तस्वीर में पंत कृषि भवन में कृषि अधिकारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक दिखाई दे रही है।

राजस्थान में किसानों को उनकी वास्तविक जरूरत के अनुसार समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने और कालाबाजारी, जमाखोरी तथा अनियमित वितरण पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार ने उर्वरक वितरण व्यवस्था में महत्वपूर्ण डिजिटल पहल की है। फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल का विस्तार अगले सप्ताह से प्रदेश के 15 जिलों में किया जाएगा और इसके बाद चरणबद्ध तरीके से इसे पूरे राजस्थान में लागू किया जाएगा।

प्रमुख शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी श्रीमती मंजू राजपाल की अध्यक्षता में गुरुवार को पंत कृषि भवन में उर्वरकों की मांग, आपूर्ति एवं उपलब्धता तथा फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में श्रीमती राजपाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के किसी भी किसान को उर्वरक के लिए परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों की वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप समय पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध करवाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। जिलों की मांग के अनुसार आपूर्ति की नियमित निगरानी की जाए और जहां मांग बढ़े, वहां तत्काल अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

श्रीमती राजपाल ने बताया कि खरीफ 2026 में अप्रैल से अगस्त तक भारत सरकार द्वारा राजस्थान को 9 लाख 28 हजार मैट्रिक टन यूरिया आवंटित किया गया है। 1 अप्रैल को उपलब्ध स्टॉक को शामिल करते हुए वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद प्रदेश में अब तक 13 लाख 12 हजार मैट्रिक टन यूरिया, यानी आवंटन का लगभग 141 प्रतिशत, उपलब्ध करवाया जा चुका है। अगस्त की शेष अवधि में भी लगभग 50 हजार मैट्रिक टन यूरिया की अतिरिक्त आपूर्ति प्रस्तावित है।

अप्रैल से अगस्त तक 3 लाख 80 हजार मैट्रिक टन डीएपी की मांग के विरुद्ध 1 अप्रैल के उपलब्ध स्टॉक सहित अब तक 3 लाख 41 हजार मैट्रिक टन डीएपी उपलब्ध करवाया गया है। आयातित डीएपी की आपूर्ति प्रभावित होने के बावजूद किसानों को वैकल्पिक फास्फेटिक उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। प्रदेश में अब तक 1 लाख 71 हजार मैट्रिक टन एनपीके तथा 3 लाख 76 हजार मैट्रिक टन एसएसपी उपलब्ध करवाया गया है। इस प्रकार किसानों को मांग के अनुरूप कुल 7 लाख 88 हजार मैट्रिक टन फास्फेटिक उर्वरक उपलब्ध कराया गया है।

वर्तमान में प्रदेश में 2 लाख 59 हजार मैट्रिक टन यूरिया, 67 हजार मैट्रिक टन डीएपी, 79 हजार मैट्रिक टन एनपीके तथा 1 लाख 69 हजार मैट्रिक टन एसएसपी का स्टॉक उपलब्ध है। उर्वरकों की आपूर्ति लगातार जारी है।

उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा राज्यों को उर्वरकों का माहवार एवं कम्पनीवार आवंटन किया जाता है। राज्य सरकार द्वारा प्राप्त आवंटन और जिलों की वास्तविक मांग के आधार पर जिलेवार आपूर्ति योजना तैयार कर उर्वरकों का पारदर्शी वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है।

फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल के माध्यम से सिरोही और राजसमंद जिलों में यूरिया की आपूर्ति एवं वितरण व्यवस्था सफलतापूर्वक लागू की जा चुकी है। इन दोनों जिलों में अब तक लगभग 78 हजार से अधिक किसानों को 12 हजार मैट्रिक टन से अधिक उर्वरक वितरित किया जा चुका है। सफल अनुभव को देखते हुए अब अगले सप्ताह से इस व्यवस्था का विस्तार प्रदेश के 15 जिलों में किया जाएगा। इसके बाद चरणबद्ध रूप से जल्द ही इसे पूरे राजस्थान में लागू किया जाएगा।

नई व्यवस्था के तहत किसान घर बैठे अपनी आवश्यकता के अनुसार उर्वरक की बुकिंग कर सकेंगे और नजदीकी अधिकृत रिटेलर से उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे। बुकिंग के बाद जारी होने वाला टोकन 48 घंटे तक वैध रहेगा। निर्धारित अवधि में उर्वरक प्राप्त नहीं करने पर किसान को पुनः बुकिंग करनी होगी।

इस डिजिटल व्यवस्था से वास्तविक जरूरत वाले किसानों को प्राथमिकता मिलेगी और उर्वरक वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी। साथ ही कालाबाजारी, जमाखोरी, अनियमित वितरण तथा अनावश्यक खरीद पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिलेगी।

