जयपुर में कृषि विभाग ने डिग्गी और फार्म पॉण्ड में डूबने की दुर्घटनाएं रोकने के लिए अगस्त 2026 में नए सुरक्षा मानक लागू किए।

जयपुर, 11 अगस्त। प्रदेश में डिग्गी, फार्म पॉण्ड (खेत तलाई) एवं अन्य जल संचयन संरचनाओं में डूबने की दुर्घटनाओं की रोकथाम और जन एवं पशुधन की सुरक्षा के लिए कृषि विभाग ने सख्त सुरक्षा निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों एवं लाभार्थियों को इन निर्देशों की तत्काल प्रभाव से पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

निर्देशों के अनुसार प्रत्येक डिग्गी, फार्म पॉण्ड एवं अन्य जल संचयन संरचना के चारों कोनों पर पर्याप्त लंबाई की मजबूत रस्सी स्थायी रूप से गाड़े गए खूंटों से सुरक्षित रूप से बांधना अनिवार्य होगा। रस्सी का एक सिरा पानी में छोड़ा जाएगा, ताकि पानी में गिरने की स्थिति में व्यक्ति उसका सहारा लेकर सुरक्षित बाहर निकल सके। प्रत्येक जल संरचना में कम से कम 1 से 2 नए अथवा पुरानी ट्यूब में हवा भरकर ‘लाइफ सेविंग फ्लोट’ के रूप में रस्सी से बांधकर हमेशा पानी में उपलब्ध रखना भी जरूरी होगा।

जल संरचनाओं के चारों ओर न्यूनतम 2 फीट ऊंची प्लास्टरयुक्त सुरक्षा दीवार बनाई जाएगी। इसके ऊपर जाली, कांटेदार तार अथवा परिस्थितियों के अनुरूप अन्य उपयुक्त सुरक्षा बाड़ लगाना सुनिश्चित किया जाएगा। स्थानीय परिस्थितियों एवं आवश्यकता के अनुसार करौंदा, खैरी, बांस, डंडा थोर, नागफणी आदि कांटेदार पौधों का उपयोग वानस्पतिक सुरक्षा बाड़ (Live Fence) के रूप में भी किया जा सकेगा।

प्रत्येक डिग्गी, फार्म पॉण्ड एवं अन्य जल संचयन संरचना के निर्माण के बाद उसके समीप स्पष्ट एवं दृष्टिगोचर स्थान पर लाल रंग में ‘सावधान/खतरा, गड्ढा गहरा है, बच्चों को दूर रखें’ अंकित चेतावनी बोर्ड लगाना अनिवार्य किया गया है।

स्थायी जल संरचनाओं में सुरक्षित आवागमन के लिए आवश्यकता के अनुसार सीढ़ियों की व्यवस्था की जाएगी। प्लास्टिक लाइनिंग वाली डिग्गियों में कृषक की सुविधा के अनुसार मजबूत प्लास्टिक रस्सी, लकड़ी अथवा लोहे की सीढ़ी स्थापित की जाएगी, ताकि किसी आकस्मिक परिस्थिति में सुरक्षित बाहर निकलने में सहायता मिल सके।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी नवीन डिग्गी, फार्म पॉण्ड एवं अन्य जल संचयन संरचनाओं में निर्धारित सुरक्षा उपायों की पालना अनिवार्य होगी। सुरक्षा प्रावधानों की पूर्ण अनुपालना के बिना निर्माण कार्य को पूर्ण नहीं माना जाएगा और संबंधित विभागीय योजना के अंतर्गत अनुदान अथवा वित्तीय सहायता देय नहीं होगी। पूर्व में निर्मित सभी डिग्गी, फार्म पॉण्ड एवं अन्य जल संचयन संरचनाओं में भी संबंधित लाभार्थियों को आदेश जारी होने की तिथि से दो माह के भीतर निर्धारित सुरक्षा उपाय अनिवार्य रूप से स्थापित करने होंगे।

सुरक्षा उपायों की प्रभावी पालना के लिए संबंधित विभागीय अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण किया जाएगा। की गई कार्यवाही एवं निरीक्षण की एकीकृत पाक्षिक प्रगति रिपोर्ट निर्धारित प्रारूप में जिला स्तर से कृषि आयुक्तालय को भेजी जाएगी। निरीक्षण के दौरान सुरक्षा उपाय स्थापित पाए जाने वाली संरचनाओं के जियो-टैग युक्त फोटोग्राफ राज किसान साथी पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे।

निर्धारित सुरक्षा उपायों की स्थापना के साथ उनके नियमित रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित लाभार्थी/उपयोगकर्ता की होगी। संबंधित पंचायत, कृषि विभाग, ब्लॉक एवं जिला प्रशासन द्वारा समय-समय पर निरीक्षण कर निर्देशों की प्रभावी अनुपालना सुनिश्चित की जाएगी।

निर्धारित सुरक्षा उपायों की पूर्ण पालना करने वाले लाभार्थियों को सहायक निदेशक कृषि (विस्तार) के माध्यम से प्रोत्साहन स्वरूप प्रशस्ति-पत्र प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं सुरक्षा उपाय स्थापित नहीं करने वाले लाभार्थियों को नोटिस जारी कर निर्धारित अवधि में सुरक्षा प्रावधान सुनिश्चित करवाए जाएंगे।

निर्देशों के क्रियान्वयन में किसी नवीन निर्माण में निर्धारित सुरक्षा प्रावधान सुनिश्चित नहीं किए जाते हैं अथवा विभागीय अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा निर्देशों की पालना में लापरवाही बरती जाती है, तो संबंधित अधिकारी/कर्मचारी के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

कृषि विभाग का यह कदम प्रदेश में जल संचयन संरचनाओं को सुरक्षित बनाने, विशेषकर बच्चों एवं पशुधन को डूबने की दुर्घटनाओं से बचाने तथा किसानों में सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

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