
उन्होंने कहा कि भारत की विशेषता यह है कि यहां कला केवल प्रदर्शन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जीवन दर्शन है। कला और संस्कृति सभी को एक सूत्र में बांधकर रखने का साधन हैं। जब ज्ञान, तर्क, कल्पना और संवेदना एक साथ आते हैं, तब संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास होता है।
वर्तमान युग में तकनीक के माध्यम से कला और संगीत के निर्माण का उल्लेख करते हुए प्रो. भालेराव ने मानवीय कला की विशेषता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य की चेतना, कल्पना, संवेदनशीलता और भावना को मशीन प्रकट नहीं कर सकती। कला और सांस्कृतिक गतिविधियां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अभिन्न अंग हैं।
प्रो. भालेराव ने कहा कि विश्वविद्यालय ऐसा शैक्षणिक वातावरण विकसित करना चाहता है, जहां उत्कृष्ट शिक्षा और अनुसंधान के साथ-साथ उत्कृष्ट सांस्कृतिक वातावरण भी उपलब्ध हो। उनके अनुसार, विश्वविद्यालय की सफलता आत्मविश्वासी, संवेदनशील और जिम्मेदार युवाओं को तैयार करने में निहित है।
उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि नीति आयोग के सदस्य प्रो. गोबर्धन दास ने कहा कि भारत विविधताओं का देश है, जहां विभिन्न भाषाओं, बोलियों और संस्कृतियों का संगम देखने को मिलता है। भारत की सांस्कृतिक विरासत देश को समृद्ध बनाती है। उन्होंने कहा कि संपूर्णता के लिए विज्ञान और संस्कृति का संगम आवश्यक है।
प्रो. दास ने राजस्थान की समृद्ध संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संस्कृति लोगों को आत्मसम्मान के साथ जीना सिखाती है। उन्होंने कहा कि केवल डिग्री प्राप्त करने से मनुष्य के संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास नहीं होता। भारत में केवल डिग्री प्रदान करने के बजाय संपूर्ण मानव के विकास पर बल दिया जाता है। उन्होंने कहा कि यह अपनी संस्कृति में विश्वास के कारण संभव है।
विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक समिति की अध्यक्ष डॉ. हेमलता मंगलानी ने कहा कि भारत की संस्कृति केवल परंपराओं, रीति-रिवाजों और कलाओं का संग्रह नहीं है, बल्कि यह हमारी सभ्यताओं की आत्मा है। विभिन्न भाषाएं, लोकगीत, लोक नृत्य, नाट्य परंपराएं और साहित्य देश की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध बनाते हैं।
समारोह के दौरान विश्वविद्यालय के योग विभाग के विद्यार्थियों ने संगीत के साथ विभिन्न योग मुद्राओं का प्रदर्शन किया। इस प्रस्तुति के माध्यम से विद्यार्थियों ने योग और संगीत का समन्वय प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री अमरदीप शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने कहा कि इस उत्सव में नृत्य, संगीत, रंगमंच और साहित्यिक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, एक-दूसरे से सीखने तथा आपसी संवाद और सहयोग को मजबूत करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह समारोह सभी प्रतिभागियों के लिए यादगार अनुभव सिद्ध होगा।
राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित कला-उत्सव 2026 के माध्यम से विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों को अपनी कलात्मक प्रतिभा प्रस्तुत करने के साथ-साथ देश की विविध सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। दो दिवसीय इस महोत्सव में आयोजित 11 प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों की रचनात्मकता, सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और आपसी सहयोग को मंच प्रदान कर रही हैं।