राजस्थान में किसानों को उर्वरकों के साथ दूसरे कृषि उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर करने और कृषि आदानों की बिक्री में अनियमितता बरतने वाले विक्रेताओं पर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। किसानों के आर्थिक शोषण, उर्वरकों की कालाबाजारी, निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली और जबरन टैगिंग पर अंकुश लगाने के लिए कृषि विभाग ने प्रदेशभर में निरीक्षण एवं निगरानी अभियान तेज कर दिया है। विभाग ने निरीक्षण व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए विशेष मोबाइल ऐप भी विकसित किया है। इसके माध्यम से अब तक 9,000 से अधिक कृषि आदान विक्रेताओं का निरीक्षण किया जा चुका है और विभिन्न अनियमितताओं के मामलों में 250 से अधिक विक्रेताओं के विरुद्ध कार्रवाई की गई है।

राज्य सरकार का कहना है कि किसानों के हितों की रक्षा, कृषि आदानों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, उचित मूल्य पर उपलब्धता बनाए रखने और उर्वरक वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता कायम करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। निरीक्षण अभियान के जरिए अनियमितताओं की पहचान कर दोषियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। यह कार्रवाई कृषि आदान वितरण व्यवस्था में गड़बड़ियों को लेकर सरकार के सख्त रुख को दर्शाती है।

कृषि विभाग ने निरीक्षण प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए विकसित मोबाइल ऐप के माध्यम से कृषि आदान विक्रेताओं की जांच को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा है। इससे निरीक्षण से संबंधित सूचनाओं के संकलन, निगरानी और समीक्षा में सुविधा होगी। इस पहल का उद्देश्य निरीक्षण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जवाबदेह बनाना है, ताकि अनियमितताओं की समय पर पहचान कर संबंधित विक्रेताओं के विरुद्ध कार्रवाई की जा सके। विभाग ने प्रदेशभर में कृषि आदान विक्रेताओं के निरीक्षण का अभियान लगातार जारी रखने का निर्णय लिया है।

किसानों को उर्वरकों के साथ दूसरे उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य करने की शिकायतों पर भी कृषि विभाग ने सख्ती दिखाई है। कृषि आयुक्तालय की ओर से 23 अक्टूबर 2026 को जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि किसानों को यूरिया, डीएपी अथवा अन्य अनुदानित उर्वरकों के साथ जिंक, सल्फर, कीटनाशक, जैव उर्वरक या अन्य कृषि उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। जबरन टैगिंग की ऐसी गतिविधियों में किसी विक्रेता की संलिप्तता सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले में कार्रवाई केवल खुदरा विक्रेताओं तक सीमित नहीं रहेगी। संबंधित थोक विक्रेताओं के साथ उर्वरक निर्माता और आपूर्तिकर्ता कंपनियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। इस तरह विभाग ने उर्वरकों की आपूर्ति और बिक्री से जुड़ी पूरी व्यवस्था में जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसानों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने वाली गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

कृषि विभाग ने निर्देश दिए हैं कि अनियमितताओं की पुष्टि होने पर संबंधित विक्रेताओं और कंपनियों के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के लागू प्रावधानों के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए। प्रकरण की गंभीरता और विधिक प्रावधानों के आधार पर विक्रय प्राधिकार-पत्र का निलंबन अथवा निरस्तीकरण किया जा सकेगा। आवश्यकतानुसार एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई भी की जाएगी।

उर्वरकों की उपलब्धता और बिक्री व्यवस्था की निगरानी के लिए प्रदेश के सभी जिलों में विशेष निरीक्षण दल गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। ये दल उर्वरक कंपनियों, गोदामों तथा थोक एवं खुदरा विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों का नियमित निरीक्षण करने के साथ औचक जांच भी करेंगे। निरीक्षण के दौरान उर्वरकों की उपलब्धता, स्टॉक, बिक्री अभिलेखों और बिलों की जांच की जाएगी। इसके अलावा अन्य कृषि उत्पादों की खरीद-बिक्री से संबंधित दस्तावेजों की भी पड़ताल की जाएगी, ताकि जबरन टैगिंग और अन्य अनियमितताओं का पता लगाया जा सके।

किसानों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए प्रत्येक जिले में उर्वरक शिकायत प्रकोष्ठ अथवा हेल्पलाइन स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। जबरन टैगिंग और अन्य अनियमितताओं से जुड़ी शिकायतों पर 24 घंटे के भीतर प्रारंभिक कार्रवाई शुरू करनी होगी। विभाग ने शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए हैं, ताकि किसानों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अनावश्यक इंतजार न करना पड़े।

कृषि विभाग ने निरीक्षण, शिकायतों के निस्तारण और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय करने की बात कही है। निर्देशों की अनुपालना में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

राज्य सरकार का उद्देश्य किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उचित मूल्य पर उपलब्ध कराना और उन्हें किसी भी प्रकार के आर्थिक शोषण से बचाना है। मोबाइल ऐप आधारित निरीक्षण व्यवस्था, 9 हजार से अधिक निरीक्षण, 250 से अधिक विक्रेताओं के विरुद्ध कार्रवाई, विशेष निरीक्षण दलों का गठन और जबरन टैगिंग पर प्रतिबंध इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि उर्वरकों की कालाबाजारी, निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली, जबरन टैगिंग अथवा अन्य अनियमितताओं की शिकायत संबंधित जिला कृषि कार्यालय में दर्ज कराएं। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और कृषि आदान वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई का अभियान निरंतर जारी रहेगा।

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