किसानों को उर्वरकों की सुगम, पारदर्शी एवं समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल के तहत शुरू किया गया पायलट प्रोजेक्ट किसानों के लिए राहत और सुविधा का माध्यम बन रहा है। प्रदेश के राजसमंद और सिरोही जिलों में 25 जून से लागू इस पायलट प्रोजेक्ट के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं।

नई व्यवस्था के माध्यम से उर्वरक वितरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित और किसान-केंद्रित बनाया गया है। इसके चलते वास्तविक किसानों तक उर्वरक की पहुंच सुनिश्चित होने के साथ ही उर्वरक की कालाबाजारी, अनावश्यक जमाखोरी और कृत्रिम कमी पैदा करने जैसी गतिविधियों पर प्रभावी लगाम लगी है।

नई व्यवस्था से किसानों को समय पर और नजदीक उर्वरक उपलब्ध होने से उनमें खुशी और उत्साह का माहौल है। किसानों का कहना है कि यदि इस व्यवस्था को प्रदेश के अन्य जिलों में भी प्रभावी रूप से लागू किया जाता है तो उर्वरक वितरण व्यवस्था और अधिक सुगम एवं पारदर्शी हो सकेगी।

पायलट प्रोजेक्ट के तहत किसानों को उर्वरक की आवश्यकता के अनुसार आसान बुकिंग की सुविधा मिल रही है। बुकिंग के बाद किसानों को उनके नजदीकी अधिकृत फर्टिलाइजर विक्रेता या केंद्र से समय पर उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे किसानों को उर्वरक के लिए अनावश्यक रूप से एक केंद्र से दूसरे केंद्र के चक्कर लगाने और लंबी कतारों में खड़े रहने की परेशानी से काफी हद तक निजात मिली है।

फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल के माध्यम से उर्वरक की मांग से लेकर उपलब्धता एवं वितरण तक की प्रक्रिया पर बेहतर निगरानी संभव हो रही है। तकनीक के प्रभावी उपयोग से बिचौलियों की भूमिका सीमित होने के साथ ही उर्वरक की वास्तविक मांग और वितरण की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। इससे जरूरतमंद किसानों को प्राथमिकता के साथ उर्वरक उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है।

वर्तमान मौसम एवं बारिश की स्थिति को देखते हुए श्रीमती राजपाल ने अधिकारियों को किसानों के बीच यूरिया के संतुलित एवं आवश्यकता आधारित उपयोग को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसान फसल की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरकों का प्रयोग करें तथा मृदा स्वास्थ्य कार्ड में दी गई सिफारिशों के आधार पर संतुलित मात्रा में उर्वरक डालें।

उन्होंने कहा कि अनावश्यक एवं अत्यधिक यूरिया के उपयोग से किसान की लागत बढ़ने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता और स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए गांव-गांव तक जागरूकता पहुंचाकर किसानों को सही मात्रा, सही समय और सही तरीके से उर्वरक उपयोग के लिए प्रेरित किया जाए।

आयुक्त कृषि श्री नरेश कुमार गोयल ने कहा कि उर्वरकों की उपलब्धता और संतुलित उपयोग को लेकर किसानों तक सही जानकारी पहुंचाने के लिए कृषक सखी, कृषक साथी एवं कृषि पर्यवेक्षकों के माध्यम से व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। कृषि कार्मिक किसानों को फसलवार उर्वरकों की आवश्यकता, उचित मात्रा एवं उपयोग के सही समय की जानकारी देंगे।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है और जिलों की आवश्यकता के अनुसार लगातार आपूर्ति की जा रही है। किसी भी जिले अथवा क्षेत्र में मांग बढ़ने पर तत्काल अतिरिक्त आपूर्ति की व्यवस्था की जाएगी, ताकि किसानों को किसी भी स्थिति में परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

श्री गोयल ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध करवाना नहीं, बल्कि हर किसान तक पारदर्शी, सुगम, तकनीक आधारित और जरूरत के मुताबिक उर्वरक पहुंचाना है। फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण डिजिटल पहल है, जो प्रदेश की उर्वरक वितरण व्यवस्था को अधिक किसान-केंद्रित, पारदर्शी और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

बैठक में अतिरिक्त निदेशक कृषि (आदान) श्री गोपाल लाल सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे एवं सभी अतिरिक्त निदेशक कृषि (विस्तार) खंड और सभी संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) जिला परिषद् वीसी के माध्यम से जुड़े। राजस्थान में उर्वरक वितरण की यह नई व्यवस्था मांग, आपूर्ति और उपलब्धता की निगरानी को डिजिटल आधार देकर किसानों तक जरूरत के मुताबिक उर्वरक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

